प्राचीन भारत में मंदिर बनाने से पहले जगह और दिशा का विशेष महत्व होता था, मंदिरो का निर्माण अलग अलग शैलियों के हिसाब से हुआ करता था,पर अधिकतर मंदिर ऐसी पद्धति से बनते थे,जिसमे हर एक कुण्डलिनी चक्र के हिसाब से गर्भगृह, मंडप, प्रस्थान, परिक्रमा आदि का निर्माण होता था और
जिस चक्र के हिसाब से उस जगह का निर्माण होता था वहा व्यक्ति को चलकर या बैठकर उस चक्र को जागृत करने में सहयोग मिलता था!
यही कारण होता है की प्राचीन मंदिरो में आज भी जाने पर व्यक्ति मानसिक रूप से शांति और संतुष्टि का अनुभव होता है!
#thursdayvibes
यही कारण होता है की प्राचीन मंदिरो में आज भी जाने पर व्यक्ति मानसिक रूप से शांति और संतुष्टि का अनुभव होता है!
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