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@AyurvedaTalks

18 Tweets 14 reads Jan 07, 2023
‘षोडश-संस्कार’ एक परिचय
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महर्षि वेदव्यास के अनुसार मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक पवित्र सोलह संस्कार प्राप्त किए जाते हैं।
1. गर्भाधान संस्कार
उत्तम सन्तान की प्राप्ति के लिए प्रथम संस्कार ।
2. पुंसवन संस्कार
गर्भस्थ शिशु संबंधी बौद्धिक विकास अधिकार दायर के दूसरे या तीसरे महीने किया जाने वाला दूसरा संस्कार।
3. सीमन्तोन्नयन संस्कार
माता को प्रसन्नत्त होने के कारण, ताकि गर्भस्थ-शिशु भक्ति संपन्न हो जाएं, बाजी के दावेदार सातवें या आठवें माह में जाने वाला तृतीय संस्कार।@@४@
4.जातकर्म संस्कार
नवजात शिशु के समझदार, बलवान, स्वस्थ एवं दीर्घजीवी होने की कामना के लिए जाने वाला चौथा-संस्कार ।
5. नामकरण संस्कार
नवजात शिशु को उचित नाम प्रदान करने के लिए जन्म के दस दिनों तक जाने वाला पंचम संस्कार ।
6. निष्क्रमण संस्कार
शिशु के दीर्घकाल तक धर्म और मर्यादा की रक्षा करते हुए इस लोक का भोग करने की कामना के लिए जन्म के तीन माह दर्ज करें चौथे माह में किया जाने वाला छठवां संस्कार।
7. अन्नप्राशन संस्कार
शिशु को माता के दूध के साथ अन्न को भोजन के रूप में प्रदान किया जाने वाला जन्म के धारक छठ माहवें में किया जाने वाला सप्तम संस्कार।
8. चूड़ाकर्म (मुण्डन) संस्कार
बच्चे के बौद्धिक, मानसिक एवं शारीरिक विकास की इच्छा से जन्म के पहले, तीसरा या पाँचवे वर्ष में किया जाने वाला अष्टम संस्कार।
9. कर्णवेध संस्कार
जातक की शारीरिक व्याधियों से रक्षा की कामना से किया जाने वाला दशम संस्कार।
10. यज्ञोपवीत(उपनयन)संस्कार
जातक की दीर्घायु वेदाध्ययन के अधिकार-प्राप्ति की कामना से किया जाने वाला एकादश संस्कार।
11. वेदारम्भ संस्कार
जातक के ज्ञानवर्धन की कामना से किया जाने वाला द्वादश संस्कार।
12. समावर्तन संस्कार
गृहस्थाश्रम में प्रवेश करने की इच्छा से किया जाने वाला चतुर्दश संस्कार।
13 .विवाह संस्कार
पति-पत्नी को परिणय-सूत्र में बंधने वाला पंचदश संस्कार।
14. वनप्रस्थ संस्कार
गृहस्थ की जिम्मेदारियाँ यथा शीघ्र करके, उत्तराधिकारियों को अपने कार्य सौंपकर अपने व्यक्तित्व को धीरे-धीरे सामाजिक, उत्तरदायित्व, पारमार्थिक कार्यों में पूरी तरह लगा देने के लिए वानप्रस्थ संस्कार कराया जाता है।
15. संन्यास संस्कार
संन्यास-आश्रम में प्रवेश करके ब्रह्मविद्या का अभ्यास करना पड़ता है और ब्रह्माभ्यास के द्वारा कैवल्य-मोक्ष की प्राप्ति का उपाय करना होता है।
16. अनत्येष्टि संस्कार
मृत्यु के उपरान्त किया जाने वाला षोडशवां संस्कार।
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BalaRoga ( Kaumarbhritya )

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