एक साहब हैं नारायण मूर्ति। इंफोसिस वाले। उनका कहना है कि यूपीए के दौरान देश 'ठहर' गया था। उनकी इस बात से मैं सहमत हूं। मोदी सरकार आने के बाद देश न सिर्फ चलने लगा, बल्कि दौड़ने लगा। इतना तेज दौड़ा कि 2022 आते आते ससुरा हांफने लगा।
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यूपीए वाले 130 डॉलर का क्रूड ऑयल खरीदकर 70-80 रुपए लीटर पेट्रोल दे रहे थे। एनडीए सरकार 70 डॉलर का क्रूड ऑयल लेकर 100 रुपए लीटर बेच रही है। यूपीए के ज़माने में गैस सिलेंडर 400 पर ठहरा हुआ था। एनडीए ने दौड़ा कर 1100 का कर दिया। बेरोज़गारी को 45 साल के स्तर पर पहुंचा दिया।
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खाने का तेल 70 से 200 की ऊंचाई पर ला दिया। देश को भुखमरी के मामले में 116 देशों में 101वें पायदान तक पहुंचा दिया। 8 सालों में 22 करोड़ नए गरीब हो गए। 80 करोड़ लोग मुफ्त अनाज के मोहताज हो गए।
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एनडीए के दौरान देश सबसे तेज़ दौड़ा था, नोटबन्दी के दौरान। उसके बाद दौड़ता ही जा रहा है। दौड़ते दौड़ते की बार औंधे मुंह गिरा, और नाक तुड़वा चुका।
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रुपया ऐसा दौड़ा कि 60 से 81 पार कर गया। और दौड़ खतम करने को राजी नहीं है।
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रुपया ऐसा दौड़ा कि 60 से 81 पार कर गया। और दौड़ खतम करने को राजी नहीं है।
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ईडी, आईटी और सीबीआई को इतना तेज दौड़ाया जा रहा है कि सांस लेने के लिए भी रुक नहीं पा रहे हैं।
देश का ठहर जाना ठीक नहीं होता। उसे दौड़ते रहना चाहिए। भले दौड़ते-दौड़ते उसकी सांसें उखड़ जाएं, प्राण पखेरू उड़ जाएं!
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देश का ठहर जाना ठीक नहीं होता। उसे दौड़ते रहना चाहिए। भले दौड़ते-दौड़ते उसकी सांसें उखड़ जाएं, प्राण पखेरू उड़ जाएं!
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देश को अभी और तेज़ दौड़ाने की ज़रूरत है। नारायण मूर्ति को सलाम, जिन्होंने बताया कि देश 'ठहर' गया था, अब दौड़ने लगा है।
दौड़ेगा ससुरा, जरूर दौड़ेगा! न दौड़ेगा तो अपने प्राण गवां बैठेगा।
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दौड़ेगा ससुरा, जरूर दौड़ेगा! न दौड़ेगा तो अपने प्राण गवां बैठेगा।
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@threadreaderapp @rattibha please unroll.
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