यह शोध उन लोगों की सोच पर सवाल पैदा करती है जो अपनी सरकारों से अपने लिए, अपने बच्चों और आने वाली पीढ़ियों के लिए, समस्त नागरिकों के लिए उत्कृष्ट शिक्षा और स्वास्थ्य प्रणाली, भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था नहीं मांगते बल्कि धर्मस्थल मांगते हैं या कथित धर्मस्थलों से ही खुश रहते हैं!
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ये लोग अपने धर्म के समक्ष विज्ञान को नकारते हैं लेकिन ऐसे धर्मांध लोग बीमार होने पर अस्पताल क्यों जाते हैं?
वे हस्पताल जाने की बजाय अपने धर्मस्थल पर जाकर अपनी बीमारी क्यों नहीं ठीक करवा सकते?
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वे हस्पताल जाने की बजाय अपने धर्मस्थल पर जाकर अपनी बीमारी क्यों नहीं ठीक करवा सकते?
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सभी धर्मों के अंधभक्त लोग जो दूर दूर के शहरों में स्थित धर्मस्थलों पर जाकर अपने अपने भगवान को ढूंढते फिरते हैं वे सभी इधर उधर धक्के खाने की बजाए तुरंत अपनी जिंदगी को खुद ही समाप्त कर के अपने अपने असली वाले भगवान के पास पहुंच कर साक्षात दर्शन क्यों नही कर लेते!
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धर्मस्थल जाएं और अपना कल्याण करें!
यह शोध और खबर आंखेँ और दिमाग खोलने वाला है, यदि कोई खोलना चाहे तब!
वरना अंधविश्वास और अंधभक्ति का कोई इलाज नहीं! नेता आपको धर्म का झुनझुना पकड़ाते रहेंगे।
आपका 'घर-बार' लुटता रहेगा,
उनका 'बार' बदस्तूर जारी रहेगा!
😉😌
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यह शोध और खबर आंखेँ और दिमाग खोलने वाला है, यदि कोई खोलना चाहे तब!
वरना अंधविश्वास और अंधभक्ति का कोई इलाज नहीं! नेता आपको धर्म का झुनझुना पकड़ाते रहेंगे।
आपका 'घर-बार' लुटता रहेगा,
उनका 'बार' बदस्तूर जारी रहेगा!
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