आमेर किला का सच्चा इतिहास
जब शिवाजी महाराज औरंगजेब के पास मनसबदारी माफ करना गलती से इधर उधर निकल जाता हा हिंदवी स्वराज्य के लिए आगरा गये तब शिवाजी महाराज को उनकी इच्छानुसार मनसब यानी हिंदवी स्वराज्य नही मिल पाया धूर्त औरंगजेब ने दक्कन के शेर को आ
जब शिवाजी महाराज औरंगजेब के पास मनसबदारी माफ करना गलती से इधर उधर निकल जाता हा हिंदवी स्वराज्य के लिए आगरा गये तब शिवाजी महाराज को उनकी इच्छानुसार मनसब यानी हिंदवी स्वराज्य नही मिल पाया धूर्त औरंगजेब ने दक्कन के शेर को आ
आगरा के किले में केद करवा दिया जब यह मराठा साम्राज्य के सेनापतियो को पता चली तो उन्होंने अपने १०० मराठाओं के साथ दिल्ली को जीतने के लिए चल यहा पड़ने को लगता होगा कि १०० सेनिको से दिल्ली केसे जीत सकते तो शिवाजी ने ही कहा था कि एक मराठा लाख मराठा यानि एक मराठा एक लाख के बराबर होता
यानि उस समय दिल्ली को जितने एक करोड़ सेनिक के बराबर थे वह मराठा फिर क्या धूर्त औरंगजेब की 4-5 लाख सेना को 10 वीर मराठो ने पल भर में हराकर दिल्ली विजय कर ली फिर मराठों ने धीरे धीरे सम्पूर्ण भारत में विजय प्राप्त कर ली शिवाजी महाराज ने अपने महान मराठा साम्राज्य पर शासनके
लिए भारत के विभिन्न हिस्सों में शानदार किले बनवाये जिसमें जोधपुर का मेहरानगढ़ , जेसलमेर का सोन दुर्ग , आमेर का किला , दिल्ली का लालकिला प्रमुख है बाद में वामपंथी इतिहासकारों ने इस सच को छुपा दिया ओर इन किलों का बनबाने का क्रेडिट राजपूतो को दे दिया
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