मेवाड़ में इनके ठिकाने हैं मेवाड़ के प्रसिद्ध इतिहासकार लेखक देवी लाल पालीवाल के अनुसार राणा पूंजा भील नही सोलंकी राजपूत थे उनके अनुसार राणा उदय सिंह द्वितीय का एक विवाह पानरवा मे हुआ था ।
जननी जने तो चार जनजे,मत जनजे चालीस ।चारों रण में झुजसी,वे चार ही चालीस।।(2)
जननी जने तो चार जनजे,मत जनजे चालीस ।चारों रण में झुजसी,वे चार ही चालीस।।(2)
राणा पुंजा सिंह जी सोलंकी
राणा राम सिंह सोलंकी
राणा चंद्रभान सिंह सोलंकी
राणा सूरजमल सिंह सोलंकी (1771-1774 का शासन)
राणा भगवान सिंह सोलंकी
राणा जोध सिंह सोलंकी
राणा रघुनाथ सिंह सोलंकी
राणा नाथू सिंह सोलंकी
राणा कीर्ति सिंह सोलंकी
राणा केशरी सिंह सोलंकी(4)
राणा राम सिंह सोलंकी
राणा चंद्रभान सिंह सोलंकी
राणा सूरजमल सिंह सोलंकी (1771-1774 का शासन)
राणा भगवान सिंह सोलंकी
राणा जोध सिंह सोलंकी
राणा रघुनाथ सिंह सोलंकी
राणा नाथू सिंह सोलंकी
राणा कीर्ति सिंह सोलंकी
राणा केशरी सिंह सोलंकी(4)
राणा उदय सिंह सोलंकी
राणा प्रताप सिंह सोलंकी
राणा भवानी सिंह सोलंकी
राणा अर्जुन सिंह सोलंकी (1881-1923 का शासन)
राणा मोहब्बत सिंह सोलंकी(1923 से 1949 तक एकीकरण में शासन)
राणा मनोहर सिंह जी सोलंकी
वर्तमान में मोजूद है...(5)
राणा प्रताप सिंह सोलंकी
राणा भवानी सिंह सोलंकी
राणा अर्जुन सिंह सोलंकी (1881-1923 का शासन)
राणा मोहब्बत सिंह सोलंकी(1923 से 1949 तक एकीकरण में शासन)
राणा मनोहर सिंह जी सोलंकी
वर्तमान में मोजूद है...(5)
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