मत को मानने वाले पूजा में इस लकड़ी का प्रयोग करते हैं। लाल चंदन में सफेद चंदन की तरह कोई सुगंध नहीं होती है। औषधीय गुणों के साथ ही इसका प्रयोग सुंदरता को निखारने के लिए भी किया जाता है। इसमें कूलिंग प्रॉपर्टीज होती हैं, जो सूरज की रोशनी से हुए स्किन टैन को दूर करने में भी (2/9)
मदद करता है। अपनी एंटी बैक्टीरियल प्रॉपर्टी के कारण यह स्किन की देखभाल के लिए बड़े पैमाने पर इसका उपयोग होता है। रूबी लकड़ी नाम से प्रसिद्ध यह लकड़ी यूएई, जापान, सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया,समेत कई देशों में इसकी काफी माँग है। लेकिन इसकी डिमांड सबसे अधिक चीन में है। इसी कारण (3/9)
इसकी तस्करी होती है। चीन में इसकी लोकप्रियता चौदहवी से सत्रहवीं शताब्दी के मिंग वंश के शासकों के समय से है। अंग्रेजी अख़बार चाईना डेली के मुताबिक मिंग वंश के शासकों को लाल चंदन से बने फर्नीचर और सजावटी सामान इतने पसंद थे कि उन्होंने इसे सभी संभावित जगहों से मंगवाया। मिंग (4/9)
वंश और उसके बाद के शासकों के बीच लाल चंदन की लकड़ी के प्रति दीवानगी का पता इस बात से चलता है कि वहां 'रेड सैंडलवुड म्यूज़ियम' नाम का एक विशेष संग्रहालय है जहां लाल चंदन से बने अनगिनत फर्नीचर, सजावटी सामान संजोकर रखे गए हैं।
जापान में भी लाल चंदन की काफ़ी माँग थी जहां (5/9)
जापान में भी लाल चंदन की काफ़ी माँग थी जहां (5/9)
शादी के वक़्त दिए जाने वाले पारंपरिक वाद्य शामिशेन बनाने के लिए लाल चंदन का इस्तेमाल होता था, लेकिन अब यह परंपरा धीरे धीरे ख़त्म हो रही है और इसकी मांग घट रही है।
यह दुर्लभ पेड़ विश्व में और कंही नहीं मिलता। ये केवल आंध्रप्रदेश के चार ज़िलों नेल्लोर, चित्तुर, कुरनूल, (6/9)
यह दुर्लभ पेड़ विश्व में और कंही नहीं मिलता। ये केवल आंध्रप्रदेश के चार ज़िलों नेल्लोर, चित्तुर, कुरनूल, (6/9)
कडप्पा में फैली शेषाचलम की पहाड़ियों में ही उगते हैं। इस पेड़ की औसत ऊंचाई 8 से लेकर 11 मीटर तक होती है। इसका घनत्व काफी अधिक होता है और पानी में यह डूब जाती है। लाल चंदन की लकड़ियों की यही पहचान है।
एक क्विंटल लाल चंदन की कीमत 9 करोड़ से लेकर 15 करोड़ रुपये तक होती है। (7/9)
एक क्विंटल लाल चंदन की कीमत 9 करोड़ से लेकर 15 करोड़ रुपये तक होती है। (7/9)
दुर्लभ होने के कारण ही बेशक़ीमत है और इसी कारण इसकी तस्करी होती है। इसलिए इन जंगलों में एंटी स्मगलिंग टास्क फोर्स को तैनात किया गया है और सेटेलाइट से निगरानी की जाती है। इसकी तस्करी करते हुए पकड़े जाने पर 11 साल की जेल का प्रावधान है। तस्करी में आए दिन क़त्ल और हिंसा (8/9)
होते रहते हैं। यही कारण है की लाल चंदन को रक्त चंदन कहा जाने लगा।
#साभार
(9/9)
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