Vशुद्धि
Vशुद्धि

@V_Shuddhi

8 Tweets 23 reads Sep 06, 2022
और कहते हैं की इन लुटेरों ने भारत निर्माण में सहयोग दिया था!
जिस जौहर कुंड में 16000 क्षत्राणियों और वीरांगनाओं नें अपने धर्म और मर्यादा की रक्षा केलिए धधकते अग्निकुंड में जौहर स्नान किया उस जौहरकुंड की राख से अल्लाउद्दीन ख़िलजी ने
"सवा चौहत्तर मन सोना" (1 मन = 37.324kg) लूटा था
जौहर की गाथाओं से भरे पन्ने, भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर हैं। ऐसे अवसर एक नहीं, कई बार आये हैं जब हिन्दू वीरांगनाओं ने अपनी पवित्रता की रक्षा के लिए “जय हर-जय हर” कहते हुए हजारों की संख्या में सामूहिक अग्नि प्रवेश किया था। यही उद्घोष आगे चलकर ‘जौहर’ बन गया।
जौहर की गाथाओं में सबसे चर्चित वर्णन चित्तौड़ की रानी पद्मिनी का है, जिन्होंने 26 अगस्त, 1303 को 16,000 वीरांगनाओं के साथ जौहर किया था।
जौहर की ज्वाला शांत होने के बाद अलाउद्दीन ने उस विशाल चिता को भी नहीं छोड़ा।
युद्ध में विजय की सम्भावना ख़त्म होने पर सभी राजपूतानियाँ
और वीरांगना सम्पूर्ण श्रृंगार कर चिता पर आरूढ़ हुई थीं
कहते है अलाउद्दीन खिलजी ने उस चिता की राख से "सवा चौहत्तर मन सोना" लूटा था।
हिन्दू समाज ने राजपूतानियों के उस महान बलिदान की स्मृति बनाये रखने के लिए राजस्थान में एक लोक परंपरा आरम्भ की गयी थी
हिन्दू अपने पत्रों पर "सवा चौहत्तर का अंक" अंकित किया करते थे।
इसका आशय यह था कि जिसको पत्र लिखा गया है उसके अलावा यदि कोई अन्य व्यक्ति इस पत्र को खोले तो उसे वही पाप लगे, जो पाप पद्मिनी की चिता से सवा चौहत्तर मन सोना लूटने पर अल्लाउद्दीन को लगा था।
और लोक इतिहास संरक्षण का यह अनूठा तरीका पत्रों के विलुप्त होने के साथ ही विलुप्त हो गया
ये हम सभी को पता है कि समय है तो बदलेगा अवश्य, लेकिन अपने गौरवशाली इतिहास को याद रखना और उसके मान-सम्मान की रक्षा करना और उसके लिए लड़ना हमारा प्रथम कर्तव्य होना चाहिए
क्यूँकि ये हमारे अस्तित्व की लड़ाई है जिसकी रक्षा के लिए हमारे पूर्वजों, हमारी माताओं, हमारी बहनो ने अपना सर्वस्व बलिदान क़ी है।

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