शिवशर्वाणी
शिवशर्वाणी

@know_ur_dharma

5 Tweets 69 reads May 21, 2023
#श्रृंखला
हमारा शरीर पांच तत्वों (पृथ्वी, जल, आकाश, अग्नि और वायु) से बना होता है,जबकि देवताओं का शरीर पांच तत्वों से नहीं बना होता, उनमे पृथ्वी और जल तत्व नहीं होते। मध्यम स्तर के देवताओं का शरीर तीन तत्वों (आकाश, अग्नि और वायु) से तथा....
उत्तम स्तर के देवता का शरीर दो तत्व तेज (अग्नि)और आकाश से बना हुआ होता है इसलिए देव शरीर तेजोमय और आनंदमय होते हैं।चूंकि हमारा शरीर पांच तत्वों से बना होता है इसलिए अन्न,जल,वायु,प्रकाश(अग्नि)और आकाश तत्व की हमें जरुरत होती है,जो हम अन्न और जल आदि के द्वारा प्राप्त करते हैं।
लेकिन देवता वायु के रूप में गंध, तेज के रूप में प्रकाश और आकाश के रूप में शब्द को ग्रहण करते हैं।
यानी देवता गंध, प्रकाश और शब्द के द्वारा भोग ग्रहण करते हैं। जिसका विधान पूजा पद्धति में होता है। जैसे जो हम अन्न का भोग लगाते हैं, देवता उस अन्न की सुगंध को ग्रहण करते हैं,
उसी से तृप्ति हो जाती है, जो पुष्प और धूप लगाते है, उसकी सुगंध को भी देवता भोग के रूप में ग्रहण करते हैं। जो हम दीपक जलाते हैं, उससे देवता प्रकाश तत्व को ग्रहण करते हैं। आरती का विधान भी उसी के लिए है, जो हम मन्त्र पाठ करते हैं,
या जो शंख या घंटी, घड़ियाल बजाते हैं, उससे देवता गण आकाश तत्व के रूप में ग्रहण करते हैं। जिस प्रकृति का देवता हों, उस प्रकृति का भोग लगाने का विधान है।
Credit: @/sambhashan_in di😊🙏❣

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