तहक्षी™ Tehxi
तहक्षी™ Tehxi

@yajnshri

5 Tweets 9 reads Feb 07, 2023
What is gayatri (गायत्री) and brahmgayatri (ब्राह्मगायत्री ) yantra ?
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यंत्र, मंत्र देवता की गति को निर्धारित करता है। कार्य की दिशा को बनाता करता है। यंत्र देवता की प्राकृतिक सत्ता का भी बोध कराते हैं।
चतुर्भुज - सत्, रज, तम तीन अवस्थाऐं ।
षट्कोण - सृष्टि, स्थिति, संहार, निग्रह, ग्रेस,
पटकोण में देवता की कल्पना कर देवभाव को प्राकट्य किया जाता है।
अष्टदल - अष्टदलों में अधिकतर ब्राह्मयादि अष्टमातृका या अष्टभैरवों का पूजन अथवा देवी की अष्टांग शक्तियों का वर्णन होता है।
षोडशदल- देवी के सहायक कला शक्तियों का वर्णन आवाहन किया जाता है
भूपुर- साध्य देवता का एक
स्वतंत्र सृष्टि खण्ड है एवं उसकी रक्षा हेतु दिक्पालों का पूजन किया जाता है। इस तरह देवताओं को उसकी अंग शक्तियों सहित आवाहित कर मंत्र में कार्य सिद्धि हेतु पूर्णता प्राप्त की जाती है
मंत्र साधना के साथ, देवता का यंत्रार्चन पश्चात् हवन करना उचित है, गायत्री हवन में 24 लाख मंत्र जाप के बाद 3 ब्राह्मणों को भोजन की विधि है, एवं क्षमा याचना जरूरी है,

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