जोकि कांगड़ा से लगभग 30 किलो मीटर स्थित है
ये मंदिर अतिप्राचीन और हिन्दुओं की 51 शक्ति पीठ में से एक है। मंदिर में कोई मूर्ति नहीं है। यहां पर पृथ्वी के गर्भ से 9 अलग अलग जगह से ज्वालाएं निकलती रहती हैं जिसके ऊपर ही मंदिर का निर्माण किया गया।
ये मंदिर अतिप्राचीन और हिन्दुओं की 51 शक्ति पीठ में से एक है। मंदिर में कोई मूर्ति नहीं है। यहां पर पृथ्वी के गर्भ से 9 अलग अलग जगह से ज्वालाएं निकलती रहती हैं जिसके ऊपर ही मंदिर का निर्माण किया गया।
इन 9 ज्योतियों को महाकाली, अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलाज, विंध्यवासिनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अंबिका, अंजीदेवी के नाम से जाना जाता है।
वैसे तो अनेक कहानियाँ हैं इस मंदिर के इतिहास और मान्यता पर, किन्तु मंदिर के सूचना पट पर एक लिखी हुई सूचना को पढने के बाद जो सबसे बड़ा आश्चर्य होता है
वैसे तो अनेक कहानियाँ हैं इस मंदिर के इतिहास और मान्यता पर, किन्तु मंदिर के सूचना पट पर एक लिखी हुई सूचना को पढने के बाद जो सबसे बड़ा आश्चर्य होता है
वो ये की उस पर लिखा है कि एक बार अकबर इस मंदिर के दर्शन करने आया था , उसने मंदिर में जलती ज्वाला को बुझाने के लिए अपने लोगों को लगाया, किन्तु ज्य्वाला जब नहीं बुझी तो माता के चमत्कार से प्रभावित होकर अकबर नंगे पैर माँ के दर्शन करने आया, और माता पर सोने का छत्र चढाया,
ये पंक्ति आरती की कुछ पुस्तकों में माता की आरती में भी लिखी हुई है, और कहते है उसने साथ ही मंदिर को कई सौ बीघा भूमि दान दी।
पुजारियों, और अन्य अधिकारियों से इस विषय पर बात करने पर वे भी वही रटा- रटाया और वहाँ लिखा हुआ, उत्तर दोहराते हैं
पुजारियों, और अन्य अधिकारियों से इस विषय पर बात करने पर वे भी वही रटा- रटाया और वहाँ लिखा हुआ, उत्तर दोहराते हैं
क्यूँकि इन सभी कि सूचना का ज़रिया भी वही सूचना पट्ट है।
पर अकबर तो मूर्ति भंजक ( breaker) था, उसने हिन्दू धर्म को मिटाने के अनेक प्रयास किये थे, जो की कई जगह इतिहास में लिखे हैं। वो क्रूर is-लामी जिहादी किसी हिन्दू आस्था पर कभी श्रद्धा नहीं दिखा सकता था
पर अकबर तो मूर्ति भंजक ( breaker) था, उसने हिन्दू धर्म को मिटाने के अनेक प्रयास किये थे, जो की कई जगह इतिहास में लिखे हैं। वो क्रूर is-लामी जिहादी किसी हिन्दू आस्था पर कभी श्रद्धा नहीं दिखा सकता था
जो अकबर अपने अहंकार और is-लामी जिहाद कि सनक में मेवाड़ को तबाह करने के मनसूबे रखता हों! जो एक ही दिन में चित्तोड़ो दुर्ग के पास 30 हजार साधारण नागरिकों को केवल हिन्दू होने कारण क़त्ल करवा सकता है
वो किसी हिन्दू आस्था पर सोने का छत्र चढ़ाएगा !! क्या आपको लगता ये संभव है !
वो किसी हिन्दू आस्था पर सोने का छत्र चढ़ाएगा !! क्या आपको लगता ये संभव है !
पालमपुर के एक प्रोफ़ेसर रामशरण भारद्वाज जी जिन्होंने इतिहास पर कई थीसिस लिखी हैं बताते हैं,
कि ये सत्य है कि नूरपुर और चम्बे पर हमला करने के लिए अकबर ज्वाला मंदिर पर आया था। और ये भी सत्य है कि मंदिर की ज्योति को बुझाने के प्रयास भी किये थे,
कि ये सत्य है कि नूरपुर और चम्बे पर हमला करने के लिए अकबर ज्वाला मंदिर पर आया था। और ये भी सत्य है कि मंदिर की ज्योति को बुझाने के प्रयास भी किये थे,
पर जब नहर से पानी लाकर भी अकबर ज्योति को बुझा नहीं पाया, तब मंदिर का विध्वंस करवा कर चला गया था !
ज्वाला स्थल पर बने मंदिर को नष्ट करवाया , वहां के सभी सेवादार और पुजारी आदि सबको मृत्यु दंड देकर मार दिया, ज्योति स्थल को बड़े बड़े शिलाओं से ढक कर चला गया था !
ज्वाला स्थल पर बने मंदिर को नष्ट करवाया , वहां के सभी सेवादार और पुजारी आदि सबको मृत्यु दंड देकर मार दिया, ज्योति स्थल को बड़े बड़े शिलाओं से ढक कर चला गया था !
बाद में चंबा के राजा संसार चंद ने मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया था और महाराजा रणजीत सिंह ने मंदिर पर सोने का छत्र लगवाया था,, साथ ही महाराजा के पुत्र शेरसिंह ने मंदिर के मुख्य द्वार पर चांदी के दरवाज़े लगवाये।
भरद्वाज जी बताते है कि ये सूचना हिन्दू समाज की मूर्खता और is-लामी, जिहादी क़ौम की चालाकी का नतीजा है
सालों पूर्व सरकारी आदेश से ये सूचना इसलिए लिखवाई गई है जिससे हिन्दू मुस्लिम में भाई चारा का दिखवा किया जा सके और उसकी आड़ में मुग़लों और is-लाम का गुणगान हो सके
सालों पूर्व सरकारी आदेश से ये सूचना इसलिए लिखवाई गई है जिससे हिन्दू मुस्लिम में भाई चारा का दिखवा किया जा सके और उसकी आड़ में मुग़लों और is-लाम का गुणगान हो सके
credit - वीर हिंदू गाथा (FB)
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