अनुराधा ( गार्गी )
अनुराधा ( गार्गी )

@chhotiradha

13 Tweets 2 reads Apr 25, 2022
@Sabhapa30724463 @SudhaRaje @Naarayan999 @PNRai1 @ajayamar7 @aryavratvijayat @Govindmisr @NandiniDurgesh5 @Prerak_Agrawal1 @Rajeshverma0000 @ShashibalaRai12 @SathyavathiGuj1 @SimpleDimple05 १४ वर्ष का वनवास ही क्यूं इसके पीछे अनेक कारण थे जैसे
#देवलोक में बनी योजना _ राक्षसों के आत्याचर ऋषियों स्त्रियों के प्रति उनके अनाचार के कारण देवलोक में सभी देवता परेशान थे यहां तक कि मेघनाथ तो स्वर्ग से
इन्द्र को ही बंदी बनाकर लंका ले आया था
रावण ने भी देवों को ऋषियों
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प्रभु के पृथ्वी पर अवतार के पीछे भृगु ऋषि का श्राप भी था।और पत्नी वियोग भी उसी श्राप का एक कारण था।
क्यूंकि विधि के विधान भी कारण के अनुसार ही होते हैं या यूं कहे कि कारण भी विधि के विधान के अनुसार ही
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अब १४ वर्ष के लिए ही क्यूं तो कैकई ने वही कहा जो देवगण और स्वयं प्रभु चाहते थे।उनकी जिव्ह्या से माता सरस्वती ने वही निकलवाया
क्यूंकि एक तो इंद्रजीत को केवल वही मर सकता था जो १४ वर्षों तक निद्रा भूख प्यास पर विजय प्राप्त कर सके।वैरागी हो
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शास्त्रों का विधान है कि १४ वर्ष तक वनों में तप करने के बाद ही कोई मनुष्य का तपोबल पूर्ण होता है बिना तपोबल के कोई नर रूप में रावण मेघनाथ जैसे महान बलशाली ब्रह्माजी शिवजी से वरदान प्राप्त वीर का अंत कर ही नहीं सकता था जब तक वह अपने संयमित
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हमारे शरीर में १४ नाड़ियां है इंगला, पिंगला, सुषुम्ना, गांधारी, हस्तजिह्वा, कुहू, सरस्वती, पूषा, शंखिनी, पयस्विनी, वारुणी, अलम्बुषा, विश्वोदरी और यशस्विनी,
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शरीर में स्थित चौदहों भुवन तक ये चौदह नाड़ियाँ विस्तारित हैं. इनका क्रम निम्न प्रकार है- ॐ भू भुव, स्व, मह, तप एवं सत्य लोक. ये ऊपर के लोक हैं. इसके नीचे अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल एवं पाताल हैं।
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दुष्चक्र समाप्त हो मानव सभी कार्य
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श्रीराम लक्ष्मण ने वनों में संयमित जीवन जीते हुए
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इसीलिए कहा जाता है जो १४ वर्ष के लिए तपस्वी का जीवन जी लेता है उसका समस्त मोह का नाश हो जाता है
मानसिक रूप से उसी प्रकार का जीवन जीने लगता है का यही अर्थ है कि इसके जीवन में
सभी इन्द्रियों पर उसका नियंत्रण होता है।
और राम लक्ष्मण जैसे वीर संयमी
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बाबूजी मुझे तो यही लगता है कि विधि अनुसार तय कारण के लिए माध्यम कैकई बनी और राक्षसों का वध करते हुए ऋषि मुनियों से आशीष लेते हुए श्रीराम लक्ष्मण ने तप बल एकत्र किया जिससे उस समय के बलशाली रावण मेघनाथ का
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बाकी गूगल तर्क समझ नहीं आ रहे।
शनि रावण का क्या बिगाड़ पाते जिसे रावण ने बंदी बना रखा था
आपके उत्तर की प्रतीक्षा
प्रणाम बाबूजी
जय श्री राम 🙏🙏🌿🌹🌿🌹

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