7 Tweets 7 reads Aug 06, 2022
क्या मौर्यकाल में सनातन धर्मी समाज में वर्ण कर्माधरित था?
मेगास्थेसनीज़ और चाणक्य ने के अनुसार वर्णव्यवस्था कैसी थी?
आज यह विषय स्पष्ट हो ही जाए!
मेगास्थेसनीज़ ने जो सनातनी समाज के बारे में लिखा है, उस विषय में बारे में पांडुरंग काणे का मत -
मेगास्थेसनीज़ द्वारा वर्णव्यवस्था वर्णन के विषय में श्री नीरजाकांत चौधरी देवशर्मा का मत -
स्वयं चंद्रगुप्त मौर्य के गुरु आचार्य चाणक्य का क्या मत है?
धर्मशास्त्रों(स्मृतियों) की भांति आचार्य चाणक्य ने भी अंतरजातीय विवाहों से उत्पन्न संकरजाति संतानों का वर्णन किया है और कहा है कि इन वर्णसंकरों का विवाह भी अपनी जाति में ही होता है।
चाणक्य स्वयं कहते हैं कि उनकी दंड-व्यवस्था इन धर्मशास्त्रों(स्मृतियों) पर आधारित है।

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