Vशुद्धि
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@V_Shuddhi

14 Tweets 37 reads May 12, 2023
आसिफ़ा बीबी ने अपने Religion की इन खूबियों को तो बताया ही नहीं ?
शाहजहाँ ने अपनी पत्नी मुमताज के मरने के बाद अपनी बेटी जहाँनारा को अपनी पत्नी बनाया! क्या आपने इस्लाम की इन खूबियों के बारे में कभी इतिहास में कहीं पढ़ा?
नहीं!
#TheKeralaStory
क्यूँकि ये अपने धर्म की इन घिनौनी सच्चाईयों को कभी नहीं बतायेंगे
देखिए कैसे कुछ अति विशिष्ट श्रेणी के इतिहासकारों ने हवस में डूबे मुगलों को प्रेम का मसीहा बताया जिसमे से एक शाहजहाँ को प्रेम की मिसाल के रूप पेश किया जाता रहा है और किया भी क्यों न जाए,
आठ हजार औरतों को अपने हरम में रखने वाला अगर किसी एक में ज्यादा रुचि दिखाए तो इनके हिसाब से उसे प्यार ही कहा जाएगा।
आप यह जानकर हैरान हो जाएँगे कि मुमताज का नाम मुमताज महल था ही नहीं, बल्कि उसका असली नाम ‘अर्जुमंद-बानो-बेगम’ था और तो और
जिस शाहजहाँ और मुमताज के प्यार की इतनी डींगे हाँकी जाती है वो शाहजहाँ की ना तो पहली पत्नी थी ना ही आखिरी ।
मुमताज शाहजहाँ की सात बीबियों में चौथी थी।इसका मतलब है कि शाहजहाँ ने मुमताज से पहले 3 शादियाँ कर रखी थी और मुमताज से शादी करने के बाद भी उसका मन नहीं भरा
उसके बाद भी उसने 3 शादियाँ और की, यहाँ तक कि मुमताज के मरने के एक हफ्ते के अन्दर ही उसकी बहन फरजाना से शादी कर ली थी। जिसे उसने र-खैल बना कर रखा था,
अगर शाहजहाँ को मुमताज से इतना ही प्यार था तो मुमताज से शादी के बाद भी शाहजहाँ ने 3 और शादियाँ क्यों की?
शाहजहाँ की सातों बीबियों में सबसे सुन्दर मुमताज नहीं बल्कि इशरत बानो थी, जो कि उसकी पहली बीबी थी। शाहजहाँ से शादी करते समय मुमताज कोई कुँवारी लड़की नहीं थी बल्कि वो भी शादीशुदा थी और उसका शौहर शाहजहाँ की सेना में सूबेदार था जिसका नाम ‘शेर अफगान खान’ था।
शाहजहाँ ने शेर अफगान खान की हत्या कर मुमताज से शादी की थी।
गौर करने लायक बात यह भी है कि 38 वर्षीय मुमताज की मौत कोई बीमारी या एक्सीडेंट से नहीं बल्कि चौदहवें बच्चे को जन्म देने के दौरान अत्यधिक कमजोरी के कारण हुई थी यानी शाहजहाँ ने उसे बच्चे पैदा करने की मशीन ही नहीं
बल्कि फैक्ट्री बनाकर मार डाला । शाहजहाँ कामुकता के लिए इतना कुख्यात था कि कई इतिहासकारों ने उसे उसकी अपनी सगी बेटी जहाँआरा के साथ संबंध बनाने का दोषी तक कहा
शाहजहाँ और मुमताज की बड़ी बेटी जहाँआरा बिल्कुल अपनी माँ की तरह लगती थी इसीलिए मुमताज की मृत्यु के बाद उसकी
याद में शाहजहाँ ने अपनी ही बेटी जहाँआरा से शारीरिक संबंध बनाना शुरू कर दिया था। जहाँआरा को शाहजहाँ इतना प्यार करता था कि उसने उसका निकाह तक होने न दिया।
बाप-बेटी के इस घिनौने संबंध को देखकर जब महल में चर्चा शुरू हुई, तो मुल्ला-मौलवियों की एक बैठक बुलाई गई और
उन्होंने इस पाप को जायज ठहराने के लिए एक हदीस का उद्धरण दिया और कहा – “माली को अपने द्वारा लगाए पेड़ का फल खाने का हक है।”
आप सोचिए कि जिस रिलिजन में औरत को इस्तेमाल ही किया जाता बल्कि उसे इस्तेमाल करने के हक़ में दलीलें भी दी जाती हैं वहाँ क्या हाल होगा औरतों का सोच के भी रूह
काँप जाती है
जहाँ पुरुषों के ज़िंदा रहने से लेकर मारने तक भी 72 हूरों का प्रावधान है पर औरत को कोई हक़ नहीं ! कहा जाता है कि एक बार जहाँआरा जब अपने एक आशिक के साथ इश्क लड़ा रही थी तो शाहजहाँ आ गया जिससे डरकर वह हरम के तंदूर में छिप गया, शाहजहाँ ने तंदूर में आग लगवा दी
और उसे जिन्दा जला दिया।
यहाँ आदमी अपनी बेटियों के साथ खुलेतौर पे सो भी सकते पर इनकी औरतें काले लिबास में एक बुत की तरह ढकी होनी चाहिए
ऐसे हवस के दरिंदो को वामपंथीइतिहासकारों ने प्रेम की मिसाल के रूप में देश के सामने पेश किया ये है इनकी कलाकारी
और आसिफ़ा और इन जैसी लड़कियाँ अपने रिलिजन की गंदगी साफ़ करने के बजाय सनातन धर्म पे प्रश्न चिन्ह लगाते और हमारे बच्चे अपने ही धर्म की जानकारी न होने की वजह से शालिनी से फ़ातिमा बा बन जाते
सनातनी भाई बहनों अगर आप को किसी प्रश्न का उत्तर ना मालूम हो तो
इनकी गंदगी में विश्वास करने से पहले कृपया अपने बड़ों या जानकारों से अपने धर्म और उनके पीछे के कारणों को जाने, याद रखें!! सनातन ही सत्य और एक मात्र धर्म है 🙏🏻🚩

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