Rakesh Hindu {टीम JSK} 🙏🙏
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@modified_hindu

12 Tweets 15 reads Feb 13, 2022
मिस्र, एक ऐसा देश जो कभी बुतपरस्तों का देश था। जिसका विशाल साम्राज्य था और अथाह संपदा थी। अलेक्जेंडर के सपनों का शहर अलेक्जेंड्रिया यहीं स्थापित हुआ। और विश्व की सबसे धनी लाइब्रेरी अलेक्जेंड्रिया यहीं बनीं।
परंतु लगभग 700 वर्ष बाद वह एक ऐसा देश बना जहाँ की ज्ञान संपदा (1/12)
अर्थात् अलेक्जेंड्रिया की लाइब्रेरी की पुस्तकों को 300 साल तक जलाया गया। और मिस्र के क्षेत्र में 100 वर्ष तक जजिया वसूला गया।
अर्थात् एक ऐसा देश जिसके प्राचीन ज्ञान और फेरोह से लेकर अलेक्जेंडर तक के वैभव काल को कुचल डाला गया। और जजिया के नाम पर खूब लूट हुई।
इसी 700 वर्ष (2/12)
बाद के कालखंड में एक देश और भी था, स्पेन। जिस पर शमशीर से फतह प्राप्त की गई और लगभग 500 वर्षों तक जजिया वसूलने का शासन रहा। यहाँ तक कि वहाँ की मुद्रा भी स्पेनी रियाल कही जाती थी।
लेकिन बाद में 1200-1300 की सदी में स्पेन धूल झाड़कर खड़ा हो गया और अगले ही 500 वर्षों में (3/12)
उसने आधी दुनिया को जीत लिया। और स्पैशिन साम्राज्य के फिलिप सेकेंड के लिए ही यह कहा गया था, "सन नेवर सेट्स।"
अमेरिका से लेकर फिलीपींस तक स्पैनिश झंडा लहरा चुका था। और इनके ही चलते यूरोप के फ्रांस, हालैंड और इंग्लैंड को नई दुनिया जीतने की होड़ चली।
अब फिर से आते हैं मिस्र (4/12)
की ओर, 100 वर्षों तक जजिया देकर मिस्र मानसिक रूप से कमजोर हो उठा की स्पेन की हार के बाद जब जजिया में ढील दी गई है। तो मिस्र वाले प्रसन्नता से इस्लाम कबूल कर लिए कि जजिया नहीं देना पड़ेगा।
और जहाँ एक ओर स्पेन दुनिया जीत रहा था। वहीं मिस्र बंदरगाहों से कमाकर इस्लाम को (5/12)
समृद्ध कर रहा था। बाद में नई सदी में जब संसार नई करवट ले रहा था और अमेरिका जैसा देश अस्तिव में आ चुका था।
वह दौर जो तुर्की जैसे उस्मानिया के टूटने और कमाल पाशा के उदय का था। उसी दौर में मिस्र में मोहम्मद कुतुब, हसन अली बन्ना और मौलाना मौदूदी का बनाया एक मुस्लिम ब्रदरहुड (6/12)
जन्म ले चुका था। जिसकी विचारधारा आज तक डस रही है।
मिस्र जो वर्षों तक इस्लामिक विनाश का केंद्र रहा। जिसकी समस्त, सभ्यता और ज्ञान को इस्लाम ने लूटा। वही मिस्र इस्लाम की इसी कट्टरपंथी विचारधारा को पसंद कर चुका था।
बहुधा मनोवैज्ञानिक स्टॉकहोम सिंड्रोम का नाम लेते हैं। लेकिन (7/12)
ध्यान से अध्ययन किया जाए तो मिस्र का सिंड्रोम तो स्टॉकहोम सिंड्रोम से अधिक भयानक रहा।
और ऐसा नहीं था कि मिस्र से सुधारवादी प्रयास नहीं हुए। अनवर सादात मिस्र के राजनेता थे जिन्होंने पहली बार इजरायल से बात शुरू की थी। और इजरायल विवाद को समाप्त करना चाहा। लेकिन मिस्र में (8/12)
उनकी ही हत्या कर दी गई।
यह मानसिकता का ही अंतर है कि मिस्र अपने विनाशकों को ही अपना मान बैठा वहीं स्पेन भी था जिसने प्रतिकार किया संसार पर अपनी मौजूदगी जताई। चूँकि हम ब्रिटिश कॉलोनी हैं इसीलिए हमें अंग्रेजी मिल गई। लेकिन स्पैनिश भाषा कम प्रचलित नहीं है।
हमारे देश में (9/12)
स्पेन और मिस्र की मानसिकता का एक परोक्ष युद्ध जारी है। एक ओर इस्लामिक जॉम्बी हैं जो “हिजाब या किताब” में से हिजाब चुन रहे हैं और स्टॉकहोम सिंड्रोम के ग्रसित इसे प्रतिरोध बताकर समर्थन कर रहे हैं।
वहीं स्कूल के वह भगवाधारी बच्चे भी हैं। जो इस्लामी आतंक का प्रतिरोध कर रहे (10/12)
हैं। तो अब आप पर है कि क्या बनना चाहते हैं। यदि हिजाब के इस्लामिक जिहाद को समझना नहीं चाह रहे हैं, तो मिस्र सिंड्रोम से ग्रसित ही हैं।
वैसे बिना हिजाब वाली यूनीवर्सिटियों और स्कूलों ने ही दुनिया बदली है। शेष हिजाब वाले मदरसे में कोई जाना चाहे तो (11/12)
अफगानिस्तान, पाकिस्तान आदि हैं हीं।
t.me
#साभार
(12/12)

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