Vशुद्धि
Vशुद्धि

@V_Shuddhi

7 Tweets 37 reads Mar 12, 2022
विधि का विधान !!
श्री राम का विवाह और राज्याभिषेक, दोनों शुभ मुहूर्त देख कर किए गए थे; फिर भी न ही राज्याभिषेक सफल हो सका और विवाह उपरांत माता सीता और प्रभु राम दोनो को ही जीवन में अनगिनत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा ।
गोस्वामी तुलसीदास ने एक दोहे के द्वारा इस प्रकरण की व्याख्या रामायण में की है जो इस प्रकार है
"सुनहु भरत भावी प्रबल,बिलखि कहेहूं मुनिनाथ ।
हानि लाभ, जीवन मरण, यश अपयश विधि हाथ ।।”
प्रभु राम के वनवास के बाद जब भरत जी अपने ननिहाल से लौटकर अयोध्या आए तो वहां कि दशा को देख कर बहुत
विचलित हुए। उन्होंने महर्षि वशिष्ठ से पूछा प्रभु आप तो संसार के सबसे श्रेष्ठ मुनि व महाज्ञानी हैं। आपने भैया राम के राजतिलक का ऐसा मुहूर्त कैसे निकाल दिया कि महाराज दशरथ की मृत्यु हुई, राम वनवास गए और पूरी अयोध्या चौपट हो गई। यह प्रश्न सुन कर वशिष्ठ मुनि ने
इस उपरोक्त दोहे का उदहारण भरत को दिया था।
अर्थात्- हे भरत! सुनो, होनी बड़ी बलवान है हानि-लाभ, जीवन-मरण और यश-अपयश, ये सब विधाता के हाथ हैं। जो विधि ने निर्धारित किया है, वह होकर ही रहेगा!
न प्रभु राम के जीवन को बदला जा सका, न भगवान कृष्ण के! और न ही महादेव शिव
जी सती की मृत्यु को टाल सके, जबकि महामृत्युंजय मंत्र उन्हीं का आवाहन करता है!
न गुरु अर्जुन देव जी और न ही गुरु तेग बहादुर साहब जी और दश्मेश पिता गुरु गोबिन्द सिंह जी, अपने साथ होने वाले विधि के विधान को टाल सके, जबकि आप सभी समर्थ थे!
रामकृष्ण परमहंस भी अपने कैंसर को न टाल सके
न रावण अपने जीवन को बदल पाया, न ही कंस, जबकि दोनों के पास समस्त शक्तियाँ थी!
इसलिए भगवान श्री कृष्ण कहते है- करता तू वह है, जो तू चाहता है... परन्तु होता वह है, जो में चाहता हूँ.. कर तू वह, जो मैं चाहता हूँ... फिर होगा वो, जो तू चाहेगा ।
मानव अपने जन्म के साथ ही जीवन, मरण, यश, अपयश, लाभ, हानि, स्वास्थ्य, बीमारी, देह, रंग, परिवार, समाज, देश- स्थान सब पहले से ही निर्धारित करके आता है!
इसलिए सरल रहें, सहज, मन, वचन और कर्म से सद्कर्म में लीन रहें ।
जय जय श्री राम 🙏🏻🏹🚩

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