मधुमेह (डायबिटिज) का सरल व प्रभावी आयुर्वेदिक उपचार:
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इस रोग की आजकल बहुतायत हो गई है। इस रोग में शर्करा (Sugar) बिना किसी रासायनिक परिवर्तन के मूत्र के साथ बाहर निकलती रहती है।
इस रोग में शक्कर पच नहीं पाती है तथा रोगी को मूत्र अधिक आता है बार-बार मूत्र त्याग के कारण प्यास भी अधिक लगती है, मुख सूखता रहता है, रोगी कमजोर वे कृषकाय हो जाता है।
मधुमेह की चिकित्सा अत्यन्त ही सरल है और अत्यन्त कठिन भी जो रोगी संयमी हैं, जो अपनी जीभ को वश में रखते हैं उनके लिए इस रोग से मुक्ति मात्र बच्चों का खेल है और जो असंयमी, पेटू है, उन्हें उनके लिए इसकी चिकित्सा असम्भव है।
सर्वप्रथन हर किसी को यह भली प्रकार समक्ष लेना चाहिए कि (We Eat to live But We donot live to eat) अर्थात हम जीने के लिए खाते हैं, खाने के लिए नहीं जीते हैं ।
मधुमेह रोग के साथ-साथ मधुमेह के रोगी को जो व्रण, पाण्डु, फोड़े, घाव, मोटापा, इत्यादि जो भी सहायक हों उन सबके लिए अलग से किसी चिकित्सा अथवा चिन्ता की आवश्यकता नहीं है ।
मधुमेह के दूर होते ही वह सब स्वयं नष्ट हो जायेंगे जैसे जड़ काट देने पर किसी पेड़ के फूल और पत्ते आदि स्वयं ही नष्ट हो जाते हैं ।
◇ मधुमेह के लक्षण :
• इस रोग के प्रारम्भ होने से पूर्व खूब भूख लगती है किन्तु धीरे-धीरे भूख कम होती जाती है।
• शरीर की त्वचा शुष्क और स्पर्श करने से रूखी, खुरदरी महसूस होती है।
• इस रोग के प्रारम्भ होने से पूर्व खूब भूख लगती है किन्तु धीरे-धीरे भूख कम होती जाती है।
• शरीर की त्वचा शुष्क और स्पर्श करने से रूखी, खुरदरी महसूस होती है।
• मसूढे फूल जाते हैं, उनसे रक्त निकलता है, कब्ज, अत्यधिक प्यास, पेशाब अधिक आना, मूत्र का आपेक्षित गुरुतत्व 1060 से भी ऊपर हो जाना, पेशाब में शर्करा निकलना, शरीर में खुजलाहट, शरीर स्क्ष होना, दुर्बलता, शरीरिक भार में कमी इत्यादि प्रधान लक्षण है।
• इसके बाद शरीर धीरे-धीरे क्षीण होता जाता है पैर में शोथ (सूजन) हो जाता है।
• स्त्रियों को यह रोग होने पर उनकी योनि में खुजली उत्पन्न हो जाती है ।
• बीमारी बढ़ने के साथ ही साथ फेफड़े भी खराब हो जाते हैं और अन्त में कारब- कल (फोड़ा) होकर रोगी की मृत्यु हो जाते है।
• स्त्रियों को यह रोग होने पर उनकी योनि में खुजली उत्पन्न हो जाती है ।
• बीमारी बढ़ने के साथ ही साथ फेफड़े भी खराब हो जाते हैं और अन्त में कारब- कल (फोड़ा) होकर रोगी की मृत्यु हो जाते है।
• यह रोग स्त्रियों की अपेक्षा पुरुषों को तथा निर्धनों की अपेक्षा धनवानों को, मध्य आयु वालों तथा वृद्धों को (40 से 60) वर्ष वालों को अधिक होता है।
• sugar hone ke karan - अत्यधिक मानसिक परिश्रम करना, उत्तेजना, चोट एवं कुछ संक्रामक रोग जैसे- डिफ्थीरिया, मलेरिया, इन्फ्लूएन्जा आदि के कारण भी यह रोग हो जाया करता है।
• अधिक मद्यपान, या शर्करा युक्त भोजनों तथा यकृत और क्लोम ग्रन्थियों की कार्य प्रणाली में अवरोध उत्पन्न हो जाना भी कारण है।
◇ मधुमेह (डायबिटिज) का सरल व असरकारक ईलाज :
• सामग्री: 100 ग्राम मेथी दाना, 100 ग्राम तेज पत्र, 150 ग्राम जामुन की गुठली और 250 ग्राम बेल पत्र
• सामग्री: 100 ग्राम मेथी दाना, 100 ग्राम तेज पत्र, 150 ग्राम जामुन की गुठली और 250 ग्राम बेल पत्र
बनाने की विधि:: इन सब को अलग अलग धूप में सुखाकर इन्हे पत्थर पर पीस ले और बाद में सबको मिलाले, इसका एक चम्मच सुबह नाश्ता करने से पहले 1 गिलास गर्म पानी से ले ले और एक चम्मच रात को खाना खाने से एक घण्टे पहले, इस दवा को ३ महिने लगातार लेने से मधुमेह (डायबिटिज) खत्म हो जाती है,
• इसके साथ रोजाना योग प्राणायाम जरूर करे
• साथ साथ त्रिफला का सेवन : अनुपात:- 1:2:3=1 (हरड ) + 2 (बहेड़ा ) + 3 ( आंवला ) मतलब जैसे आपको 100 ग्राम त्रिफला बनाना है तो :: 20 ग्राम हरड +40 ग्राम बहेडा+ 60 ग्राम आंवला अगर साबुत मिले तो तीनो को पीस लेना।
• साथ साथ त्रिफला का सेवन : अनुपात:- 1:2:3=1 (हरड ) + 2 (बहेड़ा ) + 3 ( आंवला ) मतलब जैसे आपको 100 ग्राम त्रिफला बनाना है तो :: 20 ग्राम हरड +40 ग्राम बहेडा+ 60 ग्राम आंवला अगर साबुत मिले तो तीनो को पीस लेना।
और अगर चूर्ण मिल जाए तो मिला लेना सबसे पहले हरड़ 100 ग्राम, फिर बहेड़ा 200 ग्राम और अंत आंवला 300 ग्राम !!
सीधा पाउडर लिया नहीं जाता तो उसके लिए क्या करें ?? आधे से आधा गिलास पानी को गर्म करे उसमे पाउडर मिलाकर अच्छे से हिलाएँ !! वो सिरप की तरह बन जाएगा ! उसे आप आसानी से एक दम पी सकते है ! उसके बाद एक आधा गिलास अकेला गर्म पानी पी लीजिये
◇ मधुमेह (डायबिटीज) में खान-पान और परहेज:
1. इनका सेवन किया जा सकता है इस रोग में घी, मक्खन, पनीर, ताजा साग-सब्जियाँ, मूली, पालक, परवल, लौकी, करेला, बैगन, आदि तथा फल आम, अनार, सेब, जामुन, संतरा, मौसमी आदि सेवन करना तथा थोड़े नमक के साथ कागजो नीबू का रस पानी मिलाकर पीना पथ्य है।
1. इनका सेवन किया जा सकता है इस रोग में घी, मक्खन, पनीर, ताजा साग-सब्जियाँ, मूली, पालक, परवल, लौकी, करेला, बैगन, आदि तथा फल आम, अनार, सेब, जामुन, संतरा, मौसमी आदि सेवन करना तथा थोड़े नमक के साथ कागजो नीबू का रस पानी मिलाकर पीना पथ्य है।
इस रोग में तेल और मिर्च मसाला रहित करेला की तरकारी विशेषरूप से खाते रहना रोगी के लिए हितकर है।
2. शुगर में क्या नहीं खाना चाहिए : नये चावल, शीतल जल, बरफ, गरम और मीठे पदार्थ, धूप में घूमना-फिरना, परिश्रम, मैदा, चीनी, गुड़, माँस, मछली, तेल का सेवन तथा मैथुन करना अपथ्य है।
2. शुगर में क्या नहीं खाना चाहिए : नये चावल, शीतल जल, बरफ, गरम और मीठे पदार्थ, धूप में घूमना-फिरना, परिश्रम, मैदा, चीनी, गुड़, माँस, मछली, तेल का सेवन तथा मैथुन करना अपथ्य है।
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