Vशुद्धि
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@V_Shuddhi

4 Tweets 2 reads Dec 18, 2022
बापू का त्याग!!
मोहनदास करमचंद को पुणे के आगा खां पैलेस में कठोर कारावास (?) की सजा दी गई थी । सजा इतनी कठोर थी की बापू को स्नान करने के लिए 10 x10 (feet) के संगमरमर लगे बाथरूम में नहाना पड़ता था।
सजा इतनी कठोर थी की बापू को 8 x8 फीट के नर्म, मुलायम मखमली बिस्तर में सोने के लिए
मजबूर किया जाता था ।
सजा इतनी कठोर थी की 20 एकड़ में फैले आगा खां पैलेस के हरी हरी मुलायम घास में घूमने के लिए मजबूर किया जाता था ।
सजा इतनी कठोर थी की 12 x 12 फिट के स्टडी रूम में आलीशान टेबल कुर्सी में बेहतरीन इंग्लैंड के कागज में लेखन के लिए मजबूर किया गया ।
और हां, सजा इतनी कठोर थी की बापू की पत्नी भी साथ में रहती थी ।
सजा इतनी कठोर थी की आने जाने के लिए मर्सडीज कार में बैठने को मजबूर किया जाता था।
और उधर वीर सावरकर जी को इतनी आसान सजा मिली थी,हाथ पांव लोहे की जंजीरों से बंधे थे और दो जन्म की कालापानी की और उसमे भी रोज कोल्हू से तेल
निकालना पड़ता था,
फिर क्या! गांधी देश के ‘बापू’ बन गए और सावरकर जी अंग्रेजो से माफी मानने वाला।
जिसे विश्वास नही है वे पुणे में आगा खां पैलेस घूम आए,जो आज भी गांधी संग्रहालय के रूप में सुरक्षित है और हां,बापू जिस रस्सी से बकरी बांधते थे उसे देखना न भूलिएगा

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