प्रतिज्ञ
प्रतिज्ञ

@RamaInExile

6 Tweets 18 reads Dec 30, 2020
हे मूर्खाधिपत्यम्बेडकरवादी !!
• चन्द्रगुप्त मौर्य , भगवान् बुद्ध के पहले भी नदी का नाम सरयू ही था । सर + युक्त ????? आ + योद्धा ???? 🤣🤣🤣
अयिये सरयू के नामोल्लेख का इतिहास पर प्रकाश डालते है-
• ऋग्वेद(१५०० ईसा पूर्व-( वामपंथी इतिहासकारों के अनुसार ही)) में " सरयू " का ३ बार प्रयोग हुआ है ।
अथर्ववेद में भी इसका वर्णन है ।
• पाणिनि अष्टाध्यायी ( ~६०० ईसा पूर्व) में भी सरयू का उल्लेख है ।
• महाभारत ( ~१२०० ईसा पूर्व) में सरयू का कुछ इस प्रकार उल्लेख मिलता है -
"हस्यां शतकुभां च सरयूं च तथैव चए चर्मण्वतीं वेत्रवतीं हस्तिसोमां दिश्र तथ"
• रामायण (~२०० ईसा पूर्व) में भी सरयू और अयोध्या का वर्णन है
• बौद्ध ग्रंथों में भी सरयू ( पालि रूपांतर -" सरभू ")
का उल्लेख मिलता है ,साथ ही अयोध्या को साकेत के अलावा "अयोज्झा /अयुज्झनगर "भी कहा गया है
सुत्त पितक (~४०० ईसा पूर्व) के संयुक्त निकाय में " सरभू" का प्रयोग है --
इसके अतिरिक्त विभिन्न पुराणों ,अन्य बौद्ध ग्रंथों ,काव्यो में सरयू अंकित है ।
•चन्द्रगुप्त के समकालीन मेगास्थनीज ने भी सरयू का उल्लेख किया है।
सरयू की व्युतपत्ति -
सरयू संस्कृत के ' सर् ' धातु से आया है जिसका मूलभूत अर्थ है - प्रवाह ,तरल,बहाव ।
सरयू का अर्थ हवा,बहाव से है ।
पौराणिक मान्यता में- सरयू की उत्पत्ति ब्रह्मसर से होने के कारण इसका नाम सरयू या (शरयू) पड़ा है।
दोस्तों-
मनगढ़ंत इतिहास से जातिगत विद्वेष उत्त्पन्न करना ही इनका मूल उद्देश्य है ।
इन अज्ञानियो को बौद्ध दर्शन,ग्रंथ का भी ज्ञान नहीं है।
!! नमो बुद्धाय !!

Loading suggestions...