पिछले 15 दिन से देश के विभिन्न अखबारों में छप रहा है कि सरकार शीघ्र 2000000 टन गेहूं की बिक्री करेगी।
किस तरह से करना है इस पर विचार मंथन चल रहा है।
पता नहीं विचारों को किस प्रकार के मिक्सर ग्राइंडर में डालकर मंथन किया जा रहा है कि ससुरा मक्खन निकलता ही नहीं।
🤦♂️😂😂
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किस तरह से करना है इस पर विचार मंथन चल रहा है।
पता नहीं विचारों को किस प्रकार के मिक्सर ग्राइंडर में डालकर मंथन किया जा रहा है कि ससुरा मक्खन निकलता ही नहीं।
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निर्यात पर पाबंदी के बावजूद जनवरी में गेहूं के भाव 7 से 10% बढ़े। इस सीजन के लिए सरकार की घोषित न्यूनतम खरीद मूल्य याने एमएसपी ₹2125 प्रति क्विंटल के मुकाबले इस सप्ताह इंदौर मंडी में गेहूं ₹3100 प्रति क्विंटल और दिल्ली में ₹3150 बिका।
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देश के कई हिस्सों में यह 3200 रुपए से अधिक निकल गया। इसका असर ना सिर्फ आटे पर बल्कि इससे तैयार होने वाले सभी प्रोडक्ट के दाम पर देखा जा रहा है। इस साल पूरा स्टॉक बड़ी-बड़ी कंपनियों एवं स्टॉककिस्टों के पास जमा है।
स्टॉक लिमिट लगा देने से भी तेजी पर ब्रेक लग सकता था।
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स्टॉक लिमिट लगा देने से भी तेजी पर ब्रेक लग सकता था।
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सरकार के पास तेजी रोकने के लिए अनेक विकल्प थे पर पता नहीं क्यों उनका उपयोग नहीं किया गया।
जाहिर है वर्तमान सरकार का ध्यान व्यापारियों और स्टाकिस्ट के प्रति है जनता के प्रति नहीं। जनता पहली बार इतनी महंगाई को सहन कर रही है परंतु राहत देने के कोई प्रयास नहीं किए गए हैं।
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जाहिर है वर्तमान सरकार का ध्यान व्यापारियों और स्टाकिस्ट के प्रति है जनता के प्रति नहीं। जनता पहली बार इतनी महंगाई को सहन कर रही है परंतु राहत देने के कोई प्रयास नहीं किए गए हैं।
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