Reference श्लोक - भावप्रकाश निघण्टु
पिप्पली दीपनी वृष्या स्वादुपाका रसायनी ।
अनुष्णा कटुका स्निग्धा वातश्लेष्ll
पिप्पली रेचनी हन्ति श्वासकासोदरज्वरान् ।
कुष्ठप्रमेहगुल्मार्श: प्लीहशूलाममारुतान् ॥
पिप्पली दीपनी वृष्या स्वादुपाका रसायनी ।
अनुष्णा कटुका स्निग्धा वातश्लेष्ll
पिप्पली रेचनी हन्ति श्वासकासोदरज्वरान् ।
कुष्ठप्रमेहगुल्मार्श: प्लीहशूलाममारुतान् ॥
रस - कटु
वीर्य - अनुष्णशीत
विपाक - मधुर
गुण - गुरु, स्निग्ध, तीक्ष्ण
उत्त्पति स्थान - भारत के उष्ण प्रदेश में.
वीर्य - अनुष्णशीत
विपाक - मधुर
गुण - गुरु, स्निग्ध, तीक्ष्ण
उत्त्पति स्थान - भारत के उष्ण प्रदेश में.
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भावप्रकाश निघण्टु
द्रव्य गुण विज्ञान
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