सकते हैं और कौन से नाम के लोग आपके मित्र या आपके शुभ परिणामों की प्राप्ति में सहयोगी हो सकते हैं
हिन्दी वर्णमाला के सभी स्वरों और व्यंजनो को आठ वर्गो में क्रमानुसार बांटा गया है, वो निम्नलिखित है।
विभिन्न वर्ग-
1- गरुड़ वर्ग : अ, इ, ऊ, ए, ओ
2- मार्जार वर्ग : क, ख, ग, घ, ङ
हिन्दी वर्णमाला के सभी स्वरों और व्यंजनो को आठ वर्गो में क्रमानुसार बांटा गया है, वो निम्नलिखित है।
विभिन्न वर्ग-
1- गरुड़ वर्ग : अ, इ, ऊ, ए, ओ
2- मार्जार वर्ग : क, ख, ग, घ, ङ
3- सिंह वर्ग : च, छ, ज, झ, ञ
4- श्वान वर्ग : ट, ठ, ड, ढ, ण
5- सर्प वर्ग : त, थ, द, ध, न
6- मूषक वर्ग : प, फ, ब, भ, म
7- मृग वर्ग : य, र, ल, व
8- मेष वर्ग : श, ष, स, ह
शत्रु वर्ग:-
प्रत्येक वर्ग से ‘पांचवा वर्ग’ शत्रु वर्ग का होता है। गरुड़ और सर्प आपस में पारस्परिक शत्रु
4- श्वान वर्ग : ट, ठ, ड, ढ, ण
5- सर्प वर्ग : त, थ, द, ध, न
6- मूषक वर्ग : प, फ, ब, भ, म
7- मृग वर्ग : य, र, ल, व
8- मेष वर्ग : श, ष, स, ह
शत्रु वर्ग:-
प्रत्येक वर्ग से ‘पांचवा वर्ग’ शत्रु वर्ग का होता है। गरुड़ और सर्प आपस में पारस्परिक शत्रु
हैं। मार्जार और मूषक आपस में पारस्परिक शत्रु है। सिंह और मृग आपस में पारस्परिक शत्रु हैं। श्वान और मेष आपस में पारस्परिक शत्रु हैं, इसलिए जातक को अपनी नाम राशि के अनुसार वर्ग के पारस्परिक शत्रु वर्ग के जातक या शहर या कंपनी से बचना चाहिए ।
मित्र वर्ग:-
इसी प्रकार यदि नामाक्षर ‘चौथे वर्ग’ में आता है तो वह पारस्परिक मित्र होता है। यथा किसी का नाम पुष्पांजलि है तो उससे चौथे वर्ग में आने वाले अक्षरों के नाम जैसे कमल,काव्या आदि नाम के व्यक्तियों के साथ उनकी मित्रता सफल परिणाम देगी
जाने कैसे देखें अवकहड़ा 👇🏼
इसी प्रकार यदि नामाक्षर ‘चौथे वर्ग’ में आता है तो वह पारस्परिक मित्र होता है। यथा किसी का नाम पुष्पांजलि है तो उससे चौथे वर्ग में आने वाले अक्षरों के नाम जैसे कमल,काव्या आदि नाम के व्यक्तियों के साथ उनकी मित्रता सफल परिणाम देगी
जाने कैसे देखें अवकहड़ा 👇🏼
उदाहरण के लिए किसी व्यक्ति का नाम “विनय” है, जो ‘मृग’ वर्ग में आता है
और मृग का शत्रु वर्ग ‘सिंह’ है, जिस के अक्षर च, छ, ज, झ, ञ है। इन नाम के जातक जैसे चरणसिंह, चन्दन आदि नामों से इन्हें बचना चाहिए और इसी तरह से शहर जैसे चंडीगढ़, चेन्नई, छतरपुर, झांसी आदि शहर में
और मृग का शत्रु वर्ग ‘सिंह’ है, जिस के अक्षर च, छ, ज, झ, ञ है। इन नाम के जातक जैसे चरणसिंह, चन्दन आदि नामों से इन्हें बचना चाहिए और इसी तरह से शहर जैसे चंडीगढ़, चेन्नई, छतरपुर, झांसी आदि शहर में
सफलता मिलने में परेशानी हो सकती है।
तो इस प्रकार से आप अपने शत्रु और मित्र नामाक्षर को आसानी से जान सकते हैं।
नामाक्षर के अनुसार इसे वैर चक्र भी कहा जाता है। इस चक्र की सहायता से जातक अपने वैर (दुश्मन) या मित्र को जान पाता है। जातक अपने ही नाम से अपने शत्रु का नाम जान सकेगा।
तो इस प्रकार से आप अपने शत्रु और मित्र नामाक्षर को आसानी से जान सकते हैं।
नामाक्षर के अनुसार इसे वैर चक्र भी कहा जाता है। इस चक्र की सहायता से जातक अपने वैर (दुश्मन) या मित्र को जान पाता है। जातक अपने ही नाम से अपने शत्रु का नाम जान सकेगा।
इसके लिए जातक को अपनी वर्ग कुंडली की गणना (ज्योतिष सहायता से) करनी होती है
• अपने ही वर्ग से 5वां वर्ग शत्रु है।
• तीसरा वर्ग तटस्थ है।
• चौथा वर्ग एक दोस्त है।
यह वर्ग यह जानने में मदद करता है कि जातक का दूसरे व्यक्ति के साथ किस तरह का संबंध या साझेदारी होगी
• अपने ही वर्ग से 5वां वर्ग शत्रु है।
• तीसरा वर्ग तटस्थ है।
• चौथा वर्ग एक दोस्त है।
यह वर्ग यह जानने में मदद करता है कि जातक का दूसरे व्यक्ति के साथ किस तरह का संबंध या साझेदारी होगी
Loading suggestions...