Divya Kumar Soti
Divya Kumar Soti

@DivyaSoti

9 Tweets 14 reads Jan 15, 2023
बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर रामचरित मानस के उत्तर कांड की जिस चौपाई और प्रसंग की बात कर रहे हैं वो ही शिक्षा में अनुसूचित जातियों से ब्राह्मणों के द्वारा भेदभाव किए जाने के झूठ की पोल खोल देता है। ये #Thread पूरा पढ़िए:-
रामचरितमानस उत्तर कांड के जिन 105-106 दोहों की चंद्रशेखर बात कर रहे हैं वो काक भुशुंडि अपने पिछले जन्म की कथा सुनाते हुए स्वयं के लिए कहे हैं। काक भुशुंडि कौआ जिसे चांडाल पक्षी कहा गया है होने के बावजूद सनातन हिंदू धर्म से सबसे बड़े सिद्धों और 8 चिरंजीवियों में से एक हैं 👇
काक भुशुंडि अपने पिछले जन्म की कथा सुनाते हुए बताते हैं कि उन्होंने अयोध्या में शूद्र वर्ण में जन्म लिया था। शिव भक्त थे पर विष्णु और अन्य देवताओं के विरोधी थे। साथ ही बहुत *धनवान* थे।
कुछ समय बाद आर्थिक स्थिति बिगड़ गई तो अयोध्या से उज्जैन गए जहां उनके शूद्र वर्ण होते हुए भी एक वैदिक ब्राह्मण आचार्य ने उन्हें शिष्य बनाया, पुत्र माना और मंत्र का उपदेश भी दिया। अरे ये क्या! भीम और फुलेवादी तो बताते हैं कि कान में मंत्र पड़ते ही सीसा डालते थे😂😂
अगर इतनी ही छुआ-छूत थी तो राम चरित मानस में ये क्यों लिखा है कि वैदिक ब्राह्मण आचार्य शूद्र शिष्य को अपने पुत्र जैसा प्रेम कर पढ़ाते थे?: "बिप्र पढ़ाव पुत्र की नाईं"!
काक भुशुंडि इसी संदर्भ में स्वयं अपनी निंदा करते हुए वो बात कहते हैं जो बिहार के शिक्षा मंत्री बता रहे हैं। राम की निंदा करने पर भी ब्राह्मण गुरू शूद्र शिष्य को कोई दंड नहीं देते। बस बार-बार समझाते हैं।
गुरू के बार-बार समझाने से काक भुशुंडि उनसे चिढ़ जाते हैं। एक दिन शिव मंदिर में जप के समय गुरू आते हैं तो प्रणाम नहीं करते जिसके चलते अपने इष्ट भगवान शंकर से ही श्राप मिलता है।
शूद्र शिष्य को श्राप मिलता देख ब्राह्मण गुरू भगवान शंकर से श्रापमुक्ति के लिए प्रार्थना करते हैं जो कि प्रसिद्ध नमामीशमीशान निर्वाणरूपं० स्तोत्र है।
इस स्तुति से प्रसन्न भगवान शिव एक शूद्र काक भुशुंडि को जन्म-मरण चक्र से मोक्ष प्रदान करते हैं जोकि सनातन हिंदू धर्म में सबसे बड़ा वरदान माना गया है। अब भी जलाना चाहते हैं तो अवश्य जला दें राम चरित मानस!

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