Gems Of Buddhism
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@GemsOfBuddhism

5 Tweets 24 reads May 31, 2023
गौतम बुद्ध असुर या अवतार
बलि ने पृथ्वी पर एक बहुत माया प्रवर्तक महान असुर को भेजा, जो शाक्यसिंह के मार्ग से विख्यात हुआ। उसे गौतम आचार्य भी कहते हैं। वो दैत्यों के पक्ष को बढ़ाने वाला था। उसे सभी तीर्थो में अपनी संस्था स्थापित की।
उसके मतानुयाई चोटी-जनेऊ से हीन
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#Buddhism
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एवं नीच गति को प्राप्त होकर वर्णशंकर हो गए। दस करोड़ आर्य बौद्धमार्गी बन गए।
इस पुराणकार ने बौद्धों को दैत्य पक्ष को बढ़ाने वाला ठीक ही लिखा हैं। वो वस्तुत: कपिलवस्तु का सिद्धार्थ बनकर लोगो को भ्रम में डालकर वैदिक मान्यताओं के विरोधी थे।
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जब बौद्ध मत का देश में विरोध होने लगा तो बौद्धों ने पुराणों की अवतारसूची में बुद्ध जी का नाम भी घुसा कर उन्हें पौराणिक अवतार बना दिया, ताकि विरोध शांत हो जाये व पौराणिक भी उन्हें मान्यता दे देवे।
उस समय आजकल की तरह प्रेस नहीं होते थे। अत: मिलावटी नाम का पता आसानी से नहीं लग
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पाता था और आज भी वही मिलावटी नाम बुद्ध का अवतारों की सूची में भागवत पुराण के अंदर लिखा चला आ रहा हैं।
किसी ने सोचा तक भी नहीं की दैत्य पक्ष समर्थक, वेद विरोधी, नास्तिक, महात्मा बुद्ध परमात्मा का बौद्ध अवतार कैसे बन सकता हैं? जबकि यह अवतार वेदमत समर्थक आस्तिक होने चाहिए।
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कोई भी ईश्वर भक्त ब्राह्मण, नास्तिक मत प्रवर्तक बुद्ध जी को ईश्वरावतार लिख ही नहीं सकता था। यह सिद्धांत का प्रश्न हैं
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