तृप्त ...🖤(कृष्ण वंशज)
तृप्त ...🖤(कृष्ण वंशज)

@yaduvanshi32

9 Tweets 8 reads Aug 15, 2023
स्त्रियों की सहनशक्ति पुरुषों से कई गुनी ज्यादा है।
पुरुष की सहनशक्ति न के बराबर है।
लेकिन पुरुष एक ही शक्ति का हिसाब लगाता रहता है,
वह है मसल्स की।
क्योंकि वह बड़ा पत्थर उठा लेता है,
इसलिए वह सोचता रहा है कि मैं शक्तिशाली हूँ।
लेकिन बड़ा पत्थर अकेला आयाम
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अगर शक्ति का होता तो ठीक है,
सहनशीलता भी बड़ी शक्ति है -
जीवन के दुखों को झेल जाना।
स्त्रियाँ लड़कियाँ पहले बोलना शुरू करती हैं।
बुद्धिमत्ता लड़कियों में पहले प्रकट होती है।
लड़कियाँ ज्यादा तेज होती हैं।
विश्वविद्यालयों में भी प्रतिस्पर्धा में लड़कियाँ आगे होती हैं।
२/३
जो भी स्त्री आक्रामक होती है वह आकर्षक नहीं होती है।
अगर कोई स्त्री हमारे पीछे पड़ जाये और
प्रेम का निवेदन करने लगे तो हम घबड़ा जायेंगे हम भागेंगे। क्योंकि वह स्त्री पुरुष जैसा व्यवहार कर रही है,
स्त्रैण नहीं है।
स्त्री का स्त्रैण होना, उसका माधुर्य इसी में है कि
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वह सिर्फ प्रतीक्षा करती है।
वह हमें सब तरफ से घेर लेती,
लेकिन हमें पता भी नहीं चलता।
उसकी ज जँजीरें बहुत सूक्ष्म हैं,
वे दिखायी भी नहीं पड़तीं।
वह बड़े पतले धागों से, सूक्ष्म धागों से
हमें सब तरफ से बाँध लेती है,
लेकिन उसका बन्धन कहीं दिखायी भी नहीं पड़ता।
४/५
स्त्री अपने को नीचे रखती है।
लोग गलत सोचते हैं कि
पुरुषों ने स्त्रियों को दासी बना लिया।
नहीं, स्त्री दासी बनने की कला है।
मगर हमें पता नहीं, उसकी कला बड़ी महत्वपूर्ण है।
और लाओत्से उसी कला का उद्घाटन कर रहा है।
कोई पुरुष किसी स्त्री को दासी नहीं बनाता।
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दुनिया के किसी भी कोने में जब भी कोई स्त्री
किसी पुरुष के प्रेम में पड़ती है,
तत्क्षण अपने को दासी बना लेती है, ‍
क्योंकि दासी होना ही गहरी मालकियत है।
वह जीवन का राज समझती है।
स्त्री अपने को नीचे रखती है,
चरणों में रखती है।
और हमने देखा है कि
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जब भी कोई स्त्री अपने को हमारे चरणों में रख देती है,
तब अचानक हमारे सिर पर ताज की तरह बैठ जाती है।
रखती चरणों में है, पहुँच जाती है बहुत गहरे, बहुत ऊपर।
हम चौबीस घण्टे उसी का चिन्तन करने लगते हैं।
छोड़ देती है अपने को हमा चरणों में,
हमारी छाया बन जाती है।
और हमें1
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पता भी नहीं चलता कि
छाया हमें चलाने लगती है,
छाया के इशारे से हम चलने लगते हैं।
स्त्री कभी यह भी नहीं कहती सीधा कि
यह करो, लेकिन वह जो चाहती है करवा लेती है।
वह कभी नहीं कहती कि
यह ऐसा ही हो, लेकिन वह जैसा चाहती है
वैसा करवा लेती है।
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लाओत्से यह कह रहा है कि उसकी शक्ति बड़ी है।
और उसकी शक्ति क्या है ?
क्योंकि वह दासी है।
शक्ति उसकी यह है कि वह छाया हो गयी है।
बड़े से बड़े शक्तिशाली पुरुष स्त्री के प्रेम में पड़ जाते हैं,
और एकदम अशक्त हो जाते हैं।
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