दुर्गा सप्तशती के कुछ सिद्ध सम्पुट मन्त्र
दुर्गा सप्तशती का नित्य पाठ अथवा नवरात्र-पाठ बहुत आदर से किया जाता है । जब भी कोई संकट आता है अथवा किसी विशेष कार्य की सिद्धि अपेक्षित होती है, तो नवचण्डी, शतचण्डी और सहस्रचण्डी पाठ करवाये जाते है । इन पाठों में अधिक शक्ति लाने के लिए विभिन्न मन्त्रों, बीज मन्त्रों या श्लोक मन्त्रों के सम्पुट लगाकर पाठ करने-कराने का विधान अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है, अतः यहाँ कुछ मन्त्रों का संकेत दिया जाता है। इनका प्रयोग प्रति मन्त्र-पद्य के आदि-अन्त में पाठ करने से सम्पुट होता है। वैसे इनके आदि अन्त में ॐ ह्रीं अथवा केवल ह्रीं बीज जोड़कर जप भी किया जा सकता है ।
(१) सर्वविध मंगल-प्राप्ति के लिए -
सर्वमङ्गलमांगल्ये, शिवे सर्वार्थसाधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
दुर्गा सप्तशती का नित्य पाठ अथवा नवरात्र-पाठ बहुत आदर से किया जाता है । जब भी कोई संकट आता है अथवा किसी विशेष कार्य की सिद्धि अपेक्षित होती है, तो नवचण्डी, शतचण्डी और सहस्रचण्डी पाठ करवाये जाते है । इन पाठों में अधिक शक्ति लाने के लिए विभिन्न मन्त्रों, बीज मन्त्रों या श्लोक मन्त्रों के सम्पुट लगाकर पाठ करने-कराने का विधान अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है, अतः यहाँ कुछ मन्त्रों का संकेत दिया जाता है। इनका प्रयोग प्रति मन्त्र-पद्य के आदि-अन्त में पाठ करने से सम्पुट होता है। वैसे इनके आदि अन्त में ॐ ह्रीं अथवा केवल ह्रीं बीज जोड़कर जप भी किया जा सकता है ।
(१) सर्वविध मंगल-प्राप्ति के लिए -
सर्वमङ्गलमांगल्ये, शिवे सर्वार्थसाधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
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