3. रावण ने केवल अपनी बहन का प्रतिशोध लेने के लिए सीताजी का अपहरण किया था.
यह तो स्पष्ट है कि रावण ने सीताजी से पहले भी कई स्त्रियों का अपहरण एवं दुष्कर्म किया थे.
अब क्या केवल सीताजी के साथ ही वह सहसा एक अच्छा व्यक्ति बन गया ?
देखते हैं-
यह तो स्पष्ट है कि रावण ने सीताजी से पहले भी कई स्त्रियों का अपहरण एवं दुष्कर्म किया थे.
अब क्या केवल सीताजी के साथ ही वह सहसा एक अच्छा व्यक्ति बन गया ?
देखते हैं-
आप किसका विश्वास करेंगे?
साक्षात माता लक्ष्मी का रूप माता सीता एवं श्रीराम के परमभक्त पवनपुत्र हनुमानजी का ?
आदिकवि वाल्मीकि जिन्होंने ये कथा लिखी उनका?
या रावण को सत्पुरुष सिद्ध करने का प्रयास करने वाले लोगों का ?
साक्षात माता लक्ष्मी का रूप माता सीता एवं श्रीराम के परमभक्त पवनपुत्र हनुमानजी का ?
आदिकवि वाल्मीकि जिन्होंने ये कथा लिखी उनका?
या रावण को सत्पुरुष सिद्ध करने का प्रयास करने वाले लोगों का ?
लक्ष्मण जी को ये कथित उपदेश देने का समय रावण को मिला ही नहीं.
ये वैसी ही बात है, जैसे महाभारत में अर्जुन के आन्जलिक अस्त्र द्वारा कर्ण का मस्तक कट जाने के उपरान्त भी समाज में ऐसी मूर्खतापूर्ण अफवाह है कि कर्ण ने मरते समय अपने सोने का दांत उखाड़कर श्रीकृष्ण को दान में दे दिया था जो कि उसके पास ब्राह्मण का वेश बनाकर आए थे.🤣
क्या रावण जैसा दुरात्मा,वेदों का विध्वंस करने वाला, ब्राह्मणों की हत्या करने वाला, मनुष्यों का मांस खाने वाला, परायी स्त्रियों का अपहरण एवं बलात्कार करने वाला, अपने धर्मात्मा भाई को राज्य से निकाल देने वाला, लक्ष्मण जी को ज्ञान देता?
रावण जैसा महामूर्ख जो सारे शास्त्रज्ञान की धज्जियां उड़ाकर अपने सम्पूर्ण जीवनकाल में तीनों लोकों पर अपने अत्याचार से उनको रुला देता था, दूसरों की स्त्रियों का अपहरण एवं बलात्कार करता था, मनुष्यों का मांस खाता था, धर्म का नाश करता था, वह कब से महाज्ञानी हो गया?
लक्ष्मण जी जो कि यज्ञों एवं ब्राह्मणों की रक्षा करने वाले, अपने भाई के लिए राज्य के सुखों का त्याग करके उनके साथ वनवास जाने वाले, अपनी भाभी को माता समझने वाले थे, उनको रावण क्या ज्ञान दे देता?
7. रावण द्रविड़/कथित मूलनिवासी/कबीलेवाला-आदिवासी/नीची जाति का था.
इस प्रकार की आधारहीन बातें केवल ये लोग कर सकते हैं-
-मार्क्सवादी इतिहासकार(इनके मतानुसार कभी हिन्दू धर्मग्रन्थ कपोल-कल्पनाएँ होती हैं, तो कभी कुछ बातें उसमें सत्य होती हैं)
इस प्रकार की आधारहीन बातें केवल ये लोग कर सकते हैं-
-मार्क्सवादी इतिहासकार(इनके मतानुसार कभी हिन्दू धर्मग्रन्थ कपोल-कल्पनाएँ होती हैं, तो कभी कुछ बातें उसमें सत्य होती हैं)
- अर्बन नक्सल-अम्बेडकरवादी(इन मार्क्स एवं अम्बेडकर के मानसपुत्रों के अनुसार हिन्दू धर्मशास्त्रों में वर्णित सभी दुष्ट खलनायक द्रविड़/आदिवासी/नीची जाति के थे. और इसके लिए इनके पास कोई प्रमाण है ही नहीं.)
मुख्य विषय पर आते हैं.
रावण किसका पुत्र था? किस कुल का था?
मुख्य विषय पर आते हैं.
रावण किसका पुत्र था? किस कुल का था?
वाल्मीकि रामायण में वर्णित इन सारे कथनों से ये स्पष्ट रूप से प्रमाणित हो जाता है कि रावण में निम्नलिखित गुण थे -
-वैदिक यज्ञों का विध्वसं करना
-परायी स्त्रियों का अपहरण एवं बलात्कार करना
-ब्राह्मणों की हत्या करना
-मनुष्यों का मांस खाना
-तीनों लोकों को कष्ट पहुंचाकर रुलाना
-वैदिक यज्ञों का विध्वसं करना
-परायी स्त्रियों का अपहरण एवं बलात्कार करना
-ब्राह्मणों की हत्या करना
-मनुष्यों का मांस खाना
-तीनों लोकों को कष्ट पहुंचाकर रुलाना
-अपनी तुच्छ वासना की पूर्ति हेतु अपने राज्य को युद्ध में झोंकना
-अपने सच्चे हितैषियों के वचनों(जैसे विभीषण) को अनसुना करना
-अहंकार
-कपट
-क्रूरता
-अपने सच्चे हितैषियों के वचनों(जैसे विभीषण) को अनसुना करना
-अहंकार
-कपट
-क्रूरता
परन्तु यहाँ पर सबसे आवश्यक प्रश्न यह है-
यदि रावण सच में इतना दुष्ट,क्रूर और बलात्कारी था, तो उसके महिमामंडन के पीछे क्या उद्देश्य है?
उद्देश्य यह है- हिन्दू समाज का चारित्रिक पतन.
यदि रावण सच में इतना दुष्ट,क्रूर और बलात्कारी था, तो उसके महिमामंडन के पीछे क्या उद्देश्य है?
उद्देश्य यह है- हिन्दू समाज का चारित्रिक पतन.
ऐसा निम्नलिखित कारणों से होता है-
-जब भी रावण जैसे असामाजिक तत्वों की तुलना कोई श्रीराम या लक्ष्मण जी से करता है एवं उसे भी इन्हीं के सामान दर्शाने का प्रयास करता है, तो हिन्दू समाज में धर्म और अधर्म में कोई अंतर नहीं रह जाता.
-जब भी रावण जैसे असामाजिक तत्वों की तुलना कोई श्रीराम या लक्ष्मण जी से करता है एवं उसे भी इन्हीं के सामान दर्शाने का प्रयास करता है, तो हिन्दू समाज में धर्म और अधर्म में कोई अंतर नहीं रह जाता.
-उससे रावण जैसे परस्त्रीगामी लोगों को बढ़ावा मिलता है. ऐसे लोग रावण का उदाहरण देकर स्वयं को उचित सिद्ध करने का प्रयास करते हैं.
-रावण को सही एवं मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम को गलत सिद्ध करने के प्रयास से कुछ हिन्दुओं की आस्था और निर्बल हो जाती है. इससे धर्म में विश्वास घटता है और ऐसे व्यक्ति नास्तिक Liberals की सभी सामजिक एवं पारिवारिक बंधनों से मुक्त विचारधारा के प्रति आकर्षित होते हैं.
-जब एक हिन्दू अपने धर्म से दूर होता है, तो समझिये उसका पूरा परिवार भी होता है. उसके बच्चों पर भी इसका दुष्प्रभाव पड़ता है.
इस प्रकार धीरे-धीरे इससे सम्पूर्ण हिन्दू समाज सुदृढ़ होने के स्थान पर शक्तिहीन हो जाता है (अपने धर्म रुपी जड़ से ही कट जाता है).
धन्यवाद.🙏
इस प्रकार धीरे-धीरे इससे सम्पूर्ण हिन्दू समाज सुदृढ़ होने के स्थान पर शक्तिहीन हो जाता है (अपने धर्म रुपी जड़ से ही कट जाता है).
धन्यवाद.🙏
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