सनातन संवाद
सनातन संवाद

@banna88888

6 Tweets 78 reads Feb 13, 2022
युग युग सूं अखियां तरस रही ।
पग पग पर अखियां रोई रही ।।
मायण थारो पूत कठे,
वो सोलंकी रो सरदार कठे,
वो राणा पूंजा कठे
भील समाज के लोग इन्हें अपना राजा मानते थे इसलिए भीलों के सरदार के नाम से मशहूर हुए थे जबकि इनके वंशज आज भी पानरवा में मौजूद है (1)
मेवाड़ में इनके ठिकाने हैं मेवाड़ के प्रसिद्ध इतिहासकार लेखक देवी लाल पालीवाल के अनुसार राणा पूंजा भील नही सोलंकी राजपूत थे उनके अनुसार राणा उदय सिंह द्वितीय का एक विवाह पानरवा मे हुआ था ।
जननी जने तो चार जनजे,मत जनजे चालीस ।चारों रण में झुजसी,वे चार ही चालीस।।(2)
राणा पुंजा जी सोलंकी कि समपुर्ण #पानरवा के सोलंकी_राजवंश की वंशावली
पानरवा का राजचिन्ह नीचे दीया गया है(फ़ोटो में)
अक्षयराज सिंह सोलंकी(पानरवा के संस्थापक)
राजसिंह सोलंकी
महिपाल सोलंकी
हरपाल सिंह सोलंकी(मेवाड़ के महाराणा उदय सिंह जी ने राणा की उपाधि दी)
राणा डेड़ासिंह सोलंकी(3)
राणा पुंजा सिंह जी सोलंकी
राणा राम सिंह सोलंकी
राणा चंद्रभान सिंह सोलंकी
राणा सूरजमल सिंह सोलंकी (1771-1774 का शासन)
राणा भगवान सिंह सोलंकी
राणा जोध सिंह सोलंकी
राणा रघुनाथ सिंह सोलंकी
राणा नाथू सिंह सोलंकी
राणा कीर्ति सिंह सोलंकी
राणा केशरी सिंह सोलंकी(4)
राणा उदय सिंह सोलंकी
राणा प्रताप सिंह सोलंकी
राणा भवानी सिंह सोलंकी
राणा अर्जुन सिंह सोलंकी (1881-1923 का शासन)
राणा मोहब्बत सिंह सोलंकी(1923 से 1949 तक एकीकरण में शासन)
राणा मनोहर सिंह जी सोलंकी
वर्तमान में मोजूद है...(5)
पुरी वंशावली और वर्तमान राणा मनोहर सिंह जी सोलंकी साक्षी होने के बाद भी राणा पुंजाजी को सोलंकी राजपूत होने पर कोई शक करना उन वीर का अपमान होगा ।कृपया राणा पुंजाजी को भील लिखकर अपने हिन विचार पेस ना करे ।🙏

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