नवीन वेदान्ति हिन्दू नहीं है। हमेशा से वह हिन्दूविरोधी ही रहे है। सङ्घ जैसे हिन्दू संस्था का विरोध करना और टीपु सुलतान के लिए जाप और हवन करना, यही उनका चरित्र है।
जो विदेशी आक्रान्ता आये, उन सबका इन लोगोने समर्थ किया। हिन्दुहित के लिए जिसने कार्य किया, उन सबका इनहोने विरोध किया।
जो विदेशी आक्रान्ता आये, उन सबका इन लोगोने समर्थ किया। हिन्दुहित के लिए जिसने कार्य किया, उन सबका इनहोने विरोध किया।
इस लिए इन ढोंगीओ को धर्मगुरु बोलना धर्म का अपमान है। इनहे हिन्दु से कोई लेनादेना नहीं। येनकेन प्रकारेण अपना मठ और सम्पति ही बचानी है।
श्रृंगेरी
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