महारथी शब्द का प्रयोग हम जितनी सरलता से करते हैं वास्तविकता में उसकी श्रेणी उससे कई सौ गुना बड़ी होती थी और कुछ चुनिंदा योद्धा हीं महारथी के स्तर प्राप्त किया करते थे
आइये यहाँ जानते हैं की योद्धाओं कि इन “अति उच्च श्रेणियों” को पाने के लिए किन योग्यताओं का होना आवश्यक था
आइये यहाँ जानते हैं की योद्धाओं कि इन “अति उच्च श्रेणियों” को पाने के लिए किन योग्यताओं का होना आवश्यक था
एक बात का विशेष ध्यान रखें की प्राचीन काल में योद्धाओं का वर्गीकरण केवल उनके शारीरिक बल के आधार पर नहीं अपितु उनके द्वारा प्राप्त दिव्यास्त्रों के आधार पर प्रमाणित किया जाता था। उदाहरण के लिए अर्जुन शारीरिक बल में भीम से कहीं पीछे थे किन्तु दिव्यास्त्रों के आधार पर उनसे कहीं आगे।
इसके अतिरिक्त कृपया रामायण और महाभारत के योद्धाओं की आपस में तुलना न करें, उनका बल उनके काल में उनके समकक्ष योद्धाओं के दृष्टि से देखें। अन्यथा रामायण काल के सामान्य योद्धा भी महाभारत काल के महारथी से अधिक शक्तिशाली थे।
उसी प्रकार किसी देवताओं की तुलना साधारण मनुष्य से ना करें। उनका बल भी उनके समक्ष देवताओं अथवा दानवों के सन्दर्भ में बताया जाता है
प्राचीन काल के प्रमुख योद्धाओं को मुख्यतः 6 श्रेणियों में बांटा गया है
प्राचीन काल के प्रमुख योद्धाओं को मुख्यतः 6 श्रेणियों में बांटा गया है
1- अर्धरथी: अर्धरथी एक प्रशिक्षित योद्धा होता था जो अस्त्र-शस्त्रों के सञ्चालन में निपुण होता था। एक अर्धरथी अकेले 2500 सशस्त्र योद्धाओं का सामना कर सकता था।
रामायण और महाभारत के विषय में कहें तो इन युद्धों में असंख्य अर्धरथियों ने हिस्सा लिया था।
रामायण और महाभारत के विषय में कहें तो इन युद्धों में असंख्य अर्धरथियों ने हिस्सा लिया था।
2 रथी: एक ऐसा योद्धा जो सभी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र के सञ्चालन में निपुण हो तथा 2 अर्धरथियों, अर्थात 5000 सशस्त्र योद्धाओं का सामना एक साथ कर सके।
1- रामायण: रामायण में कई रथियों ने हिस्सा लिया जिनका बहुत विस्तृत वर्णण नहीं मिलता है। राक्षसों में खर, दूषण, तड़का, मारीच, सुबाहु
1- रामायण: रामायण में कई रथियों ने हिस्सा लिया जिनका बहुत विस्तृत वर्णण नहीं मिलता है। राक्षसों में खर, दूषण, तड़का, मारीच, सुबाहु
वातापि आदि रथी थे। वानरों में गंधमादन, मैन्द एवं द्विविन्द, हनुमान के पुत्र मकरध्वज, को रथी माना जाता था।
महाभारत: सभी कौरव, युधिष्ठिर, नकुल, सहदेव, शकुनि, उसका पुत्र उलूक, उपपांडव (प्रतिविन्ध्य, सुतसोम, श्रुतकर्मा, शतानीक एवं श्रुतसेन), विराट, उत्तर, शिशुपाल पुत्र धृष्टकेतु
महाभारत: सभी कौरव, युधिष्ठिर, नकुल, सहदेव, शकुनि, उसका पुत्र उलूक, उपपांडव (प्रतिविन्ध्य, सुतसोम, श्रुतकर्मा, शतानीक एवं श्रुतसेन), विराट, उत्तर, शिशुपाल पुत्र धृष्टकेतु
जयद्रथ, शिखंडी, सुदक्षिण, शंख, श्वेत, इरावान, कर्ण के सभी पुत्र, सुशर्मा, उत्तमौजा, युधामन्यु, जरासंध पुत्र सहदेव, बाह्लीक पुत्र सोमदत्त, कंस, अलम्बुष, अलायुध, बृहदबल आदि की गिनती रथी के रूप में होती थी। दुर्योधन को 8 रथियों के बराबर माना गया है।
3- अतिरथी: एक ऐसा योद्धा जो सामान्य अस्त्रों के साथ अनेक दिव्यास्त्रों का भी ज्ञाता हो तथा युद्ध में 12 रथियों, अर्थात 60000 सशस्त्र योद्धाओं का सामना एक साथ कर सकता हो।
रामायण:– लव, कुश, अकम्पन्न, विभीषण, देवान्तक, नरान्तक, महिरावण, पुष्कल, काल में अंगद, नल, नील, प्रहस्त
रामायण:– लव, कुश, अकम्पन्न, विभीषण, देवान्तक, नरान्तक, महिरावण, पुष्कल, काल में अंगद, नल, नील, प्रहस्त
प्रद्युम्न, कीचक आदि अतिरथी थे।
4- महारथी:– ये संभवतः सबसे प्रसिद्ध पदवी थी और जो भी योद्धा इस पदवी को प्राप्त करते थे वे पूरे जगत में सम्मानित और प्रसिद्ध होते थे। महारथी एक ऐसा योद्धा होता था जो सभी ज्ञात अस्त्र शस्त्रों और कई दिव्यास्त्रों को चलने में समर्थ होता था।
4- महारथी:– ये संभवतः सबसे प्रसिद्ध पदवी थी और जो भी योद्धा इस पदवी को प्राप्त करते थे वे पूरे जगत में सम्मानित और प्रसिद्ध होते थे। महारथी एक ऐसा योद्धा होता था जो सभी ज्ञात अस्त्र शस्त्रों और कई दिव्यास्त्रों को चलने में समर्थ होता था।
युद्ध में महारथी 12 अतिरथियों अथवा 720000 सशस्त्र योद्धाओं का सामना कर सकता था। इसके अतिरिक्त जिस भी योद्धा के पास ब्रह्मास्त्र का ज्ञान होता था (जो गिने चुने ही थे) वो सीधे महारथी की श्रेणी में आ जाते थे।
रामायण: भरत, शत्रुघ्न, अंगद, सुग्रीव, अतिकाय, कुम्भकर्ण, प्रहस्त, जामवंत
रामायण: भरत, शत्रुघ्न, अंगद, सुग्रीव, अतिकाय, कुम्भकर्ण, प्रहस्त, जामवंत
कहीं-कहीं अर्जुन को पाशुपतास्त्र प्राप्त करने के कारण “अतिमहारथी” भी कहा जाता है
5- अतिमहारथी: इस श्रेणी के योद्धा दुर्लभ होते थे।अतिमहारथी उसे कहा जाता था जो 12 महारथी श्रेणी के योद्धाओं अर्थात 8640000 सशस्त्र योद्धाओं का सामना अकेले कर सकता हो
5- अतिमहारथी: इस श्रेणी के योद्धा दुर्लभ होते थे।अतिमहारथी उसे कहा जाता था जो 12 महारथी श्रेणी के योद्धाओं अर्थात 8640000 सशस्त्र योद्धाओं का सामना अकेले कर सकता हो
साथ ही सभी प्रकार के दैवीय शक्तियों का ज्ञाता हो।
महाभारत: महाभारत काल में केवल भगवान श्रीकृष्ण को अतिमहारथी माना जाता है।
रामायण: रामायण में भगवान श्रीराम अतिमहारथी थे।
महाभारत: महाभारत काल में केवल भगवान श्रीकृष्ण को अतिमहारथी माना जाता है।
रामायण: रामायण में भगवान श्रीराम अतिमहारथी थे।
इसके अतिरिक्त भगवान परशुराम और महावीर हनुमान का भी वर्णन कई स्थान पर अतिमहारथी के रूप में किया गया है।
भगवान विष्णु के अवतार विशेष कर वाराह एवं नृसिंह को भी अतिमहारथी की श्रेणी में रखा जाता है। कुछ देवताओं जैसे कार्तिकेय, गणेश तथा वैदिक युग के ग्रंथों में इंद्र, सूर्य एवं
भगवान विष्णु के अवतार विशेष कर वाराह एवं नृसिंह को भी अतिमहारथी की श्रेणी में रखा जाता है। कुछ देवताओं जैसे कार्तिकेय, गणेश तथा वैदिक युग के ग्रंथों में इंद्र, सूर्य एवं
वरुण देव को भी अतिमहारथी माना जाता है।आदिशक्ति की दस महाविद्याओं, नवदुर्गा एवं रुद्रावतार, विशेषकर वीरभद्र और भैरव को भी अतिमहारथी माना जाता है।
महामहारथी: ये किसी भी प्रकार के योद्धा का उच्चतम स्तर माना जाता है। महामहारथी उसे कहा जाता है जो 24 अतिमहारथियों अर्थात
महामहारथी: ये किसी भी प्रकार के योद्धा का उच्चतम स्तर माना जाता है। महामहारथी उसे कहा जाता है जो 24 अतिमहारथियों अर्थात
207360000 सशस्त्र योद्धाओं का सामना कर सकता हो। इसके साथ ही समस्त प्रकार की दैवीय एवं महाशक्तियाँ उसके अधीन हो।
इन्हे परास्त नहीं किया जा सकता।
आज तक पृथ्वी पर कोई भी "योद्धा" इस स्तर पर नहीं पहुँचा है। इसका एक कारण ये भी है कि
इन्हे परास्त नहीं किया जा सकता।
आज तक पृथ्वी पर कोई भी "योद्धा" इस स्तर पर नहीं पहुँचा है। इसका एक कारण ये भी है कि
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