मित्रों,
शंघाई क्वॉपरैशन ऑर्गनाइजेशन का शिखर सम्मेलन, याने समरकन्द समिट समाप्त हुआ। कुल मिला कर इसे सांपों की सभा में जीभों की लपलपाहट के अलावा कुछ नहीं कहा जा सकता।
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शंघाई क्वॉपरैशन ऑर्गनाइजेशन का शिखर सम्मेलन, याने समरकन्द समिट समाप्त हुआ। कुल मिला कर इसे सांपों की सभा में जीभों की लपलपाहट के अलावा कुछ नहीं कहा जा सकता।
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सुना है इस समिट पर सभी देशों का कुल मिला कर 500 करोड़ डॉलर से अधिक का खर्च हुआ, जिसे यकीनन किसी पुतिन, जिनपिंग या मोदी ने चाय बेच कर नहीं कमाया था। आप हम जैसे करोड़ों सूतिये टैक्स पेयर्स ने इसका खर्च उठाया था।
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चुनिंदा फ़ोटोजीवियों के फ़ोटो खिंचे, बेवजह दांत चियारे गए, अपना अपना प्रोपेगण्डा हुआ।
खैर, बेशक इस समिट से हमें चर्मघंटक भी हासिल न हुआ हो, आप बहरहाल कुछ बिलौटों की तस्वीरें देख कर मगन रह सकते हैं।
आपके नसीब को ससुरा कोई नहीं सुधार सकता।
हरिओम.........✋
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खैर, बेशक इस समिट से हमें चर्मघंटक भी हासिल न हुआ हो, आप बहरहाल कुछ बिलौटों की तस्वीरें देख कर मगन रह सकते हैं।
आपके नसीब को ससुरा कोई नहीं सुधार सकता।
हरिओम.........✋
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@threadreaderapp @rattibha please unroll.
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