Vशुद्धि
Vशुद्धि

@V_Shuddhi

16 Tweets 98 reads Feb 22, 2023
गाजी बाबा की मजार! और हिदुओं की मूर्खता!
मज़ार पे चढ़ावे के पाखंड को उजागर करते हुए तुलसीदास जी ने ५०० साल पहले एक प्रश्न, हिन्दू-समाज से पूछा था, जो कि आज तक अनुत्तरित है, उन्होंने पूछा था कि बहराइच में, सैय्यद सालार मसूद की मजार पर जाने से किस अंधे को आँख मिली ? किस बाँझ को
पुत्र हुआ ? और किस कोढ़ी का शरीर सुन्दर हो गया ? उसको मेरे सामने लाओ
लही आँखि कब आँधरे, बाँझ पूत कब ल्याइ।
कब कोढ़ी काया लही जग बहराइच जाइ ॥
पर आज तक एक भी ऐसा व्यक्ति सामने नहीं आया
उत्तर प्रदेश में एक ज़िला है,बहराइच
बहराइच में हिन्दूओं ने अपना सबसे मुख्य पूजा स्थल" गाजी बाबा की मजार को बना रखा है
मूर्ख हिंदू लाखों रूपये, हर वर्ष इस पीर पर चढाते है।जबकि इतिहास का जानकर हर व्यक्ति जनता है, कि महमूद गजनवी के उत्तरी भारत को १७ बार लूटने व बर्बाद करने के
कुछ वर्षों के बाद ही, उसका भांजा ‘सलार गाजी’ भारत को ‘दारूल इस्लाम’ बनाने के उद्देश्य से भारत में आया
(Qu- रान के अनुसार दर-उल-इस्लाम = 100% Mus- लिम जनसँख्या )
सैयद सालार मसूद अपनी सेना को लेकर “हिन्दुकुश” पर्वतमाला को पार करके पाकिस्तान (आज के) के पंजाब में पहुँचा,
मसूद धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए राजपूताना और मालवा पहुँचा, जहाँ राजा महिपाल तोमर से उसका मुकाबला हुआ, और उसे भी मसूद ने अपनी सैनिक ताकत से हराया।
एक तरह से यह भारत के विरुद्ध पहला जेहाद कहा जा सकता है, जहाँ कोई मुगल आक्रांता सिर्फ़ लूटने की नीयत से नहीं बल्कि बसने, राज्य करने और
is-लाम को फ़ैलाने का उद्देश्य लेकर आया था। पंजाब से लेकर उत्तरप्रदेश के गांगेय इलाके को रौंदते, लूटते, हत्यायें-बलात्कार करते सैयद सालार मसूद अयोध्या के नज़दीक स्थित बहराइच पहुँचा,
जहाँ उसका इरादा एक सेना की छावनी और राजधानी बनाने का था।
इस मोड़ पर आकर भारत के इतिहास में एक अनोखी घटना हुई, ज़ाहिर है कि इतिहास की पुस्तकों में जिसका कहीं जिक्र नहीं किया गया है ( क्यूँकि हमारी एकजुटता से उन्हें आज भी डर लगता)
इस्लामी खतरे को देखते हुए पहली बार भारत के उत्तरी इलाके के हिन्दू राजाओं ने एक विशाल गठबन्धन बनाया,
जिसमें 17 राजा सेना सहित शामिल हुए और उनकी संगठित संख्या सैयद सालार मसूद की विशाल सेना से भी ज्यादा हो गई
जैसी कि हिन्दुओ की परम्परा रही है, मसूद के पास संदेश भिजवाया कि यह पवित्र धरती हमारी है और वह अपनी सेना के साथ भारत छोड़कर चला जाये नहीं तो उसे एक भयानक युद्ध झेलना पड़ेगा
गाज़ी मसूद का जवाब भी वही आया जो कि अपेक्षित था, उसने कहा कि “इस धरती की सारी ज़मीन खुदा की है, और वह जहाँ चाहे वहाँ रह सकता है यह उसके धर्म की शिक्षा है कि वह “सभी को इस्लाम का अनुयायी बनाये और जो खुदा को नहीं मानते उन्हें काफ़िर माना जाये”
उसके बाद ऐतिहासिक बहराइच का युद्ध हुआ, जिसमें संगठित हिन्दुओं की सेना ने सैयद मसूद की सेना को धूल चटा दी।
इस भयानक युद्ध के बारे में इस्लामी विद्वान ‘शेख अब्दुर रहमान चिश्ती’ की पुस्तक ‘मीर-उल-मसूरी।’ में विस्तार से वर्णन किया गया है।
उन्होंने लिखा सन् 1033 में बहराइच युद्ध इतना भीषण था कि सैयद सालार मसूद के साथ साथ किसी भी सैनिक को जीवित नहीं जाने दिया गया, यहाँ तक कि युद्ध बंदियों को भी मार डाला गया और मसूद का समूचे भारत को इस्लामी रंग में रंगने का सपना अधूरा ही रह गया।
बहराइच का यह युद्ध 14 जून 1033 को समाप्त हुआ।
बहराइच के नज़दीक इस सैयद सालार मसूद (तथाकथित गाज़ी बाबा) की कब्र बनी। जब फ़िरोज़शाह तुगलक का शासन समूचे इलाके में पुनर्स्थापित हुआ तब वह बहराइच आया और मसूद के बारे में जानकारी पाकर प्रभावित हुआ और उसने उसकी कब्र को एक विशाल दरगाह
और गुम्बज का रूप देकर सैयद सालार मसूद को “एक धर्मात्मा”(?) के रूप में प्रचारित करना शुरु किया, एक ऐसा धर्मात्मा जो भारत में इस- लाम का सिर्फ़ प्रचार करने आया था धीरे-धीरे सभी लोगों ने इस “गाज़ी बाबा” को “पहुँचा हुआ पीर” मान लिया और उसकी दरगाह पर हर साल एक मेले का आयोजन होने लगा
जो कि आज तक जारी है
आपको भी पता है देश भर में न जाने कितनी ही मज़ारे और दरगाहें ऐसी हैं जिन पर सिर्फ़ निम्न ही नहीं उच्च वर्ग के मूर्ख हिंदू लाखों का चढ़ावा चढ़ा रहे और ख़ुद अपनी कब्र खुदवा रहे ।
तो बताइए आँखों पे पट्टी किसने बाँधी है,वो भी जानबूझकर !
तो फिर मूर्ख कौन हुआ और हमे कब तक मूर्ख बने रहने का शौक़ है!!
‘सैय्यद सालार मसूद’ की हार से तो हमे ये सबक़ लेना था की हिन्दू अगर संगठित हो जायें तो उन्हें कोई नहीं रोक सकता
पर हमने तो ख़ुद पर हमला करने वाले को ही पूजना शुरू कर दिया!
वहीं एक इतना बड़ा सच- महमूद गजनवी के एक प्रमुख रिश्तेदार को भारत की भूमि पर समाप्त किया गया, उसके भारत को ‘दारूल इस्लाम’ बनाने के सपने को मिट्टी में मिला दिया गया- ऐसी घटनाएँ इतिहास की पुस्तकों में सिरे से ही क्यूँ ग़ायब हैं ?
कभी इस ‘क्यूँ’ के पीछे की साज़िश को आपने सोचा है?

Loading suggestions...