कोई ऐसा भक्त नही होगा जो हनुमान चालीसा नही पढ़ता होगा
🔺हनुमान चालीसा सिद्ध कैसे होती है?
🔺हनुमान चालीसा कार्य कैसे करती है?
🔺हनुमान चालीसा एक राम बाण उपाय कैसे है ?
संपूर्ण जानकारी के लिए #thread पढ़े
🔺हनुमान चालीसा सिद्ध कैसे होती है?
🔺हनुमान चालीसा कार्य कैसे करती है?
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हनुमान चालीसा एक विलक्षण साधना क्रम है जिसमे कई सिद्धो की शक्ति कार्य करती है, यह चालीसा अनंत शक्तियों से सम्प्यन है। भारतीय आगम तथा निगम में स्तोत्र का एक महत्वपूर्ण स्थान है। सामान्य रूप से स्तोत्र की व्याख्या कुछ इस प्रकार की जा सकती है की स्तोत्र विशेष शब्दों का समूह है जिसके माध्यम से इष्ट की अभ्यर्थना की जाती है।शिवतांडव स्तोत्र हो या सिद्ध कुंजिका, सभी अपने आप में कई कई गोपनीय प्रक्रिया तथा साधनाओं को अपने आप में समाहित किये हुए है। कई स्तोत्र, कवच, सहस्त्रनाम, खडगमाल आदि शिव या शक्ति के श्रीमुख से उच्चारित हुए है जो की स्वयं सिद्ध है ऐसे ही हनुमान चालीसा स्वयं सिद्ध है जो स्वयं महादेव का आशीर्वाद है
अगर सूक्ष्म रुप से अध्ययन किया जाए तो हनुमान जी के मूल शिव स्वरुप है कानन कुंडल, संकर सुवन, तुम्हारो मन्त्र, आपन तेज, गुरुदेव की नाइ, अष्ट सिद्धि आदि विविध शब्द के बारे में साधक खुद ही अध्ययन कर विविध पदों के गूढार्थ समझने की कोशिश करे तो कई प्रकार के रहस्य साधक के सामने उजागर हो सकते है।
हनुमान चालीसा को सिद्ध कैसे कहा गया है ?
🔺जो सत् बार पाठ करे कोई। छूटही बंदी महासुख होई ।।
जो हनुमान चालीसा का 108 ( 100 + 8 हवन के = 108 ) बार पाठ कर लेता है तो बंधन से मुक्त होता है तथा महासुख को प्राप्त होता है। किंतु यह सहज ही संभव नहीं होता है, भौतिक अर्थ इसका भले ही कुछ और हो किंतु आध्यात्मिक रूप से यहाँ पर बंधन का अर्थ आतंरिक तथा शारीरिक दोनों बंधन से है। तथा महासुख अर्थात शांत चित की प्राप्ति होना है।कोई भी स्थिति की प्राप्ति के लिए साधक को एक निश्चित प्रक्रिया को करना अनिवार्य है क्योंकी एक निश्चित प्रक्रिया ही एक निश्चित परिणाम की प्राप्ति को संभव बना सकती है। हनुमान चालीसा का यह प्रयोग सकाम प्रयोग तथा निष्काम प्रकार दोनों रूप में होता है। इसलिए साधक को अनुष्ठान करने से पूर्व अपनी कामना का संकल्य लेना आवश्यक है। अगर कोई विशेष इच्छा के लिए प्रयोग किया जा रहा हो तो साधक को संकल्प लेना चाहिए की -
संकल्प कैसे ले ?
🔺मैं अमुक नाम का साधक यह प्रयोग कार्य(इच्छा पूर्ति) के लिए कर रहा हु, भगवान हनुमान मुझे इस हेतु सफलता के लिए शक्ति तथा आशीर्वाद प्रदान करे ।।।
अगर सूक्ष्म रुप से अध्ययन किया जाए तो हनुमान जी के मूल शिव स्वरुप है कानन कुंडल, संकर सुवन, तुम्हारो मन्त्र, आपन तेज, गुरुदेव की नाइ, अष्ट सिद्धि आदि विविध शब्द के बारे में साधक खुद ही अध्ययन कर विविध पदों के गूढार्थ समझने की कोशिश करे तो कई प्रकार के रहस्य साधक के सामने उजागर हो सकते है।
हनुमान चालीसा को सिद्ध कैसे कहा गया है ?
🔺जो सत् बार पाठ करे कोई। छूटही बंदी महासुख होई ।।
जो हनुमान चालीसा का 108 ( 100 + 8 हवन के = 108 ) बार पाठ कर लेता है तो बंधन से मुक्त होता है तथा महासुख को प्राप्त होता है। किंतु यह सहज ही संभव नहीं होता है, भौतिक अर्थ इसका भले ही कुछ और हो किंतु आध्यात्मिक रूप से यहाँ पर बंधन का अर्थ आतंरिक तथा शारीरिक दोनों बंधन से है। तथा महासुख अर्थात शांत चित की प्राप्ति होना है।कोई भी स्थिति की प्राप्ति के लिए साधक को एक निश्चित प्रक्रिया को करना अनिवार्य है क्योंकी एक निश्चित प्रक्रिया ही एक निश्चित परिणाम की प्राप्ति को संभव बना सकती है। हनुमान चालीसा का यह प्रयोग सकाम प्रयोग तथा निष्काम प्रकार दोनों रूप में होता है। इसलिए साधक को अनुष्ठान करने से पूर्व अपनी कामना का संकल्य लेना आवश्यक है। अगर कोई विशेष इच्छा के लिए प्रयोग किया जा रहा हो तो साधक को संकल्प लेना चाहिए की -
संकल्प कैसे ले ?
🔺मैं अमुक नाम का साधक यह प्रयोग कार्य(इच्छा पूर्ति) के लिए कर रहा हु, भगवान हनुमान मुझे इस हेतु सफलता के लिए शक्ति तथा आशीर्वाद प्रदान करे ।।।
अगर साधक निष्काम भाव से यह प्रयोग कर रहा है तो संकल्प लेना आवश्यक नहीं है। साधक अगर सकाम रूप से साधना कर रहा है तो साधक को अपने सामने भगवान हनुमान का वीर भाव से युक्त चित्र स्थापित करना चाहिए। अर्थात जिसमे वह पहाड़ को उठा कर ले जा रहे हो या असुरों का नाश कर रहे हो। किंतु अगर निष्काम साधना करनी हो तो साधक को अपने सामने दास भाव युक्त हनुमान का चित्र स्थापित करना चाहिए अर्थात जिसमे वह ध्यान मग्न हो या फिर श्रीराम के चरणों में बैठे हुए हो।
साधक को यह क्रिया एकांत में करना चाहिए, अगर साधक अपने कमरे में यह क्रिया कर रहा हो उस। समय उसके साथ कोई और दूसरा व्यक्ति नहीं होना चाहिए। शुद्ध चरित्र , शुद्ध भाव, शुद्ध शरीर होना चाहिए , उचित होगा की किसी एकांत कमरे या निर्जन स्थान, मन्दिर आदि का आश्रय लेकर साधना की जाय। साधिका हनुमान साधना या प्रयोग सम्प्यन कर सकती है। रजस्वला समय में यह प्रयोग या अन्य कोई भी साधना नहीं की जा सकती है। साधक साधिकाओं को यह प्रयोग करने से एक दिन पूर्व, प्रयोग के दिन तथा प्रयोग के दूसरे दिन अर्थात कुल 3 दिन ब्रह्मचर्य पालन करना चाहिए।
• सकाम उपासना में वस्त्र लाल रहे निष्काम में भगवे रंग के वस्त्रों का प्रयोग होता है। यदि सम्भव न हो सके तो केवल लाल वस्त्र का ही दोनों कर्मों में प्रयोग करे।
• दोनों ही कार्य में दिशा उत्तर रहे।
• साधक को भोग में गुड़ तथा उबले हुए चने, एक रोट जोकि साधक ने स्वयं बनायीं हो, अर्पित करने चाहिए।
• कोई भी फल अर्पित किया जा सकता है। खासकर के केले व जंगली फल।
• साधक दीयक तेल या गाय के घी का लगा सकता है।
• साधक को आक के पुष्य या लाल रंग के पुष्य समर्पित करने चाहिए।
• यह प्रयोग साधक किसी भी मंगलवार की रात्रि वैदिक में प्रांत काल अगर समय ना हो तो समय रात्रि 10 बजे के बाद का चयन करे।
• सर्व प्रथम साधक शुद्ध हो कर वस्त्र धारण कर के लाल आसान पर बैठ जाये।
• साधक अपने पास ही आक के 108 पुष्य रख ले।
• अगर किसी भी तरह से यह संभव न हो तो साधक कोई भी लाल रंग के 108 पुष्य अपने पास रख ले।
• अपने सामने किसी पूजा स्थान में लाल वस्त्र बिछा कर उस पर हनुमानजी का चित्र या यन्त्र या विग्रह को स्थापित करे।
• फिर उनके सामने तेल या घी का दीपक जलाये।
• साधक गुरु पूजन गुरु मंत्र का जाप करके गणपति जी से कार्य सिद्धि हेतु प्रार्थना करे और श्री राम जी का, सीता जी का, और कार्य सिद्धि हेतु प्रार्थना करे हनुमान जी का आह्वान करे तथा उनका सामान्य पूजन करे।
• इस क्रिया के बाद साधक 'हं' बीज का उच्चारण कुछ देर करे तथा उसके बाद अनुलोम विलोम प्राणायाम करे।
• प्राणायाम के बाद साधक हाथ में जल ले कर संकल्य करे तथा अपनी मनोकामना बोले।
साधक को यह क्रिया एकांत में करना चाहिए, अगर साधक अपने कमरे में यह क्रिया कर रहा हो उस। समय उसके साथ कोई और दूसरा व्यक्ति नहीं होना चाहिए। शुद्ध चरित्र , शुद्ध भाव, शुद्ध शरीर होना चाहिए , उचित होगा की किसी एकांत कमरे या निर्जन स्थान, मन्दिर आदि का आश्रय लेकर साधना की जाय। साधिका हनुमान साधना या प्रयोग सम्प्यन कर सकती है। रजस्वला समय में यह प्रयोग या अन्य कोई भी साधना नहीं की जा सकती है। साधक साधिकाओं को यह प्रयोग करने से एक दिन पूर्व, प्रयोग के दिन तथा प्रयोग के दूसरे दिन अर्थात कुल 3 दिन ब्रह्मचर्य पालन करना चाहिए।
• सकाम उपासना में वस्त्र लाल रहे निष्काम में भगवे रंग के वस्त्रों का प्रयोग होता है। यदि सम्भव न हो सके तो केवल लाल वस्त्र का ही दोनों कर्मों में प्रयोग करे।
• दोनों ही कार्य में दिशा उत्तर रहे।
• साधक को भोग में गुड़ तथा उबले हुए चने, एक रोट जोकि साधक ने स्वयं बनायीं हो, अर्पित करने चाहिए।
• कोई भी फल अर्पित किया जा सकता है। खासकर के केले व जंगली फल।
• साधक दीयक तेल या गाय के घी का लगा सकता है।
• साधक को आक के पुष्य या लाल रंग के पुष्य समर्पित करने चाहिए।
• यह प्रयोग साधक किसी भी मंगलवार की रात्रि वैदिक में प्रांत काल अगर समय ना हो तो समय रात्रि 10 बजे के बाद का चयन करे।
• सर्व प्रथम साधक शुद्ध हो कर वस्त्र धारण कर के लाल आसान पर बैठ जाये।
• साधक अपने पास ही आक के 108 पुष्य रख ले।
• अगर किसी भी तरह से यह संभव न हो तो साधक कोई भी लाल रंग के 108 पुष्य अपने पास रख ले।
• अपने सामने किसी पूजा स्थान में लाल वस्त्र बिछा कर उस पर हनुमानजी का चित्र या यन्त्र या विग्रह को स्थापित करे।
• फिर उनके सामने तेल या घी का दीपक जलाये।
• साधक गुरु पूजन गुरु मंत्र का जाप करके गणपति जी से कार्य सिद्धि हेतु प्रार्थना करे और श्री राम जी का, सीता जी का, और कार्य सिद्धि हेतु प्रार्थना करे हनुमान जी का आह्वान करे तथा उनका सामान्य पूजन करे।
• इस क्रिया के बाद साधक 'हं' बीज का उच्चारण कुछ देर करे तथा उसके बाद अनुलोम विलोम प्राणायाम करे।
• प्राणायाम के बाद साधक हाथ में जल ले कर संकल्य करे तथा अपनी मनोकामना बोले।
• इसके बाद साधक राम रक्षा स्तोत्र या 'रां रामाय नमः' का यथा संभव जाप करे। साधक को उसी रात्रि में 108 बार पाठ करना है।
• हर एक बार पाठ पूर्ण होने पर एक पुष्य हनुमानजी के यंत्र/चित्र/विग्रह को समर्पित करे। इस प्रकार 108 बार पाठ करने पर 108 पुष्य समर्पित करने चाहिए। 108 पाठ पुरे होने पर साधक वापस 'हं' बीज का थोड़ी देर उच्चारण करे तथा जाय को हनुमानजी के चरणों में समर्पित कर दे। इस प्रकार यह प्रयोग पूर्ण होता है। साधक दूसरे दिन पूजन पुष्प तथा चित्र का विसर्जन कर दे।
1. हनुमान चालीसा सिद्धि विधान :- हनुमान चालीसा के 108 पाठ 41 दिन पर्यंत नित्य करें। अनुष्ठान घर के किसी स्वछ कमरे में या पीपल के वृक्ष के नीचे अथवा किसी मन्दिर में सम्पन्न करें , अनुष्ठान से पूर्व व समाप्ति के बाद में हनुमानजी जी को चोला अवश्य चढ़ाए। हनुमान चालीसा में श्री राम नाम से तुलसी, गूगल, घी, तिल, से दशांश हवन करें। किसी भूखे निर्धन व असहाय जरूरतमंद व्यक्ति का मदद करें और अपने सामर्थ्य अनुसार गौ माता और बन्दरों (अभाव में किसी भी पशु अथवा पक्षि) के लिए भोजन और जल का प्रबंध करें। प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप में किसी न किसी माध्यम से हनुमानजी के दर्शन साधक को प्राप्त होते हैं।
• हर एक बार पाठ पूर्ण होने पर एक पुष्य हनुमानजी के यंत्र/चित्र/विग्रह को समर्पित करे। इस प्रकार 108 बार पाठ करने पर 108 पुष्य समर्पित करने चाहिए। 108 पाठ पुरे होने पर साधक वापस 'हं' बीज का थोड़ी देर उच्चारण करे तथा जाय को हनुमानजी के चरणों में समर्पित कर दे। इस प्रकार यह प्रयोग पूर्ण होता है। साधक दूसरे दिन पूजन पुष्प तथा चित्र का विसर्जन कर दे।
1. हनुमान चालीसा सिद्धि विधान :- हनुमान चालीसा के 108 पाठ 41 दिन पर्यंत नित्य करें। अनुष्ठान घर के किसी स्वछ कमरे में या पीपल के वृक्ष के नीचे अथवा किसी मन्दिर में सम्पन्न करें , अनुष्ठान से पूर्व व समाप्ति के बाद में हनुमानजी जी को चोला अवश्य चढ़ाए। हनुमान चालीसा में श्री राम नाम से तुलसी, गूगल, घी, तिल, से दशांश हवन करें। किसी भूखे निर्धन व असहाय जरूरतमंद व्यक्ति का मदद करें और अपने सामर्थ्य अनुसार गौ माता और बन्दरों (अभाव में किसी भी पशु अथवा पक्षि) के लिए भोजन और जल का प्रबंध करें। प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप में किसी न किसी माध्यम से हनुमानजी के दर्शन साधक को प्राप्त होते हैं।
संकट निवारण हेतु विशेष :-
हनुमान जी संकट मोचन के नाम से भी प्रसिद्ध है इसलिए तुलसी के पत्तों पर केसर चंदन या अष्ठगंध से राम नाम लिखें और उनकी माला बनाकर हनुमान जी को पहनाए अथवा लौंग की माला लाल धागे से तैयार कर के पहिनाने से भी क्रूर ग्रहों की दशा शांत होती है। यह क्रिया आप अपने घर पर भी सम्पन्न कर सकते हैं और मन्दिर में भी सम्पत्र कर सकते हैं। हनुमान जी को निम्बू की माला बनाकर पहनाने से घोर कष्टों से मुक्ति मिलती है भक्त को। गूगल व जायफल के धूनी देने से भी संकट निवारण होता है।
हनुमान जी संकट मोचन के नाम से भी प्रसिद्ध है इसलिए तुलसी के पत्तों पर केसर चंदन या अष्ठगंध से राम नाम लिखें और उनकी माला बनाकर हनुमान जी को पहनाए अथवा लौंग की माला लाल धागे से तैयार कर के पहिनाने से भी क्रूर ग्रहों की दशा शांत होती है। यह क्रिया आप अपने घर पर भी सम्पन्न कर सकते हैं और मन्दिर में भी सम्पत्र कर सकते हैं। हनुमान जी को निम्बू की माला बनाकर पहनाने से घोर कष्टों से मुक्ति मिलती है भक्त को। गूगल व जायफल के धूनी देने से भी संकट निवारण होता है।
विजय प्राप्ति तथा शत्रु बाधा के लिये हनुमान जी के मंदिर में उन्हें ध्वज/पताका चढ़ाये और पुरानी पताका को लेकर अपने दुकान या मकान के ऊपर लगा सकते हैं । इससे पूर्ण सुरक्षा प्राप्त होता है। शत्रुओं पर विजय भी सुनिश्चित होता है।
हनुमद् सहस्रनाम प्रदक्षिणा विधि :- हनुमान सहस्रनाम को पढ़ते हुए 1008 बार हनुमानजी का परिक्रमा करने से संकट दूर होते हैं व अभीष्ट मनोरथ कि पूर्ति होती है। अगर सहस्रनाम नहीं पढ़ सकते हैं तो हनुमान जी के 108 नाम का पाठ सम्पन्न कर 108 प्रदक्षिणा सम्पन्न करना चाहिए। यह प्रयोग को 7 या 11 शनिवार अथवा मंगवार को करने से लाभ प्राप्त होता है। यह प्रयोग को सम्पन्न करने से शरीर मे बल बुद्धि शक्ति और पुरुषार्थ का विकास होता है और व्यक्ति अपने अंदर एक दिव्य ऊर्जा प्रभाह को मेहसूस करता है।
हनुमद् सहस्रनाम प्रदक्षिणा विधि :- हनुमान सहस्रनाम को पढ़ते हुए 1008 बार हनुमानजी का परिक्रमा करने से संकट दूर होते हैं व अभीष्ट मनोरथ कि पूर्ति होती है। अगर सहस्रनाम नहीं पढ़ सकते हैं तो हनुमान जी के 108 नाम का पाठ सम्पन्न कर 108 प्रदक्षिणा सम्पन्न करना चाहिए। यह प्रयोग को 7 या 11 शनिवार अथवा मंगवार को करने से लाभ प्राप्त होता है। यह प्रयोग को सम्पन्न करने से शरीर मे बल बुद्धि शक्ति और पुरुषार्थ का विकास होता है और व्यक्ति अपने अंदर एक दिव्य ऊर्जा प्रभाह को मेहसूस करता है।
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