जौहर की गाथाओं से भरे पन्ने, भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर हैं। ऐसे अवसर एक नहीं, कई बार आये हैं जब हिन्दू वीरांगनाओं ने अपनी पवित्रता की रक्षा के लिए “जय हर-जय हर” कहते हुए हजारों की संख्या में सामूहिक अग्नि प्रवेश किया था। यही उद्घोष आगे चलकर ‘जौहर’ बन गया।
और वीरांगना सम्पूर्ण श्रृंगार कर चिता पर आरूढ़ हुई थीं
कहते है अलाउद्दीन खिलजी ने उस चिता की राख से "सवा चौहत्तर मन सोना" लूटा था।
हिन्दू समाज ने राजपूतानियों के उस महान बलिदान की स्मृति बनाये रखने के लिए राजस्थान में एक लोक परंपरा आरम्भ की गयी थी
कहते है अलाउद्दीन खिलजी ने उस चिता की राख से "सवा चौहत्तर मन सोना" लूटा था।
हिन्दू समाज ने राजपूतानियों के उस महान बलिदान की स्मृति बनाये रखने के लिए राजस्थान में एक लोक परंपरा आरम्भ की गयी थी
हिन्दू अपने पत्रों पर "सवा चौहत्तर का अंक" अंकित किया करते थे।
इसका आशय यह था कि जिसको पत्र लिखा गया है उसके अलावा यदि कोई अन्य व्यक्ति इस पत्र को खोले तो उसे वही पाप लगे, जो पाप पद्मिनी की चिता से सवा चौहत्तर मन सोना लूटने पर अल्लाउद्दीन को लगा था।
इसका आशय यह था कि जिसको पत्र लिखा गया है उसके अलावा यदि कोई अन्य व्यक्ति इस पत्र को खोले तो उसे वही पाप लगे, जो पाप पद्मिनी की चिता से सवा चौहत्तर मन सोना लूटने पर अल्लाउद्दीन को लगा था।
और लोक इतिहास संरक्षण का यह अनूठा तरीका पत्रों के विलुप्त होने के साथ ही विलुप्त हो गया
ये हम सभी को पता है कि समय है तो बदलेगा अवश्य, लेकिन अपने गौरवशाली इतिहास को याद रखना और उसके मान-सम्मान की रक्षा करना और उसके लिए लड़ना हमारा प्रथम कर्तव्य होना चाहिए
ये हम सभी को पता है कि समय है तो बदलेगा अवश्य, लेकिन अपने गौरवशाली इतिहास को याद रखना और उसके मान-सम्मान की रक्षा करना और उसके लिए लड़ना हमारा प्रथम कर्तव्य होना चाहिए
क्यूँकि ये हमारे अस्तित्व की लड़ाई है जिसकी रक्षा के लिए हमारे पूर्वजों, हमारी माताओं, हमारी बहनो ने अपना सर्वस्व बलिदान क़ी है।
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