एक भ्रांति कि "गुजरात में राजपूतो को ओबीसी आरक्षण प्राप्त है"
इसका निराकरण 👇.....
क्या गुजरात के राजपूतो को ओबीसी आरक्षण मिलता है????
जवाब है बिल्कुल नही।
कृपया विस्तार से पढिये Thread 1-17
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इसका निराकरण 👇.....
क्या गुजरात के राजपूतो को ओबीसी आरक्षण मिलता है????
जवाब है बिल्कुल नही।
कृपया विस्तार से पढिये Thread 1-17
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दरअसल गुजरात मे स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले से कृषक पाटीदार समाज ने विदेशों में जाना और शिक्षा के प्रसार से तरक्की शुरू कर दी थी,और धीरे धीरे गुजरात में अपनी 14% जनसंख्या को एकजुट करते हुए राजनैतिक और आर्थिक वर्चस्व भी स्थापित कर लिया..
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पाटीदारों का बढ़ता वर्चस्व गुजरात में राजपूतो के पतन की कीमत पर स्थापित हुआ था, दरअसल राजपूत ही अधिकांश गुजरात मे स्वतंत्रता प्राप्ति तक रजवाड़ो और जागीरों के मालिक थे।।
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रजवाड़े और जागीरों के खत्म होने से राजपूत समाज की स्थिति में गिरावट हुई क्योंकि जनसंख्या में शुद्ध राजपूत 7% के आसपास ही हैं तो इतने में राजनैतिक वर्चस्व बनाया जाना भी सम्भव नही था।
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इसलिए राजपूतो ने छठे दशक के बाद आर्थिक राजनैतिक रूप से शक्तिशाली पटेलों का मुकाबला करने के लिए उन छोटी छोटी जातियों को अपने राजनैतिक गठबंधन में मिलाना शुरू किया जो खुद को राजपूतो से निकला हुआ या उनकी संतान मानते थे..
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इन सभी जातियों को मिलाकर "क्षत्रिय" नामक राजनैतिक गठबंधन में जोड़ लिया, जिसमें शुद्ध मुख्यधारा के राजपूत के अतिरिक्त कोली-ठाकोर(20%),खांट, कराड़िया राजपूत, काठी आदि कई जातियों को मिलाया गया।
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प्रारम्भ में इस "Kshatriya umbrella group" का नेतृत्व राजपूत नेताओं के हाथ मे रहा पर उन्हें विशेष सफलता नही मिली।
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बाद में कोली ठाकोर समाज के कांग्रेसी नेता माधव सिंह सोलंकी ने नया राजनैतिक गठबंधन बनाया जो "KHAAM" के नाम से प्रसिद्ध हुआ जिसमें
K से क्षत्रिय (शुद्ध राजपूत,कोली-ठाकोर,कराड़िया आदि)
H से हरिजन
A A से आदिवासी और अहीर
M से मुसलमान
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K से क्षत्रिय (शुद्ध राजपूत,कोली-ठाकोर,कराड़िया आदि)
H से हरिजन
A A से आदिवासी और अहीर
M से मुसलमान
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इस KHAAM गठबंधन की कुल आबादी गुजरात मे कुल आबादी की 60% हो गयी, जिसके दम पर कोली-ठाकोर समाज के नेता माधव सिंह सोलंकी ने लम्बे समय तक गुजरात पर राज किया और पटेलों को कड़ी टक्कर दी।
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जिस "Kshatriya" umbrella group का निर्माण उच्चवर्गीय राजपूतो ने किया था उसका नेतृत्व अब संख्याबल के दमपर कोली-ठाकोर समाज के हाथों में आ गया, जिससे उच्चवर्गीय शुद्ध राजपूत इससे दूर होने लगे।
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1989 में मण्डल आयोग की सिफारिशें लागू होते ही गुजरात के Kshatriya umbrella group में शामिल
कोली-ठाकोर, कराड़िया राजपूत, खांट, काठी आदि जातियों को ओबीसी आरक्षण मिल गया, जबकि शुद्ध राजपूतो को ओबीसी दर्जा नही मिला।
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कोली-ठाकोर, कराड़िया राजपूत, खांट, काठी आदि जातियों को ओबीसी आरक्षण मिल गया, जबकि शुद्ध राजपूतो को ओबीसी दर्जा नही मिला।
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ओबीसी दर्जा और राजनैतिक ताकत मिलने से इन सेमी-क्षत्रिय जातियों की स्थिति में सुधार हुआ।
विशेषकर कोली-ठाकोर समाज ने खुद को सिर्फ क्षत्रिय प्रचारित करना ही शुरू कर दिया।
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विशेषकर कोली-ठाकोर समाज ने खुद को सिर्फ क्षत्रिय प्रचारित करना ही शुरू कर दिया।
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शंकर सिंह बाघेला शुद्ध राजपूत हैं पर उनका जनाधार सभी क्षत्रिय जातियों में था, क्योंकि वो पटेल वर्चस्व के विरुद्ध संघर्ष करते रहे थे
11A/17 👇
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शंकर सिंह बाघेला क्षत्रियों के नेता कहे जाते थे तो इसका गुजरात के संदर्भ में अर्थ सिर्फ राजपूतो से नही बल्कि Kshatriya umbrella group में शामिल सभी जातियों से है।
12/17👇
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अगर आप गुजरात मे चुनाव के दौरान कोई रिपोर्ट पढ़ते हैं जिसमे लिखा हो कि किसी विधानसभा क्षेत्र में 30% क्षत्रिय और 22% पाटीदार हैं तो गुजरात के संदर्भ में उसका वास्तविक अर्थ है कि Kshatriya umbrella group में शामिल सभी जातियां उस क्षेत्र में कुल 30% है न कि सिर्फ राजपूत।
13/17 👇
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इसी प्रकार अगर कहीं लिखा है कि गुजरात मे क्षत्रियो को ओबीसी आरक्षण मिलता है तो इसका अर्थ है कि क्षत्रियों की उपजाति मानी जाने वाली कोली-ठाकोर, कराड़िया राजपूत, काठी, रजपूत,खांट आदि जातियों को ओबीसी दर्जा मिला हुआ है..
14/17 👇
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गुजरात मे शुद्ध राजपूतो को कोई ओबीसी दर्जा हासिल नही है।
अब नीचे सिर्फ गुजरात के संदर्भ में पढ़िए
15/17 👇
अब नीचे सिर्फ गुजरात के संदर्भ में पढ़िए
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गुजरात मे कथित "क्षत्रिय umbrella group" की कुल आबादी---30% ( शुद्ध राजपूत मिलाकर)
गुजरात मे सिर्फ शुद्ध राजपूत आबादी---मात्र 7%
शुद्ध राजपूतो को यहां दरबार, गरासिया कहा जाता है।
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गुजरात मे सिर्फ शुद्ध राजपूत आबादी---मात्र 7%
शुद्ध राजपूतो को यहां दरबार, गरासिया कहा जाता है।
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गुजरात के शुद्ध दरबार राजपूतो को कोई ओबीसी दर्जा मिला हुआ है।
औऱ न ही पटेल पाटीदार कुर्मी हैं या गूजर हैं।।
कृपया उपरोक्तानुसार भ्रांति का निराकरण करें और किसी प्रतिद्वंद्वी समाज के प्रोपगैंडा पर कदापि भरोसा न करें।
इति सिद्धम
जय श्रीराम।
17/17
औऱ न ही पटेल पाटीदार कुर्मी हैं या गूजर हैं।।
कृपया उपरोक्तानुसार भ्रांति का निराकरण करें और किसी प्रतिद्वंद्वी समाज के प्रोपगैंडा पर कदापि भरोसा न करें।
इति सिद्धम
जय श्रीराम।
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क्रमांक 17/17 की पहली पंक्ति में कृपया गुजरात के शुद्ध दरबार राजपूतों को कोई ओबीसी दर्जा "नहीं" मिला हुआ है पढ़े 👆👆
धन्यवाद सर @dryadusingh जी 🙏🙏
धन्यवाद सर @dryadusingh जी 🙏🙏
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