बेशर्म रंग कहां देखा दुनिया वालों ने ...
बेशर्म रंग पर बवाल है। नया दौर है जनाब, नई नई आजादी है। इन आठ सालों में ऐसा क्या है जो बेशर्म नहीं हुआ? नजर फिराकर देखिए,
जो बेशर्म है वही शीर्ष पर है।
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बेशर्म रंग पर बवाल है। नया दौर है जनाब, नई नई आजादी है। इन आठ सालों में ऐसा क्या है जो बेशर्म नहीं हुआ? नजर फिराकर देखिए,
जो बेशर्म है वही शीर्ष पर है।
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शीर्ष का आसन, या कहें शीर्षासन कुछ ऐसा, कि जूतियां सर पर और टोपियां पैरों पर हैं। बेशर्मी को राजकीय संरक्षण है, प्रोत्साहन है।
नेता बेशर्म, अफसर बेशर्म, जनता बेशर्म, लेखक, पत्रकार, अखबार, ऐंकर और व्यूवर बेशर्म।
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नेता बेशर्म, अफसर बेशर्म, जनता बेशर्म, लेखक, पत्रकार, अखबार, ऐंकर और व्यूवर बेशर्म।
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कलाकार, कथाकार, अदाकार, नचकार सगरे बेशर्म हुए पड़े हैं। जो जिंदा है, वो बेशर्म है। या कि कहिए कि..
जो बेशर्म है, बस वही जिंदा बचा है।
तो रंग बेजान कैसे रहे भला। जानदार और शानदार होने के लिए वो भी बेशर्म हो लिए, बेशर्मों से चिपक लिए।
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जो बेशर्म है, बस वही जिंदा बचा है।
तो रंग बेजान कैसे रहे भला। जानदार और शानदार होने के लिए वो भी बेशर्म हो लिए, बेशर्मों से चिपक लिए।
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तो हर बेशर्मी का अपना एक्सक्लूजिस रंग है। कोई हरा बेशर्म है, कोई लाल बेशर्म, कोई संतरा, कोई नीला बेशर्म है।
और मजे की बात, इन रंगों की अलग अलग मात्राओं के मिलने से नए नए शेड की बेशर्मी ईजाद होती है। अब ताजा मामला ही ले लीजिए।
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और मजे की बात, इन रंगों की अलग अलग मात्राओं के मिलने से नए नए शेड की बेशर्मी ईजाद होती है। अब ताजा मामला ही ले लीजिए।
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हर वो बेशर्म, जो पठान के नाम पर देश मे बवेला मचाए है,
वही बेशर्म पलटकर पठान के बच्चे, उर्फ अब्बास के यार को सीने से लगाए है। विवाद मे जो गाना है वो कह भी रहा है -
नशा चढा जो फकीरी उतार फेकी है,
बेशरम रंग कहां देखा दुनिया वालों ने
अब ऐसा "बेशर्म फकीर" भला कौन हो सकता है?
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वही बेशर्म पलटकर पठान के बच्चे, उर्फ अब्बास के यार को सीने से लगाए है। विवाद मे जो गाना है वो कह भी रहा है -
नशा चढा जो फकीरी उतार फेकी है,
बेशरम रंग कहां देखा दुनिया वालों ने
अब ऐसा "बेशर्म फकीर" भला कौन हो सकता है?
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बहरहाल गाने मे कलाकार अधनंगा होकर नाच रहा है- "मुझ में नयी बात है, मेरी आदतों के साथ है, है जो सही वो करना नहीं..गलत होने की, यही तो शुरूवात है"
हमें लगता है कि गीत आठ साल पहले रिकार्ड किया गया था। क्योंकि अब तो "पठानपुत्र" के राज में गलत उरूज पर है, बेशर्मी भी।
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हमें लगता है कि गीत आठ साल पहले रिकार्ड किया गया था। क्योंकि अब तो "पठानपुत्र" के राज में गलत उरूज पर है, बेशर्मी भी।
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अल्लामा इकबाल कह गए,
वतन की फिक्र कर नादां,
तेरी बरबादियों के मशवरे हैं आसमानों में..
इसलिए होश की दवा कीजिए, विवाद को हवा न दीजिए, गीत का मजा लीजिए। वजीरेआजम ने कह ही दिया है कि "जुल्म बढने वाले हैं"। इसका मतलब..
बेशर्मी, अभी बाकी है मेरे दोस्त!
🤷♂️😌
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वतन की फिक्र कर नादां,
तेरी बरबादियों के मशवरे हैं आसमानों में..
इसलिए होश की दवा कीजिए, विवाद को हवा न दीजिए, गीत का मजा लीजिए। वजीरेआजम ने कह ही दिया है कि "जुल्म बढने वाले हैं"। इसका मतलब..
बेशर्मी, अभी बाकी है मेरे दोस्त!
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