इतिहास-पुराण में हमें देवताओं के कई धनुषों के बारे में बताया गया है. यह छोटा-सा thread इन्हीं दिव्य धनुषों के बारे में है.
भगवान् विष्णु के शार्ङ्ग धनुष, भगवान् शिव के पिनाक धनुष और अर्जुन के द्वारा प्रयोग किए जानेवाले गाण्डीव धनुष की उत्पत्ति के विषय में स्वयं महादेव जी ने महाभारत के अनुशासनपर्व अध्याय 141 में पार्वती जी को यह बताया-
वाल्मीकि रामायण में भगवान् राम ने भगवान् शिव के जिस धनुष को तोडा था, वह धनुष पिनाक से भिन्न एक अन्य धनुष था जिसका प्रयोग महादेव ने त्रिपुर का अंत करने के लिए किया था. उस धनुष और भगवान् विष्णु के वैष्णव धनुष को विश्वकर्मा जी ने बनाया था. बालकाण्ड सर्ग 75 ,वाल्मीकि रामायण
नरकासुर को पराजित करने के पश्चात श्रीकृष्ण को शार्ङ्ग धनुष प्राप्त हुआ था. उद्योगपर्व अध्याय 158
आदिपर्व अध्याय 224 में गाण्डीव धनुष का वर्णन-
विराटपर्व अध्याय 43 में अर्जुन ने गाण्डीव धनुष के बारे में राजकुमार उत्तर को बताया-
उद्योगपर्व अध्याय 98 में देवर्षि नारद ने सूतपुत्र संजय को गाण्डीव धनुष के बारे में बताया-
शान्तिपर्व अध्याय 289. भगवान् शिव के पिनाक धनुष की उत्पत्ति-
अब विजय धनुष पर आते हैं. आजकल लोगों को यह भ्रम है कि वह धनुष महादेव का था. परन्तु कर्ण ने दुर्योधन को विजय धनुष के बारे में कर्णपर्व अध्याय 31 में बताया कि ये इन्द्रदेव का धनुष है जिसे विश्वकर्मा जी ने बनाया था.
विदर्भराज रुक्मी के पास भी विजय धनुष था.
उद्योगपर्व अध्याय 158