भारत के अरबपतियों के बीच एक अजीब सा "बिलिनायर्स ब्रदरहुड" देखने को मिला जब अडानी की डूबती लुटिया को बचाने के लिए उसके घोर प्रतिस्पर्धी मुकेश अंबानी, सज्जन जिंदल, सुनील मित्तल वगैरह सामने आकर अंतिम क्षणों में सैकड़ों करोड़ का निवेश एफपीओ में करने लगे।
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हम नहीं जानते कि एक अरबपति को टूटने से बचाने के लिए यह दूसरे अरबपतियों का स्वतः स्फूर्त प्रयास था या पर्दे के पीछे से किसी बाप जी ने डंडा घुमाकर मवेशियों को बाड़े की तरफ हांका था।
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शायद यह न्यू वर्ल्ड ऑर्डर की मजबूरी कही जाए कि सारी मोटी मुर्गियां अपनी जान बचाने के लिए एक साथ इकट्ठी हो जाएं।
खैर, कुल मिलाकर समाज के किसी भी वर्ग में एकता बनने का प्रयास सुखद है। देश में अन्य वर्ग और समाज एक साथ हो सकें या ना हो सकें, कम से कम अमीर तो एक साथ हो रहे हैं।
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खैर, कुल मिलाकर समाज के किसी भी वर्ग में एकता बनने का प्रयास सुखद है। देश में अन्य वर्ग और समाज एक साथ हो सकें या ना हो सकें, कम से कम अमीर तो एक साथ हो रहे हैं।
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बाकी समाज के हिस्सों में आपसी फूट पैदा करने के लिए इन अमीरों के चैनल दिन रात हिंदू-मुसलमान, रामायण-कुरान, सवर्ण-दलित का जाप कर ही रहे हैं।
देश का बैलन्स बराबर बनाए रखने के लिए एकता का हिसाब कहीं ना कहीं चुका ही दिया जाएगा। 😄
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देश का बैलन्स बराबर बनाए रखने के लिए एकता का हिसाब कहीं ना कहीं चुका ही दिया जाएगा। 😄
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वैसे आप लोग चिंता न करें, ताई जी ने ₹700000 तक की आमदनी को टैक्स फ्री कर ही दिया है। खुश रहें, मस्त रहें।
यह चिंता बिल्कुल ना करें कि आपकी आमदनी तो ससुरी ₹70000 साल भी नहीं है। 🤦😂😂
टैक्स में छूट से आपको क्या 🔔 मिलेगा।
हरिओम........✋
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यह चिंता बिल्कुल ना करें कि आपकी आमदनी तो ससुरी ₹70000 साल भी नहीं है। 🤦😂😂
टैक्स में छूट से आपको क्या 🔔 मिलेगा।
हरिओम........✋
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