पर उससे पहले मेरे स्रोत-
गीता प्रेस महाभारत
भंडारकर ओरिएण्टल रिसर्च इंस्टिट्यूट(BORI),पुणे द्वारा जारी की गई महाभारत की क्रिटिकल एडिशन (CE)
गीता प्रेस महाभारत
भंडारकर ओरिएण्टल रिसर्च इंस्टिट्यूट(BORI),पुणे द्वारा जारी की गई महाभारत की क्रिटिकल एडिशन (CE)
यदि किसी को ऐसा लगता है कि B.R. Chopra की महाभारत बहुत शोध के बाद बनाई गई थी, तो उनकी जानकारी के लिए मैं पहले ही स्पष्ट कर देता हूँ की वो महाभारत भी कथित तौर पर BORI के अनुसंधान पर आधारित थी.
भले ही कहानी को टीवी सीरियल द्वारा कितना भी बिगाड़ कर क्यों ना दिखाया गया हो.😂
भले ही कहानी को टीवी सीरियल द्वारा कितना भी बिगाड़ कर क्यों ना दिखाया गया हो.😂
तो कवच-कुंडल कर्ण को किसी पूर्वजन्म की तपस्या के कारण नहीं मिले और सूर्यपुत्र होने के कारण तो कदापि नहीं क्योंकि यदि ऐसा होता, तो रामायण में सुग्रीव के पास भी कवच-कुंडल होते.
यदि अब भी लगता है कि सूर्यपुत्र होने के कारण उसे कवच-कुंडल मिलने चाहिए थे ,तो इन बातों को मत भूलिए –
यदि अब भी लगता है कि सूर्यपुत्र होने के कारण उसे कवच-कुंडल मिलने चाहिए थे ,तो इन बातों को मत भूलिए –
1. श्रीराम को भी कोई विष्णुजी के अस्त्र ( सुदर्शन चक्र, कुमौदिकी गदा, सारंग धनुष,इत्यादि ) पैदा होने पर नहीं मिले थे.
उनको इन अस्त्रों का ज्ञान अपने गुरुओं ( ब्रह्मर्षि विश्वामित्र, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि अगत्स्य) से शिक्षा प्राप्त करने पर मिला था.
उनको इन अस्त्रों का ज्ञान अपने गुरुओं ( ब्रह्मर्षि विश्वामित्र, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि अगत्स्य) से शिक्षा प्राप्त करने पर मिला था.
2. अर्जुन( पूर्वजन्म में महर्षि नर) जो कि भगवान् विष्णु का ही अंशावतार थे, उनको भी गांडीव घनुष सभापर्व के खंडव दहन के समय मिला था.
वो भी तब, जब वे और श्रीकृष्ण ब्रह्माजी के आदेश पर खांडव दहन के लिए तैयार हो गए थे.
वो भी तब, जब वे और श्रीकृष्ण ब्रह्माजी के आदेश पर खांडव दहन के लिए तैयार हो गए थे.
जब कर्ण के पास कवच-कुंडल थे-
1. तब भी महाभारत के सभापर्व में वो भीमसेन (जो युधिष्ठिर को चक्रवर्ती सम्राट बनाने के लिए और पूर्व दिशा के राज्यों को जीतने निकले थे।) द्वारा परास्त हो गया था और उसको युधिष्ठिर का करदाता राजा बना दिया गया था .
1. तब भी महाभारत के सभापर्व में वो भीमसेन (जो युधिष्ठिर को चक्रवर्ती सम्राट बनाने के लिए और पूर्व दिशा के राज्यों को जीतने निकले थे।) द्वारा परास्त हो गया था और उसको युधिष्ठिर का करदाता राजा बना दिया गया था .
2.वनपर्व के घोष-यात्रा पर्व में कर्ण गन्धर्वों के हाथों मृत्यु के भय से विकर्ण के रथ पर कूदकर दुर्योधन को अकेला छोड़कर भाग गया था.
इन्द्रदेव का शक्ति अस्त्र उसे विजय दिलवाने में कवच-कुंडल से ज्यादा उपयोगी होता.
इन्द्रदेव का शक्ति अस्त्र उसे विजय दिलवाने में कवच-कुंडल से ज्यादा उपयोगी होता.
यदि इन्द्रदेव उसे ये बात नहीं बताते, और कर्ण अर्जुन को मारने के उत्साह में मदमस्त होकर इस अस्त्र को चला देता (जब तक इसकी अत्यधिक आवश्यकता नहीं होती अर्थात उसके दूसरे अस्त्र ख़त्म नहीं हुए होते) , तो वो शक्ति उसकी पर आ पड़ती और उसका वहीँ पर अंत हो जाता.
तो यह तो स्पष्ट है कि कर्ण धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ा ही नहीं पाया था शल्य की तरह बलवान होने पर भी.😆
एक प्रश्न जो मुझसे किसी व्यक्ति ने पूछा था-
किसी को कितने पाप/अधर्मी कृत्य करने चाहिए कि उसे बुरा या दुष्ट की संज्ञा दी जाए?
यदि किसी ने ऐसे कर्म कम किए हों, और किसी ने अधिक, तो किसे बुरा कहा जाएगा?
पांडवों ने बहुत कम अधर्म किए थे. दुर्योधन और कर्ण ने बहुत.
किसी को कितने पाप/अधर्मी कृत्य करने चाहिए कि उसे बुरा या दुष्ट की संज्ञा दी जाए?
यदि किसी ने ऐसे कर्म कम किए हों, और किसी ने अधिक, तो किसे बुरा कहा जाएगा?
पांडवों ने बहुत कम अधर्म किए थे. दुर्योधन और कर्ण ने बहुत.
कर्ण ने चीरहरण के लिए दुशासन को उकसाया और युधिष्ठिर ने दांव पर लगाया (जो शायद उनके जीवन का पहला अधर्म होगा).
तो क्या युधिष्ठिर बुरे नहीं थे?
मेरा उत्तर-
ये तो इस बात पर भी निर्भर करता है कि वह व्यक्ति कैसा है.
तो क्या युधिष्ठिर बुरे नहीं थे?
मेरा उत्तर-
ये तो इस बात पर भी निर्भर करता है कि वह व्यक्ति कैसा है.
मैं 2 उदाहरणों के माध्यम से समझाता हूँ -
मान लीजिए राहुल नाम का एक व्यक्ति है जो रमेश से जलता है.
राहुल ने रमेश के विरुद्ध कई कुकर्म करने की योजनाएँ बनाई हैं. वो संतुष्टि पाने के लिए रमेश को जान से भी मार सकता है.
मान लीजिए राहुल नाम का एक व्यक्ति है जो रमेश से जलता है.
राहुल ने रमेश के विरुद्ध कई कुकर्म करने की योजनाएँ बनाई हैं. वो संतुष्टि पाने के लिए रमेश को जान से भी मार सकता है.
यदि उसे मौका मिले और रोकने वाला कोई न हो वो अपने तुच्छ सम्मान के लिए निर्दोष व्यक्तियों को भी मार सकता है.
वो दिन रात इसी के बारे में सोचता है कि मैं रमेश को किस तरह से नीचा दिखाऊं या जान से मार दूं .
वैसे जान से मारने के विषय में वो अधिक सोचता है.
वो दिन रात इसी के बारे में सोचता है कि मैं रमेश को किस तरह से नीचा दिखाऊं या जान से मार दूं .
वैसे जान से मारने के विषय में वो अधिक सोचता है.
राहुल को लगता है कि वो सही कर रहा है या फिर वो जानता है कि ये गलत है परन्तु उसे अपने प्रतिद्वंद्वी को नीचा दिखाने में इतना इतना आनंद मिलता है कि उसे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि उसके कृत्य सही हैं या गलत.
उसे ऐसा करके प्रसन्नता इसलिए होती है क्योंकि वो रमेश को अपने से अधिक मेधावी,धनी,लोकप्रिय,आदरणीय नहीं देख सकता.
राहुल सोचता है, “वृद्ध व्यक्ति भी रमेश का सम्मान करते हैं.
ये कैसे संभव है ?” भले ही राहुल स्वयं उनका सम्मान नहीं करता हो.
राहुल रमेश को दुखी देखकर आनंदित होता है.
राहुल सोचता है, “वृद्ध व्यक्ति भी रमेश का सम्मान करते हैं.
ये कैसे संभव है ?” भले ही राहुल स्वयं उनका सम्मान नहीं करता हो.
राहुल रमेश को दुखी देखकर आनंदित होता है.
वो रमेश को प्रताड़ित करने के लिए उसके परिवारवालों और प्रियजनों को अपना निशाना बनाने में भी नहीं चूकता.
रमेश, उसके परिवार और मित्रों को दुख,चिंता,निराशा,अवसाद और विपत्तियों से त्रस्त देख वो मन ही मन या कभी-कभी प्रत्यक्ष रूप से भी प्रसन्न हो जाता है.
रमेश, उसके परिवार और मित्रों को दुख,चिंता,निराशा,अवसाद और विपत्तियों से त्रस्त देख वो मन ही मन या कभी-कभी प्रत्यक्ष रूप से भी प्रसन्न हो जाता है.
उपरोक्त सभी धटनाओं एवं कर्ण के वचनों, कर्मों से ऐसा ही प्रतीत होता है कि कर्ण ने ये सारे कुकर्म अनजाने में नहीं अपितु अपने स्वभाववश और पांडवों (विशेषकर अर्जुन) के प्रति अपनी ईर्ष्या एवं द्वेष के कारण किए.
कर्ण ने अपने बाल्यकाल से ही पांडवों के विरुद्ध षड्यंत्र किए जैसे-
कर्ण ने अपने बाल्यकाल से ही पांडवों के विरुद्ध षड्यंत्र किए जैसे-
1.लाक्षागृह षड्यंत्र दुर्योधन एवं शकुनि के साथ मिलकर किया.
2.अर्जुन के द्रौपदी के स्वयंवर में सफल हो जाने पर द्रौपदी एवं द्रुपद की हत्या करने लिए राजाओं के समूह का नेतृत्व किया.
2.अर्जुन के द्रौपदी के स्वयंवर में सफल हो जाने पर द्रौपदी एवं द्रुपद की हत्या करने लिए राजाओं के समूह का नेतृत्व किया.
3. यह ज्ञात हो जाने पर कि पांडवों का विवाह द्रौपदी से हो गया है,धृतराष्ट्र को पांडवों से युद्ध के लिए प्रोत्साहित किया.
4.द्रौपदी को सभा में घसीटकर लाए जाने पर कर्ण ने हँसकर प्रसन्नता प्रकट की.
5.द्रौपदी वस्त्रहरण का सुझाव/आदेश दिया.
4.द्रौपदी को सभा में घसीटकर लाए जाने पर कर्ण ने हँसकर प्रसन्नता प्रकट की.
5.द्रौपदी वस्त्रहरण का सुझाव/आदेश दिया.
6. वस्त्रहरण असफल हो जाने के पश्चात भी अपना दुष्ट स्वभाव पुनः प्रकट करते हुए द्रौपदी से आपत्तिजनक बातें कहीं.
7.वनवास के समय भी पांडवों को मारने का षड्यंत्र स्वयं बनाया.
8.घोषयात्रा के बहाने पांडवों एवं द्रौपदी को अपमानित करने की योजना स्वयं बनाई.
7.वनवास के समय भी पांडवों को मारने का षड्यंत्र स्वयं बनाया.
8.घोषयात्रा के बहाने पांडवों एवं द्रौपदी को अपमानित करने की योजना स्वयं बनाई.
9. दुर्योधन को युद्ध के लिए उकसाया जबकि शकुनि ने उसे पांडवों का राज्य लौटा देने एवं शत्रुता का अंत करने की बातें कहीं थीं.
10. श्रीकृष्ण के शान्ति प्रस्ताव के समय उन्हें बंदी बना लेने के मूर्खतापूर्ण षड्यंत्र में भागीदार हुआ.
10. श्रीकृष्ण के शान्ति प्रस्ताव के समय उन्हें बंदी बना लेने के मूर्खतापूर्ण षड्यंत्र में भागीदार हुआ.
इन सब बातों से ही अनुमान लगाया जा सकता है कि टीवी सीरियल वालों, हिन्दू धर्म के कथित विद्वानों और कुछ साहित्यकारों के कारण हिन्दू जनमानस में कितनी भ्रांतियां भर चुकी हैं.
कोई भी सत्य जानने के पश्चात यही सोचेगा कि कर्ण के बारे में ऐसी मिथ्या बातें फैलाने से एवं उसके वास्तविक दुष्टता से परिपूर्ण चरित्र को छिपाने से किसी को क्या लाभ होगा?
लाभ ये होगा- कर्ण को बेचारा,भला सत्पुरुष, कथित दानवीर, सूतों को उच्च-वर्ण के लोगों द्वारा तिरस्कृत दिखाने से होता ये है कि दर्शक कर्ण के तथाकथित दुखदायी जीवन के लिए कुंती, भीष्म, द्रोण,कृप,व्यास, पांडव, स्वयं श्रीकृष्ण को भी दोषी मानने लगते हैं.
और जब कोई श्रीकृष्ण को दोषी मानता है, तब वो सनातन धर्म को भी मानने लगता है.
परन्तु क्या इस प्रकार की भ्रांतियों के लिए केवल साहित्यकार, टीवी सीरियल वाले निर्देशक ही उत्तरदायी हैं?
कदापि नहीं.
परन्तु क्या इस प्रकार की भ्रांतियों के लिए केवल साहित्यकार, टीवी सीरियल वाले निर्देशक ही उत्तरदायी हैं?
कदापि नहीं.
क्या कभी किसी सनातन धर्मी ने इन धारावाहिकों एवं साहित्यों पर कोई आपत्ति प्रकट की है?
नहीं.
परन्तु क्यों नहीं ?
क्योंकि अधिकतम लोगों ने स्वयं व्यास महाभारत एवं वाल्मीकि रामायण पढ़ा ही नहीं है.
नहीं.
परन्तु क्यों नहीं ?
क्योंकि अधिकतम लोगों ने स्वयं व्यास महाभारत एवं वाल्मीकि रामायण पढ़ा ही नहीं है.
कई लोग कहते हैं कि ये ग्रथ बड़े लम्बे हैं और उनके पास इन्हें पढने का कोई समय ही नहीं है.
पर वे टीवी पर 95 घंटे बी.आर.चोपड़ा की झूठी महाभारत, 94 घंटे स्टार प्लस की महानौटंकी महाभारत, 108 घंटे सिया के राम जैसी मानसिक प्रताड़ना, 200 घंटे राधाकृष्ण जैसा अत्याचार अवश्य देखते हैं.
पर वे टीवी पर 95 घंटे बी.आर.चोपड़ा की झूठी महाभारत, 94 घंटे स्टार प्लस की महानौटंकी महाभारत, 108 घंटे सिया के राम जैसी मानसिक प्रताड़ना, 200 घंटे राधाकृष्ण जैसा अत्याचार अवश्य देखते हैं.
इन टीवी सीरियल वालों ने रचनात्मक स्वतन्त्रता(Creative Liberty) का इतना लाभ उठाकर इतना बदलाव किया कि मूल महाभारत को ही इन्होने लगभग बदल दिया.
धर्मग्रंथों के अंतर्गत वाल्मीकि रामायण एवं व्यास महाभारत जैसे इतिहास एवं साहित्य में अंतर होता है - ये बात कई व्यक्ति समझते ही नहीं हैं .
धर्मग्रंथों के अंतर्गत वाल्मीकि रामायण एवं व्यास महाभारत जैसे इतिहास एवं साहित्य में अंतर होता है - ये बात कई व्यक्ति समझते ही नहीं हैं .
इन धर्मग्रंथों में वर्णित पात्रों से सम्बंधित जानकारियों का मूल स्रोत ये ग्रन्थ स्वयं हैं.
अर्थात- अमीश त्रिपाठी का Scion of Ikshvaku, चित्रा बनर्जी की Palace of Illusions, शिवाजी सावंत की मृत्युंजय को पढ़कर कोई भी क्रमशः श्रीराम, द्रौपदी, कर्ण का वास्तविक चरित्र नहीं जान सकता.
अर्थात- अमीश त्रिपाठी का Scion of Ikshvaku, चित्रा बनर्जी की Palace of Illusions, शिवाजी सावंत की मृत्युंजय को पढ़कर कोई भी क्रमशः श्रीराम, द्रौपदी, कर्ण का वास्तविक चरित्र नहीं जान सकता.
उसके लिए वाल्मीकि रामायण एवं व्यास महाभारत को ही गंभीरता से पढ़ना पड़ेगा.
ऐसी समस्याएं क्यों उत्पन्न होती हैं?
क्योंकि हिन्दू स्वयं अपने इतिहास(रामायण-महाभारत) जिनको पंचम वेद की संज्ञा दी गई है- उन्हें पढ़ते ही नहीं हैं.
ऐसी समस्याएं क्यों उत्पन्न होती हैं?
क्योंकि हिन्दू स्वयं अपने इतिहास(रामायण-महाभारत) जिनको पंचम वेद की संज्ञा दी गई है- उन्हें पढ़ते ही नहीं हैं.
यहीं सनातन धर्म के अनुयायी हार जाते हैं और विकृतियाँ करने वाले जीत जाते हैं.
हमारे अज्ञान से इनका व्यापार फलता-फूलता है.
इन समस्याओं का समाधान केवल एक है - वास्तविक धर्मग्रंथों का अध्ययन.
धन्यवाद.🙏
हमारे अज्ञान से इनका व्यापार फलता-फूलता है.
इन समस्याओं का समाधान केवल एक है - वास्तविक धर्मग्रंथों का अध्ययन.
धन्यवाद.🙏
@king_p_g क्योंकि मैंने केवल उनके द्वारा बनाया गया रामायण TV serial देखा है, इसलिए मैं उनके बाकी serials के बारे में कुछ नहीं कह सकता।
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