मित्रों, एक पुरानी कहावत "हाथी के दांत, खाने के और, दिखाने के और.." आज पुनर्परिभाषित किए जाने की जरूरत है।
दिखाने के दांत हों या न हों, खाने के दांत बिना हाथी कैसे जिंदा रहेगा? खाना तो उसे चाहिए। लगातार चाहिए, रोज चाहिए।
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दिखाने के दांत हों या न हों, खाने के दांत बिना हाथी कैसे जिंदा रहेगा? खाना तो उसे चाहिए। लगातार चाहिए, रोज चाहिए।
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खासकर, जब हाथी को पाल पोस कर इतना विशाल बना दिया गया हो, उसे भोजन लगातार चाहिए।
प्रतीकात्मक तौर से वह विशालकाय हाथी है बीजेपी और आरएसएस का भक्त संप्रदाय। उस समुदाय को दशकों से नफरत के धीमे जहर का फीडिंग कर के बहुत विशाल बना दिया गया है।
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प्रतीकात्मक तौर से वह विशालकाय हाथी है बीजेपी और आरएसएस का भक्त संप्रदाय। उस समुदाय को दशकों से नफरत के धीमे जहर का फीडिंग कर के बहुत विशाल बना दिया गया है।
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इतना विशाल बना दिया गया है, कि अब "दिखाने के दांत" याने मोदीजी और भागवतजी चाहे कितने ही बार गांधीजी की प्रतिमा पर नमन करते रहें, कितने ही बार यह बयान दें कि "हर मस्जिद के नीचे शिवलिंग क्यों ढूंढें?", मगर हाथी के शरीर पर इन बयानों का कोई फर्क नहीं पड़ता!
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उसे अपना मानसिक भोजन चाहिए, नफरती जहर की फीडिंग चाहिए!
आप दिखाने के दांत चाहे जितने कोलगेट से चमका कर साफ सुथरे दिखाने की कोशिश करें, उस भक्त समुदाय को कमल के नीचे के कीचड़ में लोटने की आदत पड़ चुकी है!
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आप दिखाने के दांत चाहे जितने कोलगेट से चमका कर साफ सुथरे दिखाने की कोशिश करें, उस भक्त समुदाय को कमल के नीचे के कीचड़ में लोटने की आदत पड़ चुकी है!
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यदि नफरत के डोज़ आपकी तरफ से आने बंद हो जाएंगे, तो यकीन मानिए, जिस भस्मासुर को आपने पैदा किया है, वह आपके ही सिर पर हाथ रख कर भस्म कर देगा एक दिन!
भाजपा से कहीं अधिक खतरनाक भाजपा का भक्त है.
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भाजपा से कहीं अधिक खतरनाक भाजपा का भक्त है.
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वे अल्पसंख्यकों, राजनीतिक दलों और उन सभी लोगों के खिलाफ, जिनसे वह सहमत नहीं है, अपनी घृणा, असुरक्षा और पूर्वाग्रहों को दिशा देने के लिए बीजेपी का इस्तेमाल करता है.
बीजेपी में उसे एक ऐसी आवाज मिली है, जिसे वह पिछले 500 सालों से खोज रहा था.
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बीजेपी में उसे एक ऐसी आवाज मिली है, जिसे वह पिछले 500 सालों से खोज रहा था.
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वह मुसलमानों से नफरत करता है, वह ईसाइयों से नफरत करता है, वह उदारवादियों और धर्मनिरपेक्ष लोगों से नफरत करता है, वह कांग्रेस से नफरत करता है, वह आप, सपा, बसपा, टीएमसी और हर दूसरी पार्टी के नेता से नफरत करता है.
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वह अच्छा भला शिक्षित व्यक्ति है, लेकिन जिन लोगों को वह नापसंद करता है, उनके बारे में फेक न्यूज़ साझा करते समय वह अपने दिमाग का कतई इस्तेमाल नहीं करता.
उसे इस बात की परवाह नहीं है कि उसके द्वारा साझा किया जा रहा समाचार फर्जी है, वह फिर भी इसे साझा करना चाहता है.
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उसे इस बात की परवाह नहीं है कि उसके द्वारा साझा किया जा रहा समाचार फर्जी है, वह फिर भी इसे साझा करना चाहता है.
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वह जितनी अधिक फेक न्यूज शेयर करता है, उसे रात को उतनी ही अच्छी नींद आती है.
वर्ष 2014 में, उसका मानना था कि हिंदू खतरे में हैं इसलिए उसने मोदी को वोट दिया. आठ साल, 22 राज्यों और 300+ सीटों के बाद, वह अभी भी मानता है कि हिंदू खतरे में है.
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वर्ष 2014 में, उसका मानना था कि हिंदू खतरे में हैं इसलिए उसने मोदी को वोट दिया. आठ साल, 22 राज्यों और 300+ सीटों के बाद, वह अभी भी मानता है कि हिंदू खतरे में है.
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यदि उससे पूछा जाये कि आखिर उसे किस बात का डर है, तो वह तो वह विषय को बदल देगा.
वह अंधभक्त समुदाय कुतर्कदोष का मास्टर है. यदि बीजेपी अपने मूल्यों और सिद्धांतों के खिलाफ कुछ कार्य करती है, तो वह उसके बचाव में कुतर्कदोषों की एक पूरी सूची के साथ मौजूद रहता है.
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वह अंधभक्त समुदाय कुतर्कदोष का मास्टर है. यदि बीजेपी अपने मूल्यों और सिद्धांतों के खिलाफ कुछ कार्य करती है, तो वह उसके बचाव में कुतर्कदोषों की एक पूरी सूची के साथ मौजूद रहता है.
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इस कुतर्कदोष को अंग्रेजी में Whataboutery कहते हैं।
उसे राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत बहुत पसंद है लेकिन उससे गाने को कहा जाये तो वह इसे नहीं गा सकता. वह चाहता है कि मुसलमान ‘वंदे मातरम’ बोलें, लेकिन वह स्वयं इसके एक भी शब्द का अर्थ नहीं जानता.
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उसे राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत बहुत पसंद है लेकिन उससे गाने को कहा जाये तो वह इसे नहीं गा सकता. वह चाहता है कि मुसलमान ‘वंदे मातरम’ बोलें, लेकिन वह स्वयं इसके एक भी शब्द का अर्थ नहीं जानता.
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वह एक ऐसा हिंदू है, जिसने उपनिषदों को नहीं पढ़ा है. हिंदू धर्म की उनकी समझ व्हाट्सएप संदेशों तक सीमित है.
भाजपा भक्त दिल से अनुयायी होता है. वह औद्योगिक युग का व्यक्ति है. वह इंटरनेट का उपयोग करता है, लेकिन इंटरनेट अर्थव्यवस्था के आधारों से सहमत नहीं है.
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भाजपा भक्त दिल से अनुयायी होता है. वह औद्योगिक युग का व्यक्ति है. वह इंटरनेट का उपयोग करता है, लेकिन इंटरनेट अर्थव्यवस्था के आधारों से सहमत नहीं है.
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उसे अनुशासन, आदेश और अनुपालन पसंद है. वह नेतृत्व करना चाहता है.
उसे अपने राजनीतिक नायकों के बारे में प्रश्न सुनना पसंद नहीं है लेकिन जिनसे वह नफरत करता है, उनसे हर समय कटघरे में खड़ा रखना चाहता है. उसे वाद-विवाद करना पसंद नहीं है.
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उसे अपने राजनीतिक नायकों के बारे में प्रश्न सुनना पसंद नहीं है लेकिन जिनसे वह नफरत करता है, उनसे हर समय कटघरे में खड़ा रखना चाहता है. उसे वाद-विवाद करना पसंद नहीं है.
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वह जानता है कि उसके नायक गलत हैं लेकिन वह उनकी गलतियों को सही ठहराता रहता है.
जब वाद-विवाद में उसका पलड़ा हल्का पड़ने लगता है तो वह अपशब्दों का इस्तेमाल करने लगता है.
वह व्यक्तिगत हो जाता है. वह आपकी माँ बहनों से सीधा शाब्दिक संबंध कायम करने लगता है.
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जब वाद-विवाद में उसका पलड़ा हल्का पड़ने लगता है तो वह अपशब्दों का इस्तेमाल करने लगता है.
वह व्यक्तिगत हो जाता है. वह आपकी माँ बहनों से सीधा शाब्दिक संबंध कायम करने लगता है.
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वह कट्टरपंथी हिंदुओं द्वारा धर्म के नाम पर किए गए अपराधों के खिलाफ कुछ नहीं बोलना चाहता है. वह भाजपा से ज्यादा सांप्रदायिक है.
वह भाजपा द्वारा तैयार किया गया एक दैत्य है.
उसे संवैधानिक मूल्यों की कोई परवाह नहीं है.
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वह भाजपा द्वारा तैयार किया गया एक दैत्य है.
उसे संवैधानिक मूल्यों की कोई परवाह नहीं है.
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यकीन मानिए, मोदी जी द्वारा विश्व साइकिल दिवस पर ट्वीट की गई महात्मा गांधी की साइकिल चलाती हुई तस्वीर या मोहन भागवत जी का बयान कि "हर मस्जिद में मंदिर खोजने की जरूरत नहीं है" का घंटा फर्क नहीं पड़ा इस भस्मासुर पर!
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बल्कि मन ही मन में इस भीड़ ने आपसे अधिक उग्र, अधिक नफरती, अधिक रक्तपिपासु, अधिक दंगाप्रेमी नेता को ढूँढना शुरू कर दिया है, जो इस भीड़ को नफरत के जहर का ज़्यादह पावरफुल डोज़ दे सके!
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जिस भस्मासुर को आपने पैदा किया है, वह आपके ही सिर पर हाथ रख कर भस्म कर देगा एक दिन!
अभी उस भस्मासुर को रेगुलर जहर माँगता!! होनाईच होना!
खैर, अपने पैदा किए खेल का दि एंड देखना हो तो जुरासिक पार्क फिल्म देख लेना। अंत कुछ वैसा ही होगा।
😒😒😒
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अभी उस भस्मासुर को रेगुलर जहर माँगता!! होनाईच होना!
खैर, अपने पैदा किए खेल का दि एंड देखना हो तो जुरासिक पार्क फिल्म देख लेना। अंत कुछ वैसा ही होगा।
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