𝗞𝗿𝗶𝘀𝗵𝗻𝗮𝗣𝗿𝗲𝗲𝘁𝗶
𝗞𝗿𝗶𝘀𝗵𝗻𝗮𝗣𝗿𝗲𝗲𝘁𝗶

@Krishnavallabhi

8 Tweets 13 reads Aug 21, 2023
नाग पंचमी का इतिहास
1. सर्प यज्ञ का समाप्ति दिन
सर्पयज्ञ करनेवाले जनमेजय राजा को आस्तिक नामक ऋषि ने प्रसन्न कर लिया था । जनमेजय ने जब उनसे वर मांगने के लिए कहा, तो उन्होंने सर्पयज्ञ रोकने का वर मांगा एवं जिस दिन जनमेजय ने सर्पयज्ञ रोका, उस दिन पंचमी थी
#नागपंचमी
#NagPanchami
2. कालियामर्दन की तिथि :
श्रीकृष्ण ने यमुना के कुंड में कालिया नाग का मर्दन किया । वह तिथि श्रावण शुक्ल पक्ष पंचमी थी ।
3. पांच युगों से पूर्व सत्येश्वरी नामक एक कनिष्ठ देवी थी । सत्येश्वर उसका भाई था । सत्येश्वर की मृत्यु नागपंचमी से एक दिन पूर्व हो गई थी । सत्येश्वरी को उसका भाई नाग के रूप में दिखाई दिया । तब उसने उस नागरूप को अपना भाई माना ।
उस समय नागदेवता ने वचन दिया कि, जो बहन मेरी पूजा भाई के रूप में करेगी, मैं उसकी रक्षा करूंगा । इसलिए प्रत्येक स्त्री उस दिन नाग की पूजा कर नागपंचमी मनाती है ।
4. नाग परमेश्वर के अवतारों से अर्थात सगुण रूप से संबंधित है । सागरमंथन के लिए भगवान विष्णु के कूर्मावतार को वासुकी नाग ने सहायता की थी । श्रीविष्णु के तमोगुण से शेषनाग की उत्पत्ति हुई । भगवान शंकर की देह पर नौ नाग हैं इत्यादि ।
इसलिए नागपंचमी के दिन नाग का पूजन करना अर्थात नौ नागों के संघ के प्रतीक की पूजा करना है ।
5. सागरमंथन के समय जब भगवान शिव ने हलाहल विष प्राशन किया तब उनकी सहायता के लिए नौ नाग आए । उन्होंने भी हलाहल का अंश प्राशन किया । इससे शिव नागों पर प्रसन्न हुए । नागों ने समस्त सृष्टि की रक्षा के लिए दिए योगदान के लिए ‘मानव सदैव नागों के प्रति कृतज्ञ रहकर उनकी पूजा करेगा’,
ऐसा आशिर्वाद नागाें को दिया । तब से नौ नाग मानव को पूजनीय हुए । नौ नाग नौ प्रकार के पवित्रक (चैतन्य तरंगें) ग्रहण करनेवाले घटक है ।

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