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#द्वारिकाधीश_मन्दिर
#Rajput_Architecture 🚩🚩
मैंने सम्पूर्ण भारत में हजारों मंदिर देखे, वो चाहे वृक्ष के सानिध्य में छोटा सा मंदिर हो या अति विशाल मंदिर परिसर। मैंने अब तक जितने भी प्राचीन मंदिर देखे, उन में द्वारकाधीश मंदिर सबसे जीवंत मंदिर है।
#द्वारिकाधीश_मन्दिर
#Rajput_Architecture 🚩🚩
मैंने सम्पूर्ण भारत में हजारों मंदिर देखे, वो चाहे वृक्ष के सानिध्य में छोटा सा मंदिर हो या अति विशाल मंदिर परिसर। मैंने अब तक जितने भी प्राचीन मंदिर देखे, उन में द्वारकाधीश मंदिर सबसे जीवंत मंदिर है।
यह उन गिने चुने प्राचीन संरचनाओं में से एक है जो अब भी ठीक वैसा ही खड़ा है जैसा कि कुछ सदियों पहले रहा होगा। मंदिर परिसर पहुँचते ही यह विदित होता है कि सारे दैनिक संस्कारों का पालन घड़ी के काँटों सी सूक्ष्मता सा किया जाता है।
प्रातःकाल, जब देव जागते हैं, से लेकर जब तक देव सो नहीं जाते, यह मंदिर भक्ति एवं अन्य धार्मिंक कार्यकलापों से निरंतर गूंजता रहता है।
चारों ओर उत्सव का वातावरण रहता है। द्वारकाधीश मंदिर तथा सम्पूर्ण द्वारका श्रृंगार रस से ओतप्रोत प्रतीत होते हैं।
चारों ओर उत्सव का वातावरण रहता है। द्वारकाधीश मंदिर तथा सम्पूर्ण द्वारका श्रृंगार रस से ओतप्रोत प्रतीत होते हैं।
भव्य द्वारकाधीश मंदिर 7 मीटर (या 250 फीट) ऊँचा है जो आज कल की 25 माले की इमारत के समकक्ष है । इस विशाल व ऊंचे मंदिर के ऊपर एक 25 फिट का ध्वजदंड भी है
गर्भ गृह के ऊपर, नागर पद्धति में बना ऊंचा शिखर किसी पर्वत की चोटी सा प्रतीत होता है। शिखर पर 7 परतें स्पष्ट दिखाई पड़ती हैं।
गर्भ गृह के ऊपर, नागर पद्धति में बना ऊंचा शिखर किसी पर्वत की चोटी सा प्रतीत होता है। शिखर पर 7 परतें स्पष्ट दिखाई पड़ती हैं।
ये 7 परतें, भारत में 7 प्राचीन नगरियों अर्थात् सप्तपुरी को दर्शाती है जिनमें से एक द्वारका है। प्राचीन सप्तपुरी ऐसी हैं -अयोध्या, मथुरा, माया, काशी, अवंतिका, कांचीपुरम व द्वारका। शिखर की परतें इन नगरियों का प्रतीक है जहां सबसे निचली परत अयोध्या से सम्बंधित है।
शिखर की इन परतों को एक साथ देखने के लिए सम्पूर्ण भारत के एक ही मंदिर में दर्शन के सामान था।
मंदिर के मंडप पर परतदार शिखर है। ठीक वैसा ही जैसे हम गुजरात के जैन मंदिरों सहित कई मंदिरों में देखते आये हैं। मंदिर 72 स्तंभों पर टिका हुआ है जिन्हें एक ही पत्थर को
मंदिर के मंडप पर परतदार शिखर है। ठीक वैसा ही जैसे हम गुजरात के जैन मंदिरों सहित कई मंदिरों में देखते आये हैं। मंदिर 72 स्तंभों पर टिका हुआ है जिन्हें एक ही पत्थर को
काटकर, उन पर नक्काशी कर बनाया गया है। मंडप के चार मंजिल चार-धाम अर्थात् भारत के 4 कोनों में स्थित 4 सबसे महत्वपूर्ण वैष्णव मंदिरों के प्रतीक हैं। चार धामों में से एक, द्वारका भारत के पश्चिमी कोने में स्थित है। अन्य 3 धाम हैं
दक्षिण में रामेश्वरम, पूर्व में जगन्नाथ पुरी तथा उत्तर में बद्रीनाथ।
चौथी मंजिल पर छलती माता को समर्पित एक मंदिर है और पांचवीं मंजिल पर लाडवा मंदिर है। आम जनता को वहां जाने की अनुमति नहीं है। उनके विभिन्न धार्मिक कार्यकलाप निचली मंजिल तक ही सीमित रखे गए हैं।
चौथी मंजिल पर छलती माता को समर्पित एक मंदिर है और पांचवीं मंजिल पर लाडवा मंदिर है। आम जनता को वहां जाने की अनुमति नहीं है। उनके विभिन्न धार्मिक कार्यकलाप निचली मंजिल तक ही सीमित रखे गए हैं।
यदि आप द्वारकाधीश मंदिर के पुजारी से पूछेंगे, वे आपको बताएँगे कि यह 5244 वर्ष प्राचीन मंदिर है। इसे श्री कृष्ण के पड़पोते वज्रनाभ ने बनवाया था। यह वही स्थल है जहां किसी समय हरीगृह या हरी अथवा कृष्ण का गृह था, अतः अत्यंत पवित्र है।
मूल मंदिर एवं मंदिर संरचना जो वर्तमान में
मूल मंदिर एवं मंदिर संरचना जो वर्तमान में
दिखाई पड़ती है, दोनों भिन्न हैं। जैसा कि संचालको ने मुझे समझाया – मंदिर संरचना देह के समान होती है एवं मूर्ति मंदिर की आत्मा। देह बदलता रहता है किन्तु आत्मा वहीं रहती है।
मंदिर की वर्तमान संरचना 7 वीं. से 17 वी. सदी के बीच बने विभिन्न भागों का मिश्रण है।
मंदिर की वर्तमान संरचना 7 वीं. से 17 वी. सदी के बीच बने विभिन्न भागों का मिश्रण है।
इसका संरक्षण कार्य अब भी जारी है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा अम्बाजी मंदिर के पुनरुद्धार का कार्य जोरों पर था।
● वर्तमान में स्थित मंदिर का वास्तुशिल्प सामान्यतः सोलंकी राजपूत शैली में है जो लंबे काल तक गुजरात में
● वर्तमान में स्थित मंदिर का वास्तुशिल्प सामान्यतः सोलंकी राजपूत शैली में है जो लंबे काल तक गुजरात में
प्रचलित था। पुरातत्ववेत्ताओं के अनुसार, मुख्य मंदिर 8-10 वी. शताब्दी की देन हो सकती है जबकि सभा मंडप, जिसे लाडवा मंडप भी कहा जाता है, 15-16 वीं. शताब्दी में निर्मित हो सकती है। मंदिर परिसर के आसपास खुदाई में उजागर हुआ कि यह इस स्थान का चार वां मंदिर है।
सबसे प्राचीन मंदिर कम से कम 3000 वर्ष पुराना होगा। ये भी पड़ताल में पाया गया है, की समय समय पर प्राचीन मंदिर समुन्द्र में डूबते गए,बैसे बैसे नए द्वारिकाधीश मन्दिर का निर्माण होता गया है.......जय श्री कृष्णा
✍🏻✍🏻@TeamRajanyas
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