अच्युताय नमः
अनन्ताय नमः
गोविन्दाय नम:
इन तीनों को पृथक मूलमन्त्र जानो अथवा 'अच्युतानन्तगोविन्दाय नमः” इस मन्त्र का जप करे
"अच्युत अनंत गोविंद"
का जप भी फलदायक है
ऋषि, छन्दः तथा देवता एवं अंग मन्त्र को जानें बिना केवल मन्त्र जपने से भी यह मन्त्र साधक की रक्षा करता है।
अनन्ताय नमः
गोविन्दाय नम:
इन तीनों को पृथक मूलमन्त्र जानो अथवा 'अच्युतानन्तगोविन्दाय नमः” इस मन्त्र का जप करे
"अच्युत अनंत गोविंद"
का जप भी फलदायक है
ऋषि, छन्दः तथा देवता एवं अंग मन्त्र को जानें बिना केवल मन्त्र जपने से भी यह मन्त्र साधक की रक्षा करता है।
पवित्र होकर नित्य प्रति पूर्वोक्त नामत्रय “अच्युत-अनन्त-
गोविन्द का जप करे । .इससे रोग से ग्रसित व्यक्ति. की रोग शान्ति हो जाती है।
इससे उत्तम और कोई उपाय रोग शांति का नहीं है।
गोविन्द का जप करे । .इससे रोग से ग्रसित व्यक्ति. की रोग शान्ति हो जाती है।
इससे उत्तम और कोई उपाय रोग शांति का नहीं है।
रविवार की
अष्टमी को १००८ अथवा १०८ मन्त्र जप करके रोगी व्यक्ति के मस्तक का मार्जन करे एवं प्रतिदिन २८ बार मन्त्र जप करके उसे जल पिलाये | तदनन्तर घृत मिश्चित तिल, दूब तथा गुरुच द्वारा अलग-अलग हवन करना चाहिए ।
अष्टमी को १००८ अथवा १०८ मन्त्र जप करके रोगी व्यक्ति के मस्तक का मार्जन करे एवं प्रतिदिन २८ बार मन्त्र जप करके उसे जल पिलाये | तदनन्तर घृत मिश्चित तिल, दूब तथा गुरुच द्वारा अलग-अलग हवन करना चाहिए ।
मन्त्र का एक लक्ष जप करने से महारोग शान्त हों जाता है। श्रीफल अथवा बेल के पेड़ की जड़ से रोगी का स्पर्श करते हुए मन्त्र का जप करके मन ही मन सूर्य का स्मरण सूर्यमण्डल देखते हुए करे। इससे रोगी के रोग का निवारण होता है।
कन्या की रोग शान्ति हेतु लावा से, स्त्री की शान्ति हेतु बिल्वपत्र से, पुत्रार्थी व्यक्ति घृत से होम करे । तिल-घृंत द्वारा हवन करने से आरोग्य प्राप्त होता है। गुरुच, घृत, दूर्वा, विल्व, कुश से होम करने पर कामनासिद्धि होती है।
दूर्वा से १००००० आहुति देने से ग्रहदोष, अपस्माररोग, कूष्माण्ड, पिशाच तथा प्रेतबाधा शान्त हो जाती है। रविवार को नाभिपर्यन्त जल में खड़े होकर १००८ मन्त्र जपने से ज्वर शान्त हो
जाता है।
जाता है।
पीपल वृक्ष का स्पर्श करते हुए रविमण्डल में स्थित कृष्ण का ध्यान करके १ वर्ष-पर्यन्त पूर्वोक्त तीनों मन्त्र को जपे | इससे इच्छानुरूप फल मिलता है ।
इस नाम के उच्चारण से समस्त रोग निवृत्त हो जाते हैं
इस नाम के उच्चारण से समस्त रोग निवृत्त हो जाते हैं
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