ऋषि उवाच
ऋषि उवाच

@RushiUvach

13 Tweets 11 reads Sep 14, 2022
*नवीन वेदान्तिओ का हिन्दुओ से विश्वासघात*
जिस टीपु सुलातनने लाखो हिन्दूओ का कत्ल कर दिया, उस टीपु सुल्तान को किसके आशीर्वाद थे, पता है?-जगद्गुरु शङ्क्राचार्य
१. सुलतान पत्र लिख शङ्कराचार्य से विनती करता है की उसकी विजय के लिए प्रार्थना करे। उनके आशीर्वादमें उसे बहुत श्रद्धा है।
२. लाखो हिन्दूओ का कत्ल करने वाले टीपु सुलतान को जगद्द्गुरु प्रसाद भेजते है। और बदलेमें टीपु सुलतान उनको साडी, शाल इत्यादि भेंट भेजता है। उस समय शृङ्गेरी के शङ्कराचार्य थे - श्री सच्चिदानन्द भारतीजी
३. शङ्कराचार्यजी पत्र लिखकर टीपु सुलतान को बता रहे है की उनहोने टीपु के राज्य की सफलता के विशेष सहस्रचण्डीजाप करने का निर्णय किया है।
जिस टीपु सुलतानने ८०० आयंगरो का दिवाली पर वध कर दिया था, उस टीपु सुलतान के लिए जगद्गुरु सहस्रचण्डीजाप कर रहे है।
माशा अल्ला!
४. और भी प्रमाण देखे, जहाँ पर टीपु सुलतान द्वारा जगद्गुरु शङ्कराचार्य को भेंट भेजी जा रही है।
५. यह देखे - टीपु सुलतान आग्रह कर रहे है की शङ्कराचार्य उनहे दर्शन दे।
जिस टीपुने अनेक हिन्दूओ का धर्मान्तरण किया, उसे दर्शन देने का क्या प्रयोजन है?टीपु सुलतानने उनके भव्य स्वागत की भी व्यवस्था हर जगह करी थी।
६. टीपु सुलतान विनन्ती कर रहा है की शङ्कराचार्य उसकी और उसके शासन की सुरक्षा के लिए त्रिकाल प्रार्थना करे।
७. सन १७९३में शङ्कराचार्यजी द्वारा टीपु सुलतान को शिरछेप(पगडी?), कलगी और शाल भेट करी गई थी।
८. सन १७९५में टीपु सुलतान पत्र लिखकर बता रहा है की उसकी शक्ति के तीन स्तम्भ है।
१. अल्ला की रहेमत
२. जगद्गुरु शङ्कराचार्यजी के आशिर्वाद
३. सैन्यबल
यानी टीपुने हिन्दूओ का जो नरसंहार किया था, वह शङ्कराचार्यजी के आशीर्वाद से किया था?
९. इस पत्रमें टीपु सुलतानने पत्र लिखकर बताया है की जगद्गुरु द्वारा जो चण्डीहवन किया गया था, उसके कारण हि वह अपने शत्रुओ का वध कर पाये है। उनहोने शङ्कराचार्यजी से फिरसे चण्डीहवन करने की विनती करी। तथा उसके लिए जरुरी प्रबन्ध भी किया।
यह सारा वर्णन हमने निम्नग्रन्थ से लिया है।
नवीन वेदान्ति हिन्दू नहीं है। हमेशा से वह हिन्दूविरोधी ही रहे है। सङ्घ जैसे हिन्दू संस्था का विरोध करना और टीपु सुलतान के लिए जाप और हवन करना, यही उनका चरित्र है।
जो विदेशी आक्रान्ता आये, उन सबका इन लोगोने समर्थ किया। हिन्दुहित के लिए जिसने कार्य किया, उन सबका इनहोने विरोध किया।
इस लिए इन ढोंगीओ को धर्मगुरु बोलना धर्म का अपमान है। इनहे हिन्दु से कोई लेनादेना नहीं। येनकेन प्रकारेण अपना मठ और सम्पति ही बचानी है।
श्रृंगेरी

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