Vशुद्धि
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@V_Shuddhi

11 Tweets 81 reads Feb 20, 2023
भूतसंख्या पद्धति !!
संख्याओं को शब्दों के रूप में अभिव्यक्त करने की एक प्राचीन भारतीय पद्धति है जिसमें ऐसे साधारण शब्दों का प्रयोग किया जाता है जो किसी निश्चित संख्या से संबन्धित हों।
यहाँ 'भूत' का अर्थ है - 'सृष्टि का कोई जड़ या चेतन, अचर या चर पदार्थ या प्राणी'।
भूतसंख्या, कटपयादि-संख्या से अलग होती है यह पद्धति प्राचीन काल से ही भारतीय खगोलशास्त्रियों एवं गणितज्ञों में प्रचलित थी।
उदाहरण के लिये संख्या २ के लिये 'नयन' का उपयोग भूतसंख्या का एक छोटा सा उदाहरण है। नयन,नेत्रे (आँख) २ से सम्बन्धित है
इसी प्रकार 'पृथ्वी, भू’ शब्द का उपयोग १ (एक) के लिये किया जाता है
परंतु कुछ शब्दों के लिए दो संख्याएं सम्भावित है। जैसे रस – लोक में 6 रस ( भोजन वाले ) होते हैं । साहित्यशास्त्र में 9 रस ( अभिनय वाले ) बताए गए हैं
ऐसे स्तिथि मे से जो सामान्य और ज्यादा प्प्रचलित है,उसे लेते हैं
कुछ विद्वानों का कहना है कि भूतसंख्या की प्रवृत्ति संस्कृत के सभी शास्त्रों मे थी । पर आजकल यह विधि ज्योतिषशास्त्र और साहित्यशास्त्र तक सीमित रह गई है ।
इस का प्राचीनतम उल्लेख हमें सूर्यसिद्धान्त में मिलता है जो ‘कृतयुग’ के आखिर मे लिखा गया था ।
इस का मतलब है कि यह परम्परा कम से कम दो युग पुरानी है ।
इस पद्धति का उपयोग पुराताविक अभिलेखों में भी खूब देखने को मिलता है जिसमें तिथि और वर्ष को भूतसंख्याओं में लिखा जाता था।
उदाहरण के लिये, एक अभिलेख में तिथि लिखी है- बाण-व्योम-धराधर-इन्दु-गणिते शके --
जिसका अर्थ है १७०५ शकाब्द में। बाण = ५, व्योम = ०, धराधर = पर्वत = ७, इन्दु = चन्द्रमा = १, (संख्याओं को उल्टे क्रम में लेना है।)
सूरदास जी ने भूतसंख्याओं का उपयोग कर अत्यन्त सुन्दर प्रभाव का सृजन किया है-
“कहत कत परदेसी की बात।
मंदिर अरध अवधि बदि हमसौं , हरि अहार चलि जात।……
नखत , वेद , ग्रह , जोरि , अर्ध करि , सोई बनत अब खात।
सूरदास बस भई बिरह के , कर मींजैं पछितात।।
भूत संख्या संकेत : मंदिर अरध = पक्ष (१५ दिन), हरि अहार = मास (३० दिन), नखत = नक्षत्र = २७, वेद = ४, ग्रह = ९ आदि
यहाँ कुछ उदाहरण देखें कि किस संख्या के लिए कौन से शब्द लिये जा सकते है
0 – अभ्र, नभ, बिन्दु, जलधर, शून्य, पूर्ण
1 – भू, चन्द्र, रूप, वाक्, वदन, कु, कलि, ब्रह्मा, मुख
2 – नेत्र, अयन, हस्त, अश्विनी, चक्षु, युगल, युग्म, पक्ष, पाणि, यम ।
3 – अग्नि, काल, शरीर, राम, गुण, वह्नि, शूल, शक्ति ।
4 - अब्धि, आम्नाय, जलधि, वेद, युग, वर्ण, कृत, आश्रम ।
5 – भूत, बाण, इन्द्रिय, वायु, काम, तन्मात्र, अर्थ, पाण्डव ।
6 – ऋतु, कृत्तिका, गुहवक्त्र, रस, तर्क, दर्शन, चक्रार्ध ।
7 – अद्रि, पर्वत, अचल, तुरग, स्वर, द्वीप, मुनि, वासर ।
8 – गज, नाग, सर्प, सिद्धि, वसु ।
9 – अङ्क, दुर्गा, निधि, ग्रह, गो, छिद्र, रन्ध्र
10 – अवतार, पङ्क्ति, दिक्, दिक्पाल ।
11 – रुद्र, शिव, ईश, शम्भु ।
12 – सूर्य, मास, आदित्य, चक्र, गण, राशि
ऐसे ही इन्द्र(14), राजा(16), पुराण(18), तत्त्व(25), नक्षत्र(27), दन्त(32), देव(33), कला(64) इत्यादि के भी जान सकते हैं ।
अगर आप भूतसंख्या समझ गए तो अपनी जन्म माह ( Birth Month ) को भूतसंख्या में लिखें

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