कहाँ निवास न करें ? १. जहाँ राजा, धनी, वेदज्ञ ब्राह्मण, वैद्य, आचार और देश-
ये अपने से विरुद्ध प्रतीत हों,
वहाँ एक दिन भी नहीं रहना चाहिये।
२. जहाँ नपुंसक, स्त्री, बालक, अत्यन्त क्रोधी, मूर्ख या साहसी (बिना विचारे सहसा कार्य करनेवाला) – इनमें से कोई भी व्यक्ति अधिकारी - वर्ग का हो, वहाँ एक दिन भी निवास नहीं करना चाहिये।
३. जहाँ राजा अविवेकी हो, सभासद्गण पक्षपात रखनेवाले हों, विद्वान् लोग सदाचार से हीन हों, साक्षीगण झूठ बोलने वाले हों और जहाँ दुष्टों, स्त्रियों तथा नीच जनों की प्रबलता हो, वहाँ रहते हुए अपने धन, इज्जत, वास स्थान और जीवन की इच्छा न रखे।
४. गृहस्थ पुरुष को टूटे-फूटे या सूने घर में, श्मशान में, मनुष्यों से रहित स्थान में और वन में निवास नहीं करना चाहिये। ५. जहाँ धनवान्, वेदज्ञ ब्राह्मण, राजा, नदी और वैद्य-ये पाँच
न हों, वहाँ एक दिन भी नहीं रहना चाहिये।
६. जिस देश में न तो सम्मान हो,
न जीविका हो, न बन्धुजन हों
और न विद्या की प्राप्ति हो,
उस देश का त्याग कर देना चाहिये