Kaustubh Bhardwaj 🦉
Kaustubh Bhardwaj 🦉

@PragmaticYodha

27 Tweets 7 reads Oct 04, 2021
-- Hindu Expansionist Vision --
विश्व कल्याण के लिए हिंदू धर्म को मैदान में उतरना नहीं , मैदान पर अधिकार करना होगा ।।
#FreeTemples is NOT enough
स्वतंत्र मंदिर नहीं , परमसशक्त मंदिर चाहिए !
पूरा थ्रेड ध्यान से पढ़िएगा ।।
शंकराचार्य जी ने संकेत में एक कड़वा सत्य व्यक्त किया है..
" क्या ये बात सत्य नहीं है कि जब १९५७ का बंटवारा हो रहा था तब हिंदुओं का एकमात्र आसरा मंदिर ही बने थे ?
क्या ये बात सच नहीं है कि विदेशी आक्रांता हमारे देश से थर थर कांपते थे की किला तो फतेह कर लिया, मंदिर का क्या
करेंगे ?
राज्यकोश लूटने से पहले कोश भगवान के संरक्षण में पहुंचा दिया जाता था । महिला शील धन - हमारी सबसे बड़ी संपत्ति - युद्ध की भेंट नहीं चढ़ती थी..
क्या मठों को कमज़ोर करना राजनेताओं की एक देशद्रोही षड्यंत्र विधा नहीं है ?"
एक सज्जन ने पूछा , "महाराज मंदिर स्वतंत्र तो करा दें, पर स्वतंत्र करवा के दें किसे ?"
"स्थानीय राजा महाराजाओं क्षत्रियों को ।"
स्वतंत्रता के बाद हमारे देश की अमूल्य क्षात्र विरासत को नपुंसक बनाने का कार्य हम सबने अपनी आंखों के सामने देखा है ..
यदि इन्हे आज भी मंदिर सौंप दिए जाएं , तो क्या एक भी christian missionary या अन्य धर्म परिवर्तन gang का सिक्का चलेगा कभी ?
परधर्म तो छोड़िए,
एक बारगी को दुष्कर्म बलात्कार की कल्पना करते हुए भी दुष्ट भयाक्रांत हो जाया करेंगे।
हमको मालूम है कि नेता काम करने से पहले कैसे नाच नचवाते हैं।
एक पार्टी कहती है " तुम दलित हो तुम्हारी सहायता नही करेंगे "
अमुक दल कहता है " तुम दलित हो सिर्फ तुम्हारी ही सहायता होगी "
दूसरा कहता है " तुम हिंदू हो तुम पीछे हटो !"
सरकारें आएंगी जाएंगी , अखंड रहेंगे मंदिर
ऋषिकेश ब्रह्मचारी जी ने युवाओं को एकांत में बुला कर कहा ,
" हमारे दो नारे हैं युवाओं के लिए -
१. हर हिंदू सनातनी हो
२. हर हिंदू सेना हो !
गुरुदेव ने कहा है कि हर एक युवा खुद को सैन्य बल के उपयुक्त बनाने हेतु व्यायाम करना शुरू करे ।"
यदि कोई युवा इस दिशा में sajj है तो वो ये थ्रेड सीरीज पढ़े । ये आप ही के लिए है।
मंदिर की शिल्प कला का टेंडर जिस दिन सरकारी ठेकेदार के हाथ से निकल कर क्षत्रियों के हाथ आया ,
एक भी शिल्पकार , नक्काशिकार, कुम्हार भूखे पेट नहीं मरेगा ।
भगवान श्री राम ने अपने गुरु वशिष्ठ से पूछा ,
" आप कर्म काण्ड वाले पंडितों को वेदाचार्यों के समान दर्जा क्यों देते हैं ?"
" राम, अयोध्या में नित्य सायं आरंभ यज्ञ वेदियों के दहन से होता है..
प्रत्येक वेदी में सिंदूर कपड़ा अर्घ पौधे आदि की बिक्री होती है...
... और इसी कारण ना कोई अयोध्या में भूखा मरता है ,
ना किसी पौधे की प्रजाति की विलुप्ति होती है ।।"
क्या आप जानते हैं दुनिया का सबसे बड़ा kitchen कहां है ?
अमेरिका ? इंग्लैंड ? दुनिया के सबसे रईस नोबेल प्राइज विजेता समाजसेवी के आंगन में ?
नहीं ।
विश्व के सबसे सशक्त धार्मिक मठ गोवर्धन मठ पूरी में !
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t.me
Note - This is not an official telegram channel of Govardhan Math. It's simply a community of like minded individuals that you won't regret joining in.
शंकराचार्य जी से एक समाजसेवी ने पूछा " आप प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर क ख ग क्यों नहीं कहते हैं ?"
" शंकराचार्य का पद ऊपर है या प्रधान मंत्री का ऊपर है ?
मैंने आज तक किसी नेता से कभी कोई भीख नहीं मांगी है । मैने अपने सारे कार्य एक भी बार चुके बिना सरकार को झुका कर किए हैं "
मठ के ही एक उच्च स्तर के सदस्य जिनका नाम लेना मैं ठीक नही समझता हमसे बाद में बोले ,
" यदि मंदिर मठ सशक्त हो कर के राजनीति की छाया से अलग स्वतंत्र हो जाएं ,
तो कल को यदि हम लोग प्रधान मंत्री को घाघरा पहन कर भी नाचने को कहेंगे तो उन्हे ये करने के लिए भी विवश होना पड़ेगा !"
उपर्युक्त थ्रेड को इस थ्रेड की दूसरी कड़ी माना जाए ।
हर हर महादेव !!
वैसे,
ऋषिकेश जी ने उपहास की शैली में ये भी व्यक्त किया की "मैंने भी हनुमान दंड लगाने शुरू किए थे ,
परंतु आज कल तो न खाने का समय है ना सोने का। ये हनुमान दंड स्वयं मेरे लिए ' दंड ' बन जाते हैं 😅"
परंतु निस्संदेह ऋषिकेश जी की श्रमशक्ति विस्मित करने वाली है ..
एक ऊंचे मठ सदस्य ने बताया " गुरुदेव रात को २ बजे सोते हैं और सुबह ५:३० बजे उठते हैं ।"
गुरु शिष्य परंपरा अनुसार मेरे अनुमान से ऋषिकेश जी गुरु के सोने के पश्चात ही सोते होंगे और गुरु के जागने से पहले जग जाते होंगे ।
ध्यान रहे ,
जब अन्य सब महंतों ने अयोध्या में अगल बगल मंदिर मस्जिद बनाने वाले कागज़ पर हस्ताक्षर कर दिया था ,
उस वक्त केवल पूरी शंकराचार्य अड़े रहे थे क्योंकि वो मंदिर का महत्व समझते हैं।
" मुझे इस कार्य के लिए अनेक यातनाएं भी दी गई । लेकिन मैं टस से मस नहीं हुआ ।"
क्या ये बात सत्य नहीं है कि यदि अयोध्या मंदिर और मस्जिद साथ साथ बना दिए जाते ,
तो एक दिन अचानक बॉम्ब विस्फोट और उसके उपरांत दंगे और अंततः एक गृह युद्ध a.k.a. 'Civil War' हो जाती।
शंकराचार्य का वचन है कि मंदिरों को निम्नलिखित १२ का केंद्र बनाना है -
१ शुचिता - यदि मंदिरों की साफ सफाई हो जाए तो जनता में golf court , farmhouse जैसे ढकोसलों के प्रति आकर्षण अंत हो जाएगा। और पर्यावरण का लाभ अलग।
२ सुंदरता
३ शील - एक ऐसी जगह जहां स्त्रीयों के सम्मान की
रक्षा हो
४ सहानुभूति - सारे हिंदू कुटुंब ( परिवार ) की तरह रहें और मंदिर सबको मानसिक शांति दिलाएं
५ सुमति - सद्भावना का प्रचार हो
६ शिक्षा - गुरुकल व्यवस्था
७ रक्षा
८ सेवा - कोई हिंदू गरीब भूख के मारे christian missionaries का ग्रास ना बने
९ संस्कृति - स्थानीय culture का भी
संरक्षण हो
१० धर्म
११ मोक्ष - लौकिक मुक्तता
धर्म क्या है ?
नीचे लिखी पंक्तियों का बारम बार पाठ करें और कंठस्थ भी कर लें । चाहे जन मन गण याद होवे या ना होवे परंतु ये अवश्य याद होना चाहिए -
एक और सहज सी बात कहता हुं ।
करवा चौथ जैसे त्योहारों पर मंदिर के गढ़ में सिंदूर बेचने वाली औरतों को बुला के बाहर बैठा लिया जाए और हर स्त्री से उसको लगाने का निवेदन किया जाए।
लाल दुपट्टा, धोती आदि भी रखा जाय।
गरीबों का भला भी होगा ,
संस्कार संरक्षण भी ।
This is serious.
Democracy को सार्थक बनाने का एक ही उपाय है - मंदिरों को राज्य का गढ़ बनाना ।

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