࿗ हिरण्या ࿗
࿗ हिरण्या ࿗

@Hiranyaa_

5 Tweets 8 reads May 25, 2022
किनका अपमान न करें ?
१. जो लोग किसी अंगसे हीन हों, जिनका कोई अंग अधिक हो, जो विद्या से हीन अवस्था के बूढ़े, रूप और धन से रहित तथा जाति से भी नीच हों।
अपमान करनेवाले मनुष्य का पुण्य,उसके पास चला जाता है और उसका पाप अपमान करनेवालेके पास चला आता है।
२. दीन, अन्धे, पंगु और बहरे मनुष्य का कभी उपहास नहीं करना चाहिये।
३. साँप, अग्नि, दुर्जन, राजा, दामाद, भानजा, रोग, शत्रु और ब्राह्मण.... यदि दुर्बल हों तो भी इनका अपमान नहीं करना चाहिये।
४. मनुष्य को चाहिये कि वह सर्प, अग्नि, सिंह और अपने कुल में
उत्पन्न व्यक्तिका अनादर न करे; क्योंकि ये सभी बड़े तेजस्वी
होते हैं।
५. जहाँ अपूज्य लोगों का आदर होता है और पूज्यजनों का निरादर होता है, वहाँ दुर्भिक्ष, मरण और भय- ये तीन उपद्रव होते हैं।
६. प्रत्येक युग के जो ब्राह्मण हैं, उनकी निन्दा नहीं करनी चाहिये; क्योंकि वे ब्राह्मण युगके अनुरूप हैं।
७. आचार्य, पिता, माता और बड़ा भाई-
इनका दुःखी होकर भी कभी अपमान न करे।
आचार्य परमात्मा की मूर्ति,
पिता ब्रह्मा की मूर्ति,
माता पृथ्वी की मूर्ति और
भाई अपनी ही मूर्ति है।

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