जवान राजेश यादव आतंकवादियों की गोली से शहीद हुए और उन्हें उनके 4 साल के बेटे ने मुखाग्नि दी. इस बारे में शुभम शुक्ला ने ट्वीट किया. उस ट्वीट पर राजेश यादव के लिए मां की गाली देते हुए एक कॉमेंट आया - यादव है मा***द, मर गया अच्छा है. ये कॉमेंट करने वाले के हैंडल
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में संदीप लिखा है. ट्विटर नेम 'देशद्रोही की फाड़ देंगे' है. लोगों ने खोज निकाला कि इस आदमी ने एक बार एयरटेल से इंटरनेट की शिकायत करते हुए एक रजिस्टर्ड फोन नंबर डाला था, जो कि शालू/शैलेश मिश्रा के नाम है और पुलिस से कार्रवाई की मांग करने लगे. फिर इस आदमी ने अपने ट्वीट के लिए
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माफी मांगते हुए कहा कि ट्वीट करते वक्त उसका दिमाग सही नहीं था और वो लोगों से अपील करने लगा कि वो फोन नंबर पब्लिक न करें क्योंकि वो किसी और का नंबर है, जिनके इंटरनेट में दिक्कत की शिकायत उसने एयरटेल से की थी. सोचिए, देश के लिए अपनी जान दे देने वाले राजेश भी अपनी जाति की वजह से
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इस आदमी की नफरत से नहीं बच पाए, तो किसी आम आदमी के लिए इसकी कैसी मानसिकता होगी! और बात केवल इसी आदमी की नहीं है. मिस्टर सिन्हा जैसे लोग ये मानते हैं कि ये हैंडल किसी मुस्लिम का है. मिस्टर सिन्हा ने लिखा कि ये अब्दुल (मुस्लिम) का फेक अकाउंट है और इन दिनों ऐसा बहुत हो रहा है.
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जबकि उस संदीप नाम वाले हैंडल के ट्वीट देखकर कोई भी समझ सकता है कि वो किस तरह का हैंडल है. उसके ज्यादा ट्वीट-रीट्वीट ब्राह्मणों के पक्ष में हैं और दूसरों खासकर दलितों-पिछड़ों-मुस्लिमों के लिए घृणा से भरे हुए हैं. यहां तक कि पहले उसने एक ट्वीट में खुद को ब्राह्मण बताते हुए
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किसी परशुराम आर्मी से मदद मांगते हुए कहा था कि वो मुस्लिमों के बीच में फंसा ब्राह्मण है. इस पर भी मिस्टर सिन्हा जैसे लोग बताते हैं कि वो किसी मुस्लिम का फेक अकाउंट है और इस तरह न केवल जाति के आधार पर नफरत को नकारते हैं, बल्कि मुस्लिमों के लिए नफरत भी फैलाते हैं.
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