एक अकेले रवीश @ravishndtv की आवाज दबाने के लिए क्या-क्या जुगत न लगाए गए! चैनल पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश हुई, प्रमोटर तोड़ने की कोशिश हुई, छापा वापा हुआ, अफवाहें फैलीं और अडानी की रखैल बनी यह तानाशाही आखिरकार जीत गई। यह अंत नहीं है, क्लाइमेक्स तो अब भी बाकी है।
...1/5
...1/5
@ravishndtv रवीश कुमार के इस्तीफे से कुछ लोग नाच रहे हैं। कुछ उनकी आलोचना भी करते रहते हैं। वे इतने भी खुदा नहीं हैं, वे अकेले पत्रकार नहीं हैं, उनके जैसे बहुत सारे हैं, ये सब बातें सही हैं। लेकिन उनके साथ पत्रकारिता जगत में उभरे लोगों ने जब घुंघरू बांध लिया,
...2/5
...2/5
@ravishndtv जब पूरा नोएडा मीडिया लश्करएमीडिया में बदल गया, जब पूरा मीडिया विपक्ष और जनता का शिकार करने निकल गया, तब रवीश कुमार तन कर खड़े रहे।
जब आलोचना की सारी आवाजें घोंट दी गईं, तब रवीश कुमार खड़े रहे।
...3/5
जब आलोचना की सारी आवाजें घोंट दी गईं, तब रवीश कुमार खड़े रहे।
...3/5
@ravishndtv जब जनता की तरफ से जुल्म को जुल्म कहने वाले कम लोग रह गए, तब रवीश हांक लगाते रहे और यह दिखाया कि कलम की ताकत से आज भी तानाशाह घबराते हैं।
सरकार बदली, रवीश कुमार नहीं बदले। लोग बदले, रवीश नहीं बदले। उन्होंने पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।
...4/5
सरकार बदली, रवीश कुमार नहीं बदले। लोग बदले, रवीश नहीं बदले। उन्होंने पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।
...4/5
@ravishndtv ज्यादा कुछ नहीं कहना। बस इतना कहना है कि कभी ठहर कर सोचिए कि आखिर क्या वजह है कि भारत जैसे विशाल देश में एक पत्रकार इतने वर्षों से निशाने पर है?
क्योंकि राजा को आलोचना और सवाल पसंद नहीं हैं। कभी सोचिएगा कि क्या हम 135 करोड़ लोगों की कौम मुर्दा हो चुकी है?
...5/5
क्योंकि राजा को आलोचना और सवाल पसंद नहीं हैं। कभी सोचिएगा कि क्या हम 135 करोड़ लोगों की कौम मुर्दा हो चुकी है?
...5/5
Loading suggestions...