देवप्रतिष्ठा मुहूर्त क्या है?
देवप्रतिष्ठा कब करनी चाहिए?
वार एवं नक्षत्र कौनसा शुभ है?
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विष्णु, कृष्ण व अन्य सौम्य देवताओं की प्रतिष्ठा उत्तरायण काल में तथा उग्र देवता जैसे देवी, भैरव, हनुमान, नृसिंह, वामन, आदि देवताओं की दक्षिणायन में भी प्रतिष्ठा की जा सकती है।
देवप्रतिष्ठा कब करनी चाहिए?
वार एवं नक्षत्र कौनसा शुभ है?
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विष्णु, कृष्ण व अन्य सौम्य देवताओं की प्रतिष्ठा उत्तरायण काल में तथा उग्र देवता जैसे देवी, भैरव, हनुमान, नृसिंह, वामन, आदि देवताओं की दक्षिणायन में भी प्रतिष्ठा की जा सकती है।
देवताओं के मास तथा तिथी के आधार पर भी प्रतिष्ठा की जा सकती है। इसी आधार से श्रावण में शिव, भाद्रपद मे गणपति, नवरात्रा (आश्विन) मे दुर्गा की प्रतिष्ठा करने का विधान भी कहा गया है। मंगलवार एवं रिक्तातिथि का त्याग करें।
प्रतिष्ठाकाल वार विचार
रविवार को तेज प्राप्त
सोम कों कल्याण
भौम को अग्निदाह
बुध को धन प्रद
गुरुवार से स्थिरता
शुक्रवार को आनंद प्राप्त
तथा शनिवार को सामर्थ्य का नाश
रविवार को तेज प्राप्त
सोम कों कल्याण
भौम को अग्निदाह
बुध को धन प्रद
गुरुवार से स्थिरता
शुक्रवार को आनंद प्राप्त
तथा शनिवार को सामर्थ्य का नाश
नक्षत्र प्रतिष्ठा विचार
पूर्वाषाढा, उषा, मूल, तीनों उत्तरा, ज्येष्ठा, श्रवण, रोहिणी,हस्त, अश्विनी, रेवती, पुष्य, मृगशिरा, अनुराधा तथा स्वाति नक्षत्र प्रतिष्ठा हेतु उत्तम है।
पूर्वाषाढा, उषा, मूल, तीनों उत्तरा, ज्येष्ठा, श्रवण, रोहिणी,हस्त, अश्विनी, रेवती, पुष्य, मृगशिरा, अनुराधा तथा स्वाति नक्षत्र प्रतिष्ठा हेतु उत्तम है।
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