आओ वेदो को जाने - Let's know the Vedas
आओ वेदो को जाने - Let's know the Vedas

@vedvyas92

9 Tweets 1 reads Jul 12, 2022
स्वास्तिक चिह्र (ओम् का प्राचीनतम रुप)
भारत की धार्मिक परम्परा में स्वस्तिक चिह्र का अड़क्न अत्यन्त प्राचीनकाल से चला आ रहा है । भारत के प्राचीन सिक्कों, मोहरों, बर्तनों, और भवनों पर यह चिह्र बहुशः और बहुधा पाया जाता है । भारत के प्राचीनतम ऐतिहासिक स्थल मोहनजोदडो, हडप्पा और
1/9
2/9
लोथल की खुदाइयों में वामावर्त स्वस्तिक चिह्र से युक्त मोहरें मिली हैं,
इनसे अतिरिक्त भारत की प्राचीन कार्षापण मुद्राएं, ढली हुई ताम्र मुद्रा, अयोध्या, अर्जुनायनगण, एरण, काड, कुणिन्दगण, कौशाम्बी, तक्षशिला, मथुरा, उज्जयिनी, अहिच्छत्रा तथा अगरोहा की मुद्रा, प्राचीनमूर्ति
#OM
3/9
, बर्तन, मणके, पूजापात्र (यज्ञकुण्ड), चम्मच, आभूषण और शस्त्रास्त्र पर भी स्वस्तिक चिह्र बने हुये पाये गये हैं । मौर्य एवं शुंगकालीन प्राचीन ऐतिहासिक सामग्री पर स्वस्तिक चिह्र बहुलता से देखे गये हैं । जापान से प्राप्त एक बुद्धमूर्ति के वक्षः स्थल पर स्वस्तिक चिह्र चित्रित है ।
4/9
भारत से बाहर से भी चीन, जापान, कोरिया, तिब्बत बेबिलोनिया, आस्टिया, चाल्डिया, पर्सिया, फिनीसिया, आर्मीनिया, लिकोनिया, यूनान, मिश्र, साइप्रस, इटली, आयरलैण्ड, जर्मनी, बेल्जियम, अमेरिका, ब्राजील, मैक्सिको, अफ्रीका, वेनेजुएला, असीरिया, मैसोपोटामिया, रूस स्विटजरलैण्ड, फ्रांस, पेरू
5/9
कोलम्बिया, आदि देशों के प्राचीन अवशेषों पर स्वस्तिक चिह्र अनेक रूपों में बना मिला है।
अब विचारणीय प्रश्न यह है कि इतने विस्तृत भूभाग में और बहुत अघिक मा़त्रा में पाये जाने वाले इस स्वस्तिक चिह्र का वास्तविक स्वरूप क्या है
#swastika #OM #AUM
6/9
यह स्वस्तिक चिह्र भारत की ज्ञात और प्राचीन लिपि ब्राह्री लिपि में लिखे दो ‘ओम्’ पदों का समूह है, जिसे कलात्मक ढगं से लिखा गया है । इस चिह्र का वैशिष्टय यह है कि इसे चारों दिशाओं से ‘ओम्’ पढा जा सकता है । प्राचीन भारत की चौंसठ लिपियों में से एक ब्राह्री लिपि भी है।
#swastika
7/9
इस लिपि में ‘ओम्’ अथवा ‘ओं’ को लिखने का रूप इस प्रकार था-
8/9
हज़ारो वषों के कालान्तर में लिपि की अज्ञानतावश लेखकों ने इसे वामावर्त से दक्षिणावर्त में परिवर्तित कर दिया। इसे कलाकार के १५% स्वस्तिक चिह्र वामावर्ती ही मिलते हैं। दक्षिणावर्ती स्वस्तिक के उदाहरण कम ही उपलब्घ हुऐ हैं
भारतवर्ष में आजकल स्वस्तिक के प्रायः पाँच रूप प्रचलित हैं
9/9
तो हम ने यह जाना की स्वस्तिक कुछ और नहीं बल्कि ओम हैं, जो की प्राचीन ब्राह्री लिपि में लिखी गयी हैं,
यजुर्वेद में ॐ को ईश्वर का निज और मुख्य नाम बताया गया हैं, यह ओ३म ही इस सृस्टि का रचियता, पालक और विनाशक हैं
मूल लेख का लिंक निम्न हैं
aryamantavya.in
#swastika

Loading suggestions...