࿗ हिरण्या ࿗
࿗ हिरण्या ࿗

@Hiranyaa_

5 Tweets 14 reads May 24, 2022
गर्भपातका पाप
१. ब्रह्महत्या से जो पाप लगता है, उससे दुगुना पाप गर्भपात करने से लगता है।
इस गर्भपातरूपी महापाप का कोई प्रायश्चित्त भी नहीं है, इसमें तो उस स्त्रीका त्याग कर देने का ही विधान है।
२. गर्भपात करनेवाले का देखा हुआ अन्न नहीं खाना चाहिये। उसे खाने से पाप लगता है ।
३. जो स्त्री गर्भपात कराये, उससे कभी बातचीत नहीं करनी चाहिये ।
४. स्त्रियों में जो पति की हत्या करनेवाली, रजस्वला, परपुरुष से सम्बन्ध रखनेवाली, सूतिका, गर्भपात करनेवाली, कृतघ्न और क्रोधिनी हो, उसे कभी नमस्कार नहीं करना चाहिये ।
५. श्रेष्ठ पुरुषों ने ब्रह्महत्या आदि पापों का प्रायश्चित बताया है, पाखण्डी और परनिन्दक का भी उद्धार होता है किन्तु जो गर्भ के बालक की हत्या करता है, उसके उद्धार का कोई उपाय नहीं है।
६. भ्रूणहत्या करनेवाले रोध (श्वासोच्छ्वासको रोकनेवाला), शुनीमुख, रौरव आदि नरकों में जाते हैं।
७. गर्भ की हत्या करनेवाला कुम्भीपाक नरक में गिरता है।
फिर गीद्ध , सूअर, कौआ और सर्प होता है।
फिर विष्ठा का कीड़ा होता है।
फिर बैल होने के बाद कोढ़ी मनुष्य होता है।
८. गर्भपात करनेवाले की अगले जन्म में सन्तान नहीं होती।
९. पतिकी हत्या करनेवाली, शराब पीनेवाली, गर्भपात करनेवाली, कुलटा और आत्महत्या करनेवाली स्त्री के मरनेपर सूतक (मरणाशौच) नहीं लगता। ऐसी स्त्री के शव का स्पर्श, दाहसंस्कार, श्राद्ध-तर्पण आदि करनेवाले को भी पाप लगता है।

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