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@AyurvedaTalks

5 Tweets 7 reads Oct 29, 2022
पिप्पली ( Pippali ) - लता
प्राणवह स्त्रोतोत्स रोगों ( Respiratory Disease ) में पीपली का औषधीय गुण लाभदायक है !!
Latin Name - Pipper Longum
Family - Piperacae
पर्याय - वेदैही, मागधी, वपला, कृष्णा, कणा,
चपला, तीक्ष्णतण्डुला, उषणा, शोण्डी, कोला.
Reference श्लोक - भावप्रकाश निघण्टु
पिप्पली दीपनी वृष्या स्वादुपाका रसायनी ।
अनुष्णा कटुका स्निग्धा वातश्लेष्ll
पिप्पली रेचनी हन्ति श्वासकासोदरज्वरान् ।
कुष्ठप्रमेहगुल्मार्श: प्लीहशूलाममारुतान् ॥
रस - कटु
वीर्य - अनुष्णशीत
विपाक - मधुर
गुण - गुरु, स्निग्ध, तीक्ष्ण
उत्त्पति स्थान - भारत के उष्ण प्रदेश में.
दोष कर्म - कफ वात शामक
उपयोग अंग - फल, मूल
कल्प - पिप्पल्यासव, चौसठ पिप्पली, गुङपिप्पली, पिप्पली खण्ड.
मात्रा - चूर्ण 5-1 ग्राम
उपयोग - श्वास, कास, कुष्ठ, गुल्म, अर्श, मेदकफहर, वृष्य, मेध्य, गुडयुक्त अग्निवर्धक, जीर्णज्व.
Refrence Book
भावप्रकाश निघण्टु
द्रव्य गुण विज्ञान

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